रिलीज से पहले विवाद में फंसी तापसी पन्नू की फिल्म गांधारी, राइटर कनिका ढिल्लों पर कहानी चोरी का आरोप

तापसी पन्नू की फिल्म गांधारी की कहानी पर चोरी का आरोप लगा है. एक राइटर कल्याण बांदी के पास इसका कॉपीराइट है, और वो चाहते हैं कि उन्हें इस फिल्म का क्रेडिट मिले. वो इस कहानी के लिए काफी समय से जद्दोजहद कर रहे थे. इंडिया टुडे/आजतक से खास बातचीत में उन्होंने गांधारी से जुड़ी सारी बातें साझा कीं.

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क्या है तापसी की फिल्म का मामला? (Photo: Movie Poster) क्या है तापसी की फिल्म का मामला? (Photo: Movie Poster)

सना फरज़ीन

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:46 PM IST

तापसी पन्नू की आने वाली नेटफ्लिक्स फिल्म गांधारी अब कॉपीराइट विवाद में फंस गई है. एक राइटर कल्याण बांदी ने आरोप लगाया है कि फिल्म की कहानी उस कॉन्सेप्ट से काफी मिलती-जुलती है, जिसे उन्होंने कई साल पहले लिखा था. फिल्म को कनिका ढिल्लों ने लिखा और प्रोड्यूस किया है. इसमें तापसी एक ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो अपनी किडनैप हुई बेटी को बचाने निकलती है. हालांकि, कनिका ढिल्लों के प्रोडक्शन हाउस ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि फिल्म पूरी तरह ओरिजिनल है. 

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सालों पहले लिखी कहानी पर चोरी का आरोप

कल्याण बांदी IIT मद्रास के पूर्व छात्र हैं और फिलहाल सेंट्रल GST और कस्टम्स विभाग में इंस्पेक्टर के तौर पर काम करते हैं. उनका दावा है कि उन्होंने 2019 में गांधारी नाम से एक कहानी लिखी और रजिस्टर कराई थी. उनकी कहानी भी एक ऐसी मां के इर्द-गिर्द थी, जो बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह में फंसने के बाद एक खतरनाक देवी का रूप ले लेती है. 

इंडिया टुडे से खास बातचीत में कल्याण ने बताया कि उन्होंने 2019 में ये कहानी मोनिका शेरगिल को दिखाई थी. उस समय मोनिका शेरगिल Voot में थीं और अब नेटफ्लिक्स में वाइस प्रेसिडेंट हैं. राइटर ने फिल्म की कहानी कहां से आई, इस पर सवाल उठाए हैं. उनका ये भी दावा है कि उन्होंने सितंबर 2025 में एक कानूनी नोटिस भेजा था. इंडिया टुडे के पास इस नोटिस की कॉपी भी है. इसमें उन्होंने आर्थिक मुआवजे और कहानी के लिए क्रेडिट की मांग की थी. 

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कैसे मोनिका शेरगिल से मिला राइटर?

कल्याण बांदी के मुताबिक, उन्होंने 2019 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्ड इन के जरिए सबसे पहले मोनिका शेरगिल से कॉन्टैक्ट किया था. इसके अगले महीने उन्होंने उन्हें अपनी 8 पन्नों की कहानी और 2 पन्नों का गांधारी का सार भेजा था. उनकी तरफ से भेजी गई कहानी को देखा गया था, लेकिन कुछ हफ्तों बाद उन्हें बताया गया कि ये कहानी कंपनी की उस समय की फिल्मों की लिस्ट में फिट नहीं बैठती.

राइटर का कहना है कि इसी दौरान उन्होंने अपनी कहानी और सार को स्क्रीनराइटर्स असोसिएशन में भी रजिस्टर करा दिया था. इसके बाद भी वो कई सालों तक इस कहानी पर काम करते रहे. साल 2023 में उन्होंने हरमन बावेजा के स्टूडियो से बात की. उनका दावा है कि वहां कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर करीब 5-6 महीने तक बातचीत चली. उन्होंने अपनी कहानी जियो हॉटस्टार को भी भेजी थी.

