डायबिटीज मरीजों को हो सकती है लिवर की ये बीमारी, ऐसे दिखते हैं लक्षण, जानें बचाव के तरीके

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है. इससे लिवर की एक बीमारी होने का भी रिस्क होता है. यह कौन सी बीामरी है और इसके कारण, लक्षण और बचाव के बारे में डॉक्टर ने बताया है.

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डायबिटीज के खतरे ( PHOTO-ITGD) डायबिटीज के खतरे ( PHOTO-ITGD)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

अगर आपका पेट नहीं निकला है, बीएमआई ठीक है, लेकिन डायबिटीज है तो फिर फैटी लिवर होने का खतरा भी रहता है.  हेल्थलाइन के मुताबिक, डायबिटीज के में कई परेशानियां हो सकती हैं, जिनमें मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) भी शामिल है, जिसे पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता था.

इस स्थिति में लिवर में बहुत ज्यादा फैट जमा हो जाता है. अमेरिका में लगभग 24% लोगों को MASLD है, लेकिन जो वयस्क मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज दोनों से जूझ रहे हैं, उनमें यह आंकड़ा 70% से ज़्यादा है. MASLD का मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज़ से गहरा संबंध है. MASLD वाले कुछ लोगों में बीमारी का एक ज्यादा गंभीर रूप विकसित हो सकता है. इस स्थिति में न केवल लिवर में फैट जमा होता है, बल्कि सूजन और लिवर की कोशिकाओं को नुकसान भी पहुंचता है. यह आगे चलकर लिवर में स्कारिंग और नुकसान (सिरोसिस) और लिवर फेलियर का रूप ले सकता है, जो जानलेवा हो सकता है.

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डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर होने का खतरा क्यों बढ़ जाता है

आर्टेमिस हॉस्पिटल्‍स में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी विभाग में सीनियर कन्‍सलटेंट डॉ. बिमल कुमार साहू बताते हैं कि  जिन लोगों को डायबिटीज होती है उनमें फैटी लिवर की बीमारी होने के चांस भी अधिक होते हैं. यह समस्या उन लोगों में ज्यादा होती है जिनमें डायबिटीज इंसुलिन रजिस्टेंस के कारण हो जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इंसुलिनरेजिस्टेंस मिलकर लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ा सकते हैं. होता यूं है कि जब शरीर की सेल्स  इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं, तो इन्सुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है.  इसके कारण ब्लड शुगर बढ़ने लगता है.

इस दौरान शरीर में फैट के मेटाबॉलिज्म पर भी असर  होता है और ज्यादा फैटी एसिड लिवर तक पहुंचने लगता है. लिवर इन  फैटी एसिड को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता है. इससे लिवर में बहुत ज्यादा फैट जमा हो सकता है. यही वजह है कि टाइप टू डायबिटीज वाले लोगों में फैटी लिवर का जोखिम बहुत ज्यादा हो जाता है.

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वहीं, डायबिटीज में वजन पर काफी ज्यादा फर्क पड़ता है. व्यक्ति बाहर से पतला दिखता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसे फैटी लिवर नहीं है. यानी अगर आपका वजन समान नहीं है या पेट बाहर नहीं निकला तब भी आप को फैटी लिवर हो सकता है. इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक  असंतुलित होने पर इसका खतरा बना रहता है. इसलिए आपको अगर डायबिटीज है तो समय समय पर अपने लिवर का चेकअप कराते रहें. 

फैटी लिवर के क्या लक्षण होते हैं

जी मिचलाना

वजन कम होना

भूख न लगना

त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना (पीलिया)

पेट और पैरों में सूजन

मानसिक उलझन

बहुत ज्यादा थकान

मांसपेशियों में कमजोरी

डायबिटीज के मरीज इन बातों का ध्यान रखें

शुगर लेवल को कंट्रोल में रखें

रोज एक्सरसाइज करें

मीठा और अधिक मैदा खाने से बचें

मानसिक तनाव से बचें 

 

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