'ऊंची दुकान, फीका पकवान', खुद को टीवी का शाहरुख खान बताने वाले धीरज धूपर ने इस कहावत को एकदम सच साबित कर दिया है. लुक्स में हीरो, चार्मिंग पर्सनैलिटी...धीरज को देखकर लगा था कि बॉस... वो लॉक अप में आग लगा देंगे, लेकिन उनका गेम देखकर ऑडियंस उबासी लेती नजर आई. धीरज कभी कन्फ्यूज दिखे तो कभी बेदम. आखिरकार बोरियत का ये सफर खत्म हुआ और धीरज शो से टाटा-बाय-बाय कहते हुए बाहर हो गए.
बैकफुट पर रहे धीरज
धीरज ने जब शो में एंट्री ली थी तो हर किसी को लगा था कि वो सभी के छक्के छुड़ा देंगे, लेकिन जैसे-जैसे गेम आगे बढ़ा धीरज फुस्स पड़ते गए. शो में धीरज का न कोई गेम प्लान दिखा और न को कोई सॉलिड स्ट्रैटिजी. किसी मुद्दे पर भी कभी उनकी कोई राय तक देखने को नहीं मिली. टीवी का टीआरपी किंग 'लॉक अप' में महज एक बैकग्राउंड कैरेक्टर बनकर रह गया.
धीरज को बैकग्राउंड में देखकर लगता था कि मानो वो गेम खेलने नहीं, बल्कि शो में छुट्टियां मनाने आए हैं. शो के होस्ट फराह खान और रितेश देशमुख ने धीरज को कई बार जगाने की कोशिश की. शो में उन्हें एक्टिवली फ्रंट फुट पर गेम खेलने की सलाह दी. लेकिन धीरज को कुछ समझ ही नहीं आया. वो हमेशा कंफ्यूज नजर आए. इस तरह वो गेम में बाकी लोगों से काफी पीछे छूट गए.
नहीं दिखा गौरव का गेम
बार-बार फटकार के बाद धीरज ने गेम में जान फूंकने की कोशिश जरूर की. वो टास्क में एग्रेसिव भी होते दिखे और थोड़ा दम भी दिखाया, लेकिन अफसोस तब तक बहुत देर हो चुकी थी. दर्शक उनकी पर्सनैलिटी से कनेक्ट नहीं हो पाए. टीवी का ये चमकता सितारा 'लॉक अप' की चमक-धमक में एकदम फीका साबित हुआ. आखिरकार, उनके इस ठंडे सफर पर फुलस्टॉप लग गया और वो 'लॉक अप' से रिहा होकर घर लौट गए हैं.
अंत में यही कहेंगे कि सीरियल्स में स्क्रिप्ट की बदौलत छाने वाले धीरज धूपर, बिना स्क्रिप्ट के इस रियलिटी शो में पूरी तरह फ्लॉप रहे. हमने अपनी राय तो बता दी. वैसे आपका क्या कहना है?
नेहा फरहीन