कभी गोडसे, कभी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट! नाना पाटेकर के वो 5 किरदार जिन्होंने गाड़ दिए झंडे

नाना पाटेकर के अभिनय की खासियत यह थी कि वह किरदार को सिर्फ निभाते नहीं थे, बल्कि उसकी शख्सियत, उसकी जटिलताओं और उसके भीतर चलने वाले द्वंद्व को भी पर्दे पर उतार देते थे.

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नाना  पाटेकर के किरदारों ने अमिट छाप छोड़ी. (Photo: ITG) नाना पाटेकर के किरदारों ने अमिट छाप छोड़ी. (Photo: ITG)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST

हिंदी और मराठी सिनेमा के मशहूर अभिनेताओं में शुमार नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया. वह 75 वर्ष के थे. थिएटर से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर ने फिल्म 'गमन' से बड़े पर्दे पर कदम रखा था. इसके बाद उन्होंने 'सलाम बॉम्बे' जैसी ऑस्कर के लिए नामांकित फिल्म में अपनी अदाकारी से पहचान बनाई. हालांकि, उन्हें असली शोहरत 'परिंदा' से मिली, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. फिल्म 'क्रांतिवीर में दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया.

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नाना पाटेकर ने अपने लगभग पांच दशक लंबे करियर में 'खामोशी: द म्यूजिकल' (1996), 'अब तक छप्पन' (2004), 'अपहरण' (2005) और 'राजनीति' (2010) जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया. मराठी सिनेमा में 'नटसम्राट' (2016) में एक रिटायर्ड रंगमंच कलाकार के रूप में उनका अभिनय बेहद चर्चित रहा. उन्होंने 1991 में आई एक्शन ड्रामा 'प्रहार: द फाइनल अटैक' में अभिनय करने के साथ इसकी पटकथा लिखने और निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली.

नाना के अभिनय की खासियत यह थी कि वह किरदार को सिर्फ निभाते नहीं थे, बल्कि उसकी शख्सियत, उसकी जटिलताओं और उसके भीतर चलने वाले द्वंद्व को भी पर्दे पर उतार देते थे. यही वजह है कि अपने करियर के खासकर 2000 के दशक के बाद के दौर में उन्होंने कई ऐसे किरदार निभाए, जो वास्तविक जीवन की शख्सियतों से प्रेरित थे. आइए, नजर डालते हैं ऐसे पांच यादगार किरदारों पर, जिनमें नाना पाटेकर ने असल जिंदगी के लोगों को पर्दे पर जीवंत किया.

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अब तक छप्पन (2004)

फिल्म 'अब तक छप्पन' में नाना पाटेकर ने इंस्पेक्टर साधु आगाशे का किरदार निभाया था. यह किरदार मुंबई पुलिस के विवादित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक के जीवन से प्रेरित था. 1990 के दशक में दया नायक ने संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस अभियानों के दौरान कथित तौर पर कई एनकाउंटर किए, जिसके बाद उनकी पहचान एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में बनी. हालांकि, दया नायक खुद इस पहचान और इससे जुड़े आरोपों को खारिज करते रहे हैं.

फिल्म में नाना पाटेकर ने साधु आगाशे के किरदार के जरिए पुलिस व्यवस्था, अपराध जगत और कानून के दायरे में होने वाली कार्रवाई से जुड़े सवालों को सामने रखा. उनके अभिनय को समीक्षकों और दर्शकों, दोनों की सराहना मिली. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी मध्यम स्तर पर सफल रही. साल 2015 में इसके सीक्वल 'अब तक छप्पन 2' में नाना एक बार फिर साधु आगाशे के किरदार में नजर आए.

द अटैक्स ऑफ 26/11 (2013)

मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों पर आधारित फिल्म 'द अटैक्स ऑफ 26/11' में नाना पाटेकर ने मुंबई पुलिस के तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त राकेश मारिया का किरदार निभाया था. राम गोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी यह फिल्म पूर्व पत्रकार रोमल रोड्रिग्स की किताब पर आधारित थी.

