'बेटियों को छह साल के लिए देश सौंप दो', पंचायत आजतक के मंच से क्यों बोले संजय मिश्रा?

पंचायत आजतक बिहार में बॉलीवुड एक्टर संजय मिश्रा ने शिरकत की. वहां उन्होंने बिहार के विकास और शिक्षा पर खुलकर अपनी राय रखी. वो चाहते हैं कि बिहार की बेटियां पढ़ें-लिखें और खूब आगे बढ़े ताकि देश आगे बढ़ सके.

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आजतक के मंच पर संजय मिश्रा (Photo: ITG) आजतक के मंच पर संजय मिश्रा (Photo: ITG)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:47 PM IST

शुक्रवार को पंचायत आजतक बिहार का शानदार आगाज हुआ, जहां राजनीति से लेकर सिनेमा की दुनिया के चर्चित नामों ने शिरकत की. बॉलीवुड के सितारे संजय मिश्रा भी वहां पहुंचे, जहां उन्होंने बिहार को लेकर कई सारी बातें की. उन्होंने राज्य में विकास और शिक्षा जैसे अहम मुद्दे उठाए. इसी में एक्टर ने बेटियों की पढ़ाई का भी मुद्दा सामने रखा. 

बेटियों की शिक्षा पर संजय मिश्रा ने दिया जोर

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मॉडरेटर श्वेता सिंह से बातचीत के दौरान संजय मिश्रा ने बिहार समेत पूरे देश में बेटी की शिक्षा की अहमियत पर बात की. उन्होंने कहा- हम कहते हैं कि बेटी बचाओ. मेरी आखों में आसूं आ रहे हैं, बेटी बचाओ? इंसान है वो. सिर्फ उसके साथ कोई बोझ ला दिया गया है. इसको पढ़ाकर क्या करेंगे? ये तो दूसरे घर चली जाएगी, बेटे को पढ़ाओ. क्यों बेटियों को बोझ बना दिया गया है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. दे दो महिलाओं को छह साल के लिए देश, देखना क्या से क्या हो जाएगा. बेसिक चीजें सुधार देंगी, मैं इतना जानता हूं.

संजय मिश्रा आगे कहते हैं कि वो अपनी एक किताब लिख रहे हैं, जिसमें वो अपने नाना नानी का जिक्र करते हैं. वो कहते हैं उनके नाना-नानी ने एक बेटी को बचाने के लिए पूरा मोहल्ला बसा लिया था. उनकी मां अपने 8 भाइयों में इकलौती लड़की थीं, इसलिए उन्होंने ऐसा कहा. एक्टर ने ये भी कहा कि शिक्षा हर क्षेत्र में होनी जरूरी है. 

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देश के विकास पर उठाए सवाल

उनका कहना है- आज कोई भी लीडर है. कैसे है? आप किसी को भी दांत दिखा लेते हैं क्या. उसी को दिखाते हैं जिसने उस चीज की पढ़ाई की होती है. हम आजतक देश किसको दिए हैं, ये कोई नहीं जानता. बुरा ना मानना...होली है. हमें नहीं पता हमने किसके हाथ में देश दे रखा है. देश चलाने के लिए दूर दृष्टि बहुत जरूरी है. देश ऐसे नहीं चलेगा कि 2027 का चुनाव क्या होगा, 2029 का या आगे का चुनाव क्या होगा. 

'विकास से होगा, तभी मैं कह रहा हूं कि बेसिक शिक्षा जरूरी है. ऐसे नहीं कि मेरा बेटा 3 बार आईएस की कोशिश कर चुका है, कुछ फिल्म लाइन में देखिए ना? ये क्या मतलब है? जिस चीज में आपने इतनी मेहनत की, अपना समय खर्च किया और अब फिल्म लाइन में ऐसे ही घुसाना चाहते हो?'

बात करें संजय मिश्रा के वर्क फ्रंट की, तो वो इन दिनों पलाश मुच्छल की फिल्म तेरा साई को लेकर सुर्खियों में हैं. इस फिल्म की अनाउंसमेंट हाल ही में हुई, जो अगले साल रिलीज होगी. 

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