हजारों लोगों को मारने लायक जहर खरीदना है नींद की गोली खरीदने से भी आसान, हमने आजमा कर देखा

अगर आपसे कोई कहे कि हजारों लोगों की जान लेने लायक खतरनाक जहर खरीदना, बिना डॉक्टर की पर्ची के नींद की दवा खरीदने से भी आसान है तो आप यकीन नहीं करेंगें. लेकिन हमने ये कर के देखा. जो हुआ उससे आप हैरान रह जाएंगे.

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जिंक फॉस्फाइड मुख्य रूप से इंडियामार्ट और ट्रेडइंडिया जैसे बीटूबी (बिजनेस-टू-बिजनेस) पोर्टल्स पर बिकता है. (Photo- ITG) जिंक फॉस्फाइड मुख्य रूप से इंडियामार्ट और ट्रेडइंडिया जैसे बीटूबी (बिजनेस-टू-बिजनेस) पोर्टल्स पर बिकता है. (Photo- ITG)

ज्योति द्विवेदी / बालकृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:48 PM IST

आपने मुंबई की इन दो घटनाओं के बारे में तो सुना ही होगा- 26 अप्रैल को एक परिवार के चार सदस्यों की तरबूज खाने के बाद रहस्यमय तरीके से मौत हो गई. बाद में फोरेंसिक जांच में पता लगा कि उनके शरीर में जहर के अंश पाए गए.

26 जून को फैयाज प्रेमजी नाम का एक युवक मुहर्रम के जुलूस के दौरान लोगों को पेन-किलर कैप्सूल के नाम पर जहरीले कैप्सूल बांटता हुआ पकड़ा गया. गिरफ्तार होने के बाद उसके पास से करीब 15,000  जहर भरे कैप्सूल बरामद हुए.

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इन दोनों घटनाओं में एक बात खास थी. दोनों ही घटनाओं में जिस जहर का इस्तेमाल हुआ, वो था जिंक फॉस्फाइड. वही केमिकल जिससे चूहे मारने की दवा बनायी जाती है.

फैयाज ने पुलिस को बताया कि उसने जिंक फॉस्फाइड ऑनलाइन खरीदा था. ऐसे में, हमने ये पता लगाने की कोशिश की कि इसे ऑनलाइन खरीदना क्या सचमुच इतना आसान है. हम ये भी पता लगाना चाहते थे कि क्या इन दो चर्चित घटनाओं के बाद इस तरह के खतरनाक केमिकल की बिक्री को लेकर सख्ती बढ़ी है?

हमने पाया कि इसे खरीदना उतना ही आसान है जितना चॉकलेट खरीदना. बेधड़क, जितना चाहो उतना खरीदो और आपके बताए पते पर इसकी डिलिवरी हो जाएगी. बिना किसी जांच-पड़ताल के. बिना आपसे कोई जरूरी डॉक्यूमेंट मांगे. कीमत है 500 से लेकर हजार रुपये प्रति किलोग्राम.

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जिंक फॉस्फाइड मुख्य रूप से इंडियामार्ट और ट्रेडइंडिया जैसे बीटूबी (बिजनेस-टू-बिजनेस) पोर्टल्स पर बिकता है. ये ऐसी वेबसाइट हैं जो निर्माताओं, थोक दुकानदारों और निर्यातकों को जोड़ती हैं.

इनके जरिये आप 1000 किलो में जिंक फॉस्फाइड भी ऑर्डर कर सकते हैं. हमने इस केमिकल को बेचने वाले चार ऑनलाइन विक्रेताओं से संपर्क किया. इनमें से दो, 50 किलो जिंक फॉस्फाइड हमारे बताए गए फर्जी पते पर भेजने को तैयार भी हो गए. बिना कोई जांच-पड़ताल किए.

जीएसटी नहीं- कोई बात नहीं  

हमने 50 किलो जिंक फॉस्फाइड खरीदने के लिए कुछ वेबसाइट्स पर रिक्वेस्ट डाली. कुछ ही घंटों के अंदर हमारे पास अलग-अलग कंपनियों से कॉल, मैसेज और ईमेल आने लगे.  

मथुरा, यूपी की एक कंपनी, 'आनंद ट्रेडिंग कंपनी' के एक सेल्समैन ने सीधा ये पूछा कि ये 50 किलो चूहेमार दवा किस पते पर भेजनी होगी. हमने उसे गाजियाबाद का एक फर्जी पता भेज दिया. जब उसने हमारा जीएसटी नंबर मांगा तो हमने उससे पूछा कि क्या इसके बिना काम चल सकता है? उसका जवाब था, "आपकी मर्जी!"

'आनंद ट्रेडिंग कंपनी' से जुड़े उस व्यक्ति ने हमें सलाह दी कि हमें 'रैटिल' ब्रांड का जिंक फॉस्फाइड लेना चाहिए जिसकी कीमत हजार रुपये किलो है. उसने बयाया कि इसके 20-20 किलो के डब्बे आते हैं. लिहाजा हमें 50 की जगह 60 किलो ऑर्डर करना होगा. जब हमने इसके लिए हामी भर दी तो उन्होंने हमें पेमेंट के लिए क्यूआर कोड भेज दिया. 