फिर 2025 में नेटफ्लिक्स पर गांधारी फिल्म का ऐलान हुआ, जिसे देखकर राइटर हैरान रह गए. उनके मुताबिक, फिल्म का नाम देखते ही उनका ध्यान इस तरफ गया, लेकिन उन्होंने तुरंत कोई निष्कर्ष नहीं निकाला. इसके बाद उन्होंने फिल्म के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की और अपनी लिखी कहानी से उसकी तुलना की. उन्हें लगा कि दोनों में इतनी समानताएं हैं कि इस मुद्दे को उठाया जाना चाहिए.

पिछले साल फिल्म पर उठाए थे सवाल

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कल्याण बांदी के लिए फिल्म का गांधारी नाम भी इस पूरे विवाद में काफी अहम है. उनका कहना है कि उन्होंने अपनी कहानी के कॉन्सेप्ट के हिसाब से ये नाम चुना था और उन्हें उम्मीद नहीं थी कि यही नाम किसी दूसरी कहानी के साथ भी इस्तेमाल होगा. उन्होंने कहा, 'सिर्फ मैं ही इस टाइटल को अपने कॉन्सेप्ट से जोड़ सकता हूं, क्योंकि ये मेरी क्रिएटिविटी थी. फिर इसका क्रेडिट कनिका ढिल्लों को कैसे दिया जा सकता है?'

राइटर का ये भी दावा है कि फिल्म की अनाउंसमेंट के बाद जिन प्रोडक्शन हाउस के साथ उनकी बातचीत चल रही थी, उन्होंने उनसे दूरी बना ली. इसकी वजह से उन्हें आर्थिक और प्रोफेशनल नुकसान भी हुआ. उनके मुताबिक, सितंबर 2025 में कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और मामला कोर्ट तक भी नहीं पहुंचा.

उन्होंने इंडिया टुडे को बताया कि जवाब नहीं मिलने के बाद उनके वकील ने उन्हें कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की सलाह दी थी. लेकिन सरकारी कर्मचारी होने के कारण वो लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे. इसलिए उन्होंने आखिरकार इस मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया.

कानूनी नोटिस में राइटर ने अपनी कहानी के कथित तौर पर बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने, अपनी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान, मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए कुल करीब 40 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी. हालांकि, उनका कहना है कि वो पैसे नहीं चाहते. उनके लिए सबसे जरूरी चीज अपनी कहानी के लिए पहचान और क्रेडिट मिलना है. उन्होंने कहा, 'मुझे पैसे भी नहीं चाहिए. बस इतना कह दें कि ये मेरा आइडिया था और इसे स्वीकार कर लें. अगर मुझे ये साबित करके दिखा दिया जाए कि ये मेरी कहानी नहीं है, तो भी मुझे खुशी होगी.'

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कत्था पिक्चर्स ने आरोपों को खारिज किया

कनिका ढिल्लों के प्रोडक्शन हाउस कत्था पिक्चर्स ने कल्याण बांदी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. प्रोडक्शन हाउस ने अपने बयान में कहा कि गांधारी एक ओरिजिनल फिल्म है और इसपर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं. प्रोडक्शन हाउस ने अपने बयान में कहा- हमें सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए ऐसे आरोपों के बारे में पता चला है, जिनमें कहा जा रहा है कि हमारी आने वाली फिल्म गांधारी किसी दूसरे शख्स के कॉन्सेप्ट और टाइटल की कॉपी है. 

'ये आरोप पूरी तरह गलत है और गांधारी एक ओरिजिनल फिल्म है, जिसे कनिका ढिल्लों ने लिखा और प्रोड्यूस किया है और इसे कत्था पिक्चर्स ने डेवलप किया है. फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले कनिका ढिल्लों का अपना काम है. हम मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और लोगों से अपील करते हैं कि इन आरोपों को बिना पुष्टि वाली और झूठी बातें माना जाए और इन्हें सच मानकर प्रकाशित या शेयर ना किया जाए.' 

इंडिया टुडे ने कल्याण बांदी के आरोपों पर नेटफ्लिक्स और मोनिका शेरगिल से भी जवाब मांगा, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी तरफ से कोई रिएक्शन नहीं मिला था.

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