एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली में कितने लोग जुटे -- इसको लेकर विपक्ष और बीजेपी के अपने-अपने दावे हैं. रैली से पहले कांग्रेस नेताओं ने 10 लाख लोगों के आने का दावा किया था. रैली के बाद बीजेपी ने सवाल किया कि आखिर 10 लाख लोग कहां थे, हमें भी दिखाइए.
इस बीच कुछ ऐसी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनका असल में कोई अस्तित्व ही नहीं है. मतलब ये कि इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से बनाया गया है. लेकिन इन तस्वीरों को रामलीला मैदान में हुई रैली का बताकर शेयर किया जा रहा है. इस खबर में हम ऐसी ही तीन तस्वीरों की बात करेंगे.
तस्वीर 1:
इस तस्वीर को एक व्यक्ति ने हैशटैग ‘#RamlilaMaidan’ के साथ एक्स पर शेयर किया और लिखा, “मोदी के विरोध मे ऐतिहासिक जनसैलाब.”
तस्वीर को गौर से देखने पर इसके दायीं तरफ नीचे की ओर ‘ग्रोक’ का लोगो नजर आता है. ग्रोक, एलन मस्क की कंपनी xAI का एक AI चैटबॉट है. इसके जरिये AI तस्वीरें बनाई जा सकती हैं. 'ग्रोक' से बनाई गई तस्वीरों पर उसका छोटा-सा लोगो भी बनकर आता है.
इसके अलावा AI डिटेक्टर टूल हाईव मॉडेरेशन ने भी इसके AI से बने होने की 99 फीसदी संभावना बताई है.
तस्वीर 2:
इस तस्वीर में भी जनसैलाब नजर आता है. एक व्यक्ति ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “क्या हुआ मोदी जी? आंखें खुल गई क्या? अंधभक्तों, गुस्सा मत होना! बेरोजगारी, महंगाई और वोट के अधिकार पर सवाल तो उठेंगे ही! रामलीला मैदान, दिल्ली.”
इस तस्वीर को ओपन एआई के टूल्स के जरिये बनाया गया है. हाईव मॉडेरेशन ने इस तस्वीर के भी AI से बने होने की 99 फीसदी संभावना बताई है.
तस्वीर 3:
इस तस्वीर को भी ‘वोट चोरी’ के खिलाफ रामलीला मैदान में हुई इंडिया ब्लॉक की रैली का बताकर शेयर किया जा रहा है. तस्वीर में दिख रहा मैदान लोगों से पूरा पैक नजर आ रहा है.
वायरल तस्वीर में जिस मैदान को दिखाया गया है, उसके चारों तरफ हरियाली और पेड़ ही पेड़ नजर आते हैं. जबकि असल में ऐसा नहीं है. असल में रामलीला मैदान के आसपास सड़कें और बिल्डिंग मौजूद हैं.
AI डिटेक्टर टूल से टेस्ट करने पर पता चला कि इसे भी ओपन एआई के टूल्स की मदद से बनाया गया है.
यानी साफ है कि रामलीला मैदान में हुई इंडिया ब्लॉक की रैली से जोड़कर शेयर की जा रहीं ये तस्वीरें असली नहीं हैं.
फैक्ट चेक ब्यूरो