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राकेश मारिया उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने हमलों के बाद जांच और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई. फिल्म में नाना पाटेकर का किरदार 26/11 की घटनाओं का ब्योरा देने के साथ गिरफ्तार किए गए एकमात्र जीवित आतंकी अजमल कसाब से पूछताछ की प्रक्रिया को भी सामने लाता है. नाना ने अपने संयमित और गंभीर अभिनय से इस किरदार को एक अलग प्रभाव दिया.

डॉ. प्रकाश बाबा आमटे: द रियल हीरो (2014)

मराठी सिनेमा की चर्चित फिल्मों में शामिल 'डॉ. प्रकाश बाबा आमटे: द रियल हीरो' में नाना पाटेकर ने सामाजिक कार्यकर्ता और चिकित्सक डॉ. प्रकाश आमटे की भूमिका निभाई थी. प्रकाश आमटे प्रसिद्ध समाजसेवी बाबा आमटे के बेटे हैं. उन्होंने अपनी पत्नी मंदाकिनी आमटे के साथ महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक विकास के लिए व्यापक काम किया है. फिल्म में मंदाकिनी आमटे की भूमिका सोनाली कुलकर्णी ने निभाई थी.

फिल्म का केंद्र हेमलकसा के घने जंगलों में आमटे दंपति का काम, वहां के आदिवासी समुदायों के बीच उनका संघर्ष और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं व विकास पहुंचाने की उनकी कोशिशें हैं. प्रकाश और मंदाकिनी आमटे को 2008 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. नाना पाटेकर ने इस फिल्म में किसी बड़े नाटकीय नायक के बजाय जमीन से जुड़े एक ऐसे इंसान को पर्दे पर उतारा, जिसकी जिंदगी सेवा और सामाजिक प्रतिबद्धता को समर्पित रही.

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द वैक्सीन वॉर (2023)

विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी फिल्म 'द वैक्सीन वॉर' में नाना पाटेकर ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के तत्कालीन महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव की भूमिका निभाई थी. फिल्म कोविड-19 महामारी के दौरान भारत में स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन के विकास की प्रक्रिया और इससे जुड़े वैज्ञानिकों के प्रयासों पर आधारित थी.

इस फिल्म में नाना पाटेकर ने वैज्ञानिक नेतृत्व, शोध और महामारी के दौरान सामने आई चुनौतियों से जूझते एक संस्थान की तस्वीर पेश की. उनके अभिनय की सराहना हुई, लेकिन फिल्म की प्रस्तुति को लेकर आलोचनाएं भी सामने आईं. कुछ समीक्षकों ने इसे जनसेवा से जुड़े सरकारी प्रसारण जैसा अनुभव देने वाली फिल्म बताया. 'द वैक्सीन वॉर' डॉ. बलराम भार्गव की किताब 'गोइंग वायरल' पर आधारित थी.

लॉर्ड माउंटबेटन: द लास्ट वायसरॉय (1986)

नाना पाटेकर के करियर के शुरुआती दौर की एक उल्लेखनीय भूमिका ब्रिटिश टीवी मिनी-सीरीज 'लॉर्ड माउंटबेटन: द लास्ट वायसरॉय' में थी. वर्ष 1986 में आई इस सीरीज में उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे का किरदार निभाया था.

यह ब्रिटिश प्रोडक्शन लॉर्ड लुई माउंटबेटन के जीवन और उनकी भूमिका पर केंद्रित था. इसमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी सैन्य जिम्मेदारियों से लेकर भारत के अंतिम वायसरॉय के रूप में उनकी नियुक्ति और देश की आजादी से पहले के घटनाक्रम को दिखाया गया था. सीरीज की शूटिंग भारत में हुई थी. नाना पाटेकर के करियर के शुरुआती वर्षों में निभाया गया था.

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