इन हॉरर फिल्मों ने जीता है दर्शकों का दिल, क्या अमावस का चलेगा जादू

बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों का लेवल अब पहले से कहीं बेहतर हो चुका है. हॉरर फिल्में अब दमदार कंटेंट के दम पर अच्छा बिजनेस करती हैं.

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अमावस का पोस्टर अमावस का पोस्टर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 8:03 AM IST

बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों का लेवल अब पहले से कहीं बेहतर हो चुका है. हॉरर फिल्में अब दमदार कंटेंट के दम पर अच्छा बिजनेस करती हैं. एक वक्त था जब शांत स्क्रीनप्ले के बीच अचानक आई चीखने की आवाज और पुराने किले में लालटेन लिए खड़े दरबान ही बॉलीवुड की हॉरर फिल्मों की पहचान हुआ करती थी.

बॉलीवुड में रात (1992), महल (1949), बीस साल बाद (1962), राज (2002), फूंक (2008), हॉरर स्टोरी (2013), एक थी डायन(2013), परी (2018) और तुम्बाड (2018) जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस किया है. ये फिल्में न सिर्फ दर्शकों को दांतों तले उंगलिया दबाने के लिए मजबूर करने में कामयाब रहीं बल्कि इन्होंने टिकट खिड़की पर अच्छी कमाई भी की.

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अनुष्का शर्मा स्टारर फिल्म परी, सोहुम शाह स्टारर तुम्बाड और एक थी डायन जैसी फिल्मों ने दर्शकों को अच्छा और यूनिक कंटेंट परोसा. हॉरर फिल्में जब अच्छा कंटेंट परोसती हैं तो दर्शक भी टिकट के लिए पैसा खर्च करने पर चूकता नहीं है. एक वक्त तक ऐसा माना जाता रहा है कि भारतीय दर्शक को हॉरर फिल्में रास नहीं आती हैं. हालांकि आज कहानी बिलकुल उल्टी नजर आती है.

छोटा पर्दा हो या बड़ा पर्दा, भूत-प्रेत और डायन चुड़ैलों वाले धारवारिक व फिल्में खूब देखे जा रहे हैं. ऐसा भी नहीं है कि दर्शक अंधविश्वास के चलते इन फिल्मों व धारावाहिकों को देखते हैं. एक बड़े दर्शक वर्क का मानना है कि ये विषय मनोरंजक होते हैं और इसी वजह से वे इस तरह का कंटेंट देखते हैं.

इस शुक्रवार नरगिस फाखरी और मोना सिंह स्टारर फिल्म अमावस रिलीज होने जा रही है. यह एक हॉरर/मिस्ट्री/थ्रिलर फिल्म है जिसका निर्देशन भूषण पटेल ने किया है. फिल्म की कहानी एक प्रेमी जोड़े के बारे में है जो शहर से दूर एक किले में रात बिताने का फैसला करता है और फिर उन्हें अजीबोगरीब हालात का सामना करना पड़ता है. कहानी का प्लॉट काफी हद तक कॉमन है लेकिन बावजूद इसके फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर चलने की उम्मीदें जताई जा रही हैं.

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इस साल रिलीज होने जा रही यह पहली हॉरर फिल्म है और हॉरर फिल्में देखने वाला एक अलग दर्शक वर्ग है जो ऐसी फिल्में देखना पसंद करता है. तो यदि सिर्फ हॉरर के दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस फिल्म को फिलहाल कोई कॉम्पटीशन नहीं मिलने जा रहा है. इसके अलावा इस फिल्म के आगे-पीछे भी ऐसी कोई बड़ी फिल्म नहीं है.

हालांकि अमावस में कोई बड़ी स्टार कास्ट नहीं होने का नुकसान भी इसे हो सकता है. नरगिस फाखरी एक मशहूर चेहरा हैं लेकिन फिल्म की मार्केटिंग और प्रमोशन उतना मजबूत नहीं रहा है जो कि इसे अच्छा बिजनेस दिला पाए. इसके अलावा इसे मिलने वाली स्क्रीन्स भी जाहिर तौर पर एक बड़ा फैक्टर साबित होंगी.

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