Dengue vaccine : क्या एक इंजेक्शन से जिंदगीभर होगा डेंगू की बीमारी से बचाव, किनके लिए जरूरी है वैक्सीन

भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने जापान की दवा कंपनी ताकेदा की क्यूडेंगा डेंगू वैक्सीन को 4 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के लिए मंजूरी दी है. यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है जो गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करती है.

Advertisement
डेंगू वैक्सीन ( Photo- ITG) डेंगू वैक्सीन ( Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:48 PM IST

भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) ने जापान की दवा कंपनी 'ताकेदा' की क्यूडेंगा (QDENGA) वैक्सीन को भारत में उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है. यह भारत की पहली डेंगू वैक्सीन है. इसे 4 से 60 साल तक की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है. उम्मीद है कि आने वाले कुछ समय में वैक्सीन से टीकाकरण भी शुरू हो सकता है. डेंगू की वैक्सीन आने के बाद लोगों के मन में इससे संबंधित कई सवाल भी है. जैसे क्या एक इंजेक्शन लगने से जीवनभर डेंगू नहीं होगा? वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है? ये किनको जरूर लगवानी चाहिए. 

Advertisement

वैक्सीन से संबंधित इन सवालों का जवाब जानने से पहले डेंगू को समझना जरूरी है. डेंगू एक ऐसी बीमारी है जो एडीज मच्छर के काटने से होती है. डेंगू के वायरस के चार स्ट्रेन (DENV-1, DENV-2, DENV-3, DENV-4) होते हैं. डेंगू से संक्रमित मच्छर में इनमें से कोई भी स्ट्रेन हो सकता है, जो इंसान में डेंगू की बीमारी का कारण बनता है. अधिकतर मामलों में यह कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह मौत का कारण भी बन सकता है. डेंगू में शॉक सिंड्रोम में मौत होने का रिस्क होता है. यह शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम होने से हो सकता है. वैक्सीन लाने का मुख्य मकसद इस बीमारी के मामलों और मौतों को कम करना है. 

क्या एक इंजेक्शन लगवाने के बाद जिंदगीभर डेंगू नहीं होगा?

Advertisement

इस बारे में दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने बताया है. डॉ. सुभाष कहते हैं कि डेंगू वैक्सीन गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में मदद करती है. वैक्सीन की प्रभावशीलता उसके निर्धारित डोज शेड्यूल को पूरा करने पर निर्भर करती है. इस वैक्सीन की 2 डोज तीन महीने के गैप में लगनी है.

डॉ गिरि कहते हैं कि वैक्सीन लगने का यह मतलब नहीं है कि लोग लापरवाही करें और डेंगू से बचाव करना छोड़ दें. वैक्सीन लगने का फायदा यह होता है कि गंभीर लक्षण होने की आशंका खत्म हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं होता है कि वैक्सीन लग गई तो कभी डेंगू होगा ही नहीं. 

यह भी पढ़ें: भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मिली मंजूरी! 4 से 60 साल तक के लोग लगवा सकेंगे QDENGA, WHO भी कर चुका है सिफारिश

डेंगू वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट्स तो नहीं होंगे?

डॉ. सुभाष कहते हैं कि वैक्सीन काफी रिसर्च और ट्रायल के बाद विकसित की जाती है. इसके कुछ गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते हैं. अधिकतर मामलों में इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, हल्का बुखार, सिरदर्द या थकान हो सकती है, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाती है. ऐसे में जब वैक्सीन बाजार में आएगी तो सभी पात्र लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह पर इसको लगवा लेना चाहिए. इस बात का भी ध्यान रखें कि वैक्सीन का पूरा कोर्स करें. केवल पहली डोज लगवाकर छोड़ देना काफी नहीं माना जाता. पूरी सुरक्षा के लिए दोनों टीके लें.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Dengue Vaccine: अब डेंगू नहीं लेगा लाखों की जान! ब्राजील ने मंजूर की दुनिया की पहली सिंगल-डोज वैक्सीन

क्या स्वस्थ लोगों को वैक्सीन की जरूरत नहीं है

डॉ सुभाष कहते हैं कि डेंगू में इम्यूनिटी का कोई खास रोल नहीं है. यह ऐसी बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है, हालांकि लक्षणों में अंतर जरूर हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि स्वस्थ लोगों को वैक्सीन की जरूरत नहीं है. वैक्सीन का मकसद गंभीर संक्रमण के खतरे को कम करना है. टीका किसे वैक्सीन लगनी चाहिए, इसका निर्णय डॉक्टर और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार होना चाहिए. लेकिन बुजुर्ग, किसी दूसरी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लगवाना जरूरी है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »