फैक्ट चेक: मराठी न सीख पाने के चलते महाराष्ट्र छोड़कर नहीं गया ये ऑटो ड्राइवर, ये है वीडियो की असलियत 

मराठी भाषा की अनिवार्यता के डर से ऑटो चालक के मुंबई छोड़ने का वायरल दावा गलत निकला. वीडियो पुराना है और ऑटो मालिक विजय प्रताप पाल ने निजी कारणों से गांव जाने व बाद में महाराष्ट्र लौटने की बात कही.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
ऑटो-रिक्शा ड्राइवर्स के लिए मराठी अनिवार्य होने के का नियम लागू होने के बाद मराठी न सीख पाने के चलते ये आदमी अपना ऑटो लेकर महाराष्ट्र छोड़कर चला गया.
सच्चाई
ये दावा गलत है. ऑटो ड्राइवर विजय प्रताप पाल ने आजतक को बताया कि वो निजी कारणों से अप्रैल में अपने गांव गए थे और अगस्त में वापस महाराष्ट्र आ गए.

फैक्ट चेक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:56 PM IST

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब ड्राइवर्स के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है. इसका मकसद यात्रियों और ड्राइवर्स के बीच संवाद को बेहतर बनाना और स्थानीय भाषा को बढ़ावा देना है.

इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो ( https://archive.is/1qyMw ) तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग एक ऑटो रिक्शा को ट्रेन के लगेज (पार्सल) कोच में चढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं. इसे शेयर करते हुए कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि मुंबई में आरटीओ की सख्ती और मराठी भाषा की अनिवार्यता के डर से ये ऑटो ड्राइवर मुंबई छोड़कर अपने राज्य वापस जा रहा है.  

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आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि वीडियो पुराना है. वीडियो में जिस ऑटो को ट्रेन में चढ़ाया जा रहा है, उसके मालिक विजय प्रताप पाल ने आजतक को बताया कि वो निजी कारणों से अप्रैल में अपने गांव गए थे और अगस्त में वापस महाराष्ट्र आ गए.

कैसे पता लगाई सच्चाई?

वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए सेंट्रल रेलवे, मुंबई डिवीजन के DRM ने बताया कि ये लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से वाराणसी (BNRS) के बीच 1 अप्रैल से 15 जून के बीच चलाई गई एक स्पेशल ट्रेन (01073/74) है. और अभी ये ट्रेन नहीं चल रही है.

इसके अलावा DRM ने बताया कि ये वीडियो पुराना है और रेलवे के मौजूदा नियमों और प्रक्रिया के अनुसार, इस ऑटो को 27 अप्रैल को पार्सल के तौर पर बुक किया गया था, जो कि लोकमान्य तिलक टर्मिनस से बनारस जाना था.

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हमारे मुंबई आजतक के संवाददाता एजाज खान ने इस ऑटो ड्राइवर से बात की. ऑटो ड्राइवर का नाम विजय प्रताप पाल है और वो वाराणसी के पास गाजीपुर के रहने वाले हैं. वही इस ऑटो के मालिक हैं. उन्होंने वायरल दावों का खंडन किया और बताया कि उन्होंने कुछ निजी कारणों से गांव जाकर रिक्शा चलाने का फैसला किया था. लेकिन गांव में ई-रिक्शा की संख्या अधिक होने की वजह से उन्हें पर्याप्त आमदनी नहीं हो रही थी. इसलिए वो 7 अगस्त को अपना ऑटो लेकर महाराष्ट्र वापस लौट आए.

ड्राइवर विजय ने ये भी बताया कि उन्हें मराठी भाषा आती है और वीडियो बनाने वाले शख्स ने मजाक या सनसनी फैलाने के मकसद से इसमें गलत और भ्रामक जानकारी जोड़ दी.

महाराष्ट्र सरकार ने 1 मई से ऐलान किया था कि ड्राइवर्स को मराठी भाषा का बेसिक ज्ञान अनिवार्य रूप से होना चाहिए. इसके बाद गैर-मराठी भाषी ड्राइवर्स के लिए 15 अगस्त तक 105 दिनों का विशेष ट्रेनिंग और असेसमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया. खबर के मुताबिक इस दौरान 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने बेसिक मराठी भाषा सीख ली. इसके बाद 20 अगस्त से आरटीओ टीमों ने पूरे राज्य में जमीनी स्तर पर टेस्ट शुरू कर दिए.

साफ है कि एक पुराने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.

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( इनपुट: एजाज खान )

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