कानपुर में बवासीर की समस्या से परेशान एक मरीज ने किसी नीम- हकीम की सलाह पर गर्म पत्थर से सिकाई शुरू कर दी थी. लेकिन सिकाई के दौरान पत्थर उसके शरीर में चला गया. ऐसे में उसकी हालत बिगड़ गई और डॉक्टरों ने सर्जरी करके पत्थर निकाला तब मरीज की जान बची. पत्थर का वजन करीब डेढ़ किलो था. मरीज ने डॉक्टरों को बताया कि उसने किसी डॉक्टर से इलाज न कराकर नीम- हकीम की सलाह ली, जिससे उसकी ये हालत हुई है. कानपुर की इस घटना के बाद ये समझना जरूरी है कि बवासीर के इलाज के लिए क्यों किसी झोला छाप डॉक्टर या नीम- हकीम की सलाह नहीं लेनी चाहिए.
इस बीमारी का सही और सटीक इलाज क्या है ये क्यों होती है इस बारे में सर्जन डॉ. ब्रहमानंद लाल ने Aajtak.in को बताया है. वह कहते हैं कि बवासीर एक ऐसी समस्या है जो भारत में आम है, लेकिन अधिकतर लोग ऐसे हैं जो इसका सटीक इलाज नहीं कराते हैं. पहले तो लोग इस बीमारी को अपने किसी परिजन या डॉक्टर को बताने से ही बचते हैं, जब समस्या बहुत बढ़ जाती है तब इलाज के लिए जाते हैं. ऐसे में कई मामलों में सर्जरी ही जरूरी होती है. सर्जरी की बात सुनकर कुछ मरीज घरेलू नुस्खों या फिर नीक- हकीम के चक्कर में पड़ जाते हैं. जो गलत है.
बवासीर क्या होती है
बवासीर गुदा केआसपास की नसों में सूजन की समस्या है. इसमें व्यक्ति को शौच करने के दौरान खून आना, गुदा के आसपास दर्द या खुजली होना, गांठ महसूस होना और कभी-कभी शौच के समय कुछ बाहर निकलने जैसे लक्षण दिखते हैं. जिन लोगों को कई सालों से कब्ज की समस्या होती है और ठीक नहीं हो पाती है उनमें बवासीर होने का रिस्क अधिक होता है.
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गर्म पत्थर या किसी चीज से सिकाई क्यों खतरनाक हो सकता है?
बवासीर के इलाज में गर्म पत्थर को शरीर के अंदर डालना या किसी वस्तु से दबाव देना कोई मान्य मेडिकल उपचार नहीं है. इससे चोट, जलने, खून बहने, इंफेक्शन और अंदरूनी अंगों को नुकसान का खतरा हो सकता है.कानपुर की घटना में भी मरीज को ऐसी ही गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा. कुछ लोग एलोवेरा या अलग- अलग तेल का यूज करते हैं या लेप भी लगाते हैं, लेकिन ये सब चीजें फायदे की जगह नुकसान करती हैं.
बवासीर का इलाज कैसे होता है?
बवासीर का इलाज मरीज की स्थिति और मेडिकल कंडीशन के हिसाब से किया जाता है. अगर बीमारी शुरुआती चरण में ही है तो अच्छी डाइट जैसे फाइबर लेने, पानी पीने, कब्ज से बचने और शौच के दौरान ज्यादा जोर न लगाने की सलाह दे सकते हैं. कुछ मामलों में डॉक्टर दवाएं भी देते हैं.
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कब पड़ती है सर्जरी की जरूरत
डॉ. ब्रह्मानंद लाल ने बताया कि अगर लक्षण गंभीर हो जाते हैं जैसे मरीज को बहुत दर्द हो रहा है, बार-बार खून आ रहा है, तो सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है. इसको ग्रेड-3 और ग्रेड 4 कहते हैं. इसके अलावा अगर गांठ बढ़ रही है या दवाओं के बाद भी बार- बार वापिस आ रही है तो फिर सर्जरी जरूरी है.
डॉ लाल कहते हैं कि हमेशा ध्यान रखें कि बवासीर के इलाज में कभी भी घरेलू नुस्खों, नीम - हकीम और झोला छाप डॉक्टरों के फेर में न फंसें. अगर आपको बवासीर के लक्षण दिख रहे हैं तो इस मामले में हमेशा अच्छे और प्रतिष्ठित डॉक्टर से सलाह लें.
आजतक हेल्थ डेस्क