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जब हमने उसे बताया कि हम आजतक से बात कर रहे हैं और वो इतना खतरनाक केमिकल बिना किसी जांच-पड़ताल के हमें भेजने को कैसे तैयार हो गया, तो उसने माफी मांगी और कहा कि वो अब ऐसा कभी नहीं करेगा. फिर उसने अपने कई मैसेज डिलीट कर दिए.  

इंदौर, मध्य प्रदेश की कंपनी 'बी एंड ब्रदर्स बाड़नगरवाला' ने भी इंडियामार्ट पर हमारी रिक्वेस्ट को देखकर हमें कॉल किया. उनकी एक सेल्सगर्ल, 43,2000 रुपये में कमांडो ब्रांड का जिंक फॉस्फाइड हमारे बताए फर्जी पते पर भेजने के लिए तैयार हो गई.

हालांकि जब हमने उससे पूछा कि क्या इसे खरीदने के लिए फॉर्म 13 भरना जरूरी है, इस पर उसका जवाब था कि ये जरूरी नहीं है और उनकी कंपनी इस केमिकल की डिलिवरी करती ही रहती है.

हमने उसे भी अपना जीएसटी नंबर नहीं बताया, लेकिन इसके बावजूद उसने हमें पेमेंट के लिए अपना क्यूआर कोड भेज दिया.

'इनसेक्टिसाइड रूल्स ऑफ 1971' के मुताबिक इस तरह के खतरनाक केमिकल बेचने वालों को फॉर्म 13 में थोक में ऐसे विषैले केमिकल खरीदने वाले सभी ग्राहकों का लेखाजोखा रखना होता है. हालांकि ये डॉक्यूमेंट, केमिकल बेचने वालों को भरना होता है, न कि खरीदने वालों को. उन्हें ये लेखा जोखा ये संबंधित अधिकारियों को भेजना होता है.

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 नियम क्या कहते हैं  

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर वकील आदिश अग्रवाल ने आजतक को बताया कि जिंक फॉस्फाइड की बिक्री से जुड़े नियम, 1968 के 'इनसेक्टिसाइड्स एक्ट' और 1971 के 'इनसेक्टिसाइड्स रूल्स' में दर्ज हैं. इस तरह के जहरीले केमिकल को थोक में बेचते समय लापरवाही बरतना वाकई खतरनाक है.

आदिश ने हमें बताया कि 1993 में सुरक्षा के मद्देनजर इन नियमों में संशोधन कर इन्हें और सख्त बनाया गया था. इन्हें बेचने वालों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि जो लोग इतनी ज्यादा मात्रा में इन्हें खरीदते हैं, उनके पास या तो इन्हें खरीदने का लाइसेंस हो, या वो इसे खरीदने का कोई संतोषजनक कारण बताएं. ऐसे केमिकल्स के व्यापारियों को, खरीददारों के नाम, पते और उनके व्यवसाय से जुड़ी अहम जानकारियों का लेखाजोखा रखना चाहिए.

उन्होंने ये भी कहा, "जिंक फॉस्फाइड बेचने वाले किसी भी व्यक्ति को खरीददार की पहचान की पुष्टि किए बिना, खरीदने का मकसद जाने बिना, और फॉर्म 13 भरे बिना ही उसे बेचने के लिए नहीं तैयार होना चाहिए."  

एक चुटकी काफी

जिंक फॉस्फाइड स्लेटी-काले रंग का एक पाउडर होता है. नमी के संपर्क में आने पर इससे लहसुन जैसी गंध आती है. 'नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी', भोपाल में 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' के पद पर कार्यरत डॉ. हर्ष शर्मा ने हमें बताया कि 2 से 5 ग्राम तक जिंक फॉस्फाइड एक इंसान को मारने के लिए पर्याप्त है. जब ये शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आता है तो इससे फॉसफीन नाम की बेहद जहरीली गैस बनती है. इससे जी-मिचलाने, उलटी, और पेट दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं. साथ ही, दिल, लिवर और किडनी जैसे आंतरिक अंगों को भी नुकसान पहुंच सकता है.

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'किंग जॉर्ज मेडिकल यूनविर्सिटी', लखनऊ के 'डिपार्टमेंट ऑफ फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी' की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिउली राठौर ने हमें बताया कि जिंक फॉस्फॉइड के जहर का असर खत्म करने की कोई कारगर दवा नहीं है. डॉक्टर इसका इलाज मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर करते हैं. इसे खाने वाले ज्यादातर लोग, मल्टी-ऑर्गेन फेलियर की वजह से मरते हैं.  

वैसे तो ज्यादातर लोग ये बात जानते ही हैं कि चूहामार दवा, इनसानों के लिए भी विषैली होती है. हम घर में इसका इस्तेमाल करते वक्त कई सावधानियां बरतते हैं. इसे बच्चों की पहुंच से दूर रखते हैं. खाने की चीजों से दूर रखते हैं. इसे छूने के बाद साबुन से हाथ भी धोते हैं.

ऐसा खतरनाक जहर खरीदना किराने की दुकान से चूहामार दवा खरीदने जितना आसान तो कतई नहीं होना चाहिए. लेकिन अभी तो ऐसा ही है.

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