सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें सफेद कुर्ता-पायजामा और टोपी पहने एक व्यक्ति घास-फूस से बनी किसी अस्थायी बाउंड्री या दीवार को जबरन तोड़ते हुए नजर आ रहा है. वीडियो किसी ग्रामीण इलाके का है. उस व्यक्ति के साथ कुछ और लोग भी मौजूद हैं जो बाउंड्री हटाने में उसका साथ दे रहे हैं.
वीडियो को शेयर करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि ये यूपी के गोंडा का मामला है, जहां एक गांव में कुछ मुस्लिमों ने इकठ्ठा होकर हिंदुओं के घर पर हमला कर दिया.
मिसाल के तौर पर एक्स पर एक व्यक्ति ने लिखा, “यूपी के गोंडा जिले अंतर्गत इटियाथोक गांव गिरधरपुर में संगठित होकर मुसलमानों ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के घरों में बोला हमला. गांव में फैला दहशत का माहौल.”
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो है तो गोंडा का ही, लेकिन इसमें कोई भी हिंदू-मुस्लिम एंगल नहीं है. ये एक गांव में सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण हटाने को लेकर दो मुस्लिम पक्षों में हुए विवाद का वीडियो है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
हमने गोंडा के इटियाथोक थाना प्रभारी कमलकांत त्रिपाठी से बात की और घटना की जानकारी मांगी. उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि ये वीडियो गोंडा के गजाधरपुर गांव का ही है और लगभग दो महीने पुराना है. उन्होंने इस घटना में किसी भी हिंदू-मुस्लिम एंगल से साफ इनकार किया और कहा कि सरकारी सड़क पर अतिक्रमण हटाने को लेकर दो मुस्लिम गुटों के बीच कहासुनी हो गई थी. ये वीडियो उसी वक्त का है.
वायरल वीडियो वाले एक एक्स पोस्ट के जवाब में गोंडा पुलिस ने 7 अगस्त को एक स्पष्टीकरण दिया था. इसमें पुलिस ने बताया था कि ये वीडियो 5 जून 2026 का है. गांव में एक सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण हटाने को लेकर ये विवाद हुआ था. बब्लू उर्फ अफरोज ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रखा था. वकील अहमद, इसरार अहमद, सलीम और तसलीम ने जब अतिक्रमण हटाने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ जो बाद में मारपीट में बदल गया.
बब्लू की शिकायत पर पुलिस ने बीएनएस की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया. पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने इसके बाद 16 जून 2026 को मौके पर पहुंचकर सरकारी रास्ते से अतिक्रमण हटाया. पुलिस के मुताबिक, फिलहाल मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति शांतिपूर्ण है.
हमारे गोंडा के संवाददाता अंचल श्रीवास्तव ने भी बताया कि ये विवाद दो मुस्लिम पक्षों के बीच हुआ था. इसमें कोई भी सांप्रदायिक एंगल नहीं है.
मो. महफूज़ आलम