आदित्य धर की 'ब्लॉकबस्टर' फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' मार्च 2026 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई. फ़िल्म को इसकी दिलचस्प कहानी, बड़े पैमाने और बेहतरीन एक्टिंग के लिए काफी तारीफ मिली, जिससे बॉलीवुड के सबसे सफल फिल्ममेकर्स में आदित्य धर की जगह और मजबूत हो गई. हाल ही में एक इंटरव्यू में आर. माधवन ने इस फिल्म को प्रोपेगेंडा फिल्म कहे जाने के बारे में बात की.
हाल ही में 'गलाटा प्लस' से बातचीत के दौरान, आर. माधवन से सोशल मीडिया पर बढ़ती ध्रुवीकरण वाली बहस के बारे में पूछा गया. उनसे कहा गया कि कुछ लोगों ने 'धुरंधर' को प्रोपेगेंडा फिल्म करार दिया है, जो कथित तौर पर भारत सरकार के नैरेटिव (सोच) से मेल खाती है. होस्ट ने इस बात का भी जिक्र किया कि ऐसी फिल्मों से जुड़े एक्टर्स को अक्सर राजनीतिक लेबल दिए जाते हैं, जैसे कि ऑनलाइन उन्हें 'संघी' कहा जाता है.
आर माधवन ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर ऐसे कमेंट्स से निपटने के तरीके पर रिएक्शन देते हुए एक्टर ने कहा, 'यूजरनेम चेक करके, अकाउंट कब बनाया गया और कितने फॉलोअर्स हैं, यह पता लगाना बहुत आसान है. आप समझ सकते हैं कि यह कोई बॉट है या पेड पोस्ट. लेकिन मेरा मुद्दा यह नहीं है. मेरा कहना है कि हर कोई अपनी कंडीशनिंग (सोच-समझ के विकास) का नतीजा होता है. बचपन से ही मुझे सिखाया गया था कि मेरा देश सबसे महत्वपूर्ण है और हम अपने देश के लिए जो करते हैं, वह जरूरी है.'
माधवन ने आगे कहा कि उन्होंने जानबूझकर सार्वजनिक रूप से राजनीतिक टिप्पणियां करने से दूरी बनाए रखी है. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी किसी राजनीतिक पार्टी, राजनेता या राजनीतिक लीडर के खिलाफ बात नहीं की है, चाहे वह उनके इंटरव्यू हों या सोशल मीडिया पोस्ट. उन्होंने कहा, 'अगर कोई अच्छा काम करता है, जैसे स्टालिन सर, तो मैं तुरंत उनकी तारीफ करता हूं. मैंने तय किया है कि मैं सिर्फ अच्छा काम करूंगा और अगर मुझे किसी चीज के बारे में शक होगा, तो मैं उस पर बात नहीं करूंगा. जब कोई चुना हुआ राजनेता प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनता है, तो मेरा मानना है कि उनका समर्थन करना मेरा फर्ज है.'
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी ने उनसे कभी संपर्क नहीं किया और न ही कभी ऐसा कोई इशारा किया कि उन्हें पार्टी में शामिल होना चाहिए या उनकी तरफ से प्रचार करना चाहिए, चाहे वह राज्य स्तर पर हो या राष्ट्रीय स्तर पर. ऑनलाइन होने वाली आलोचनाओं पर बात करते हुए एक्टर ने कहा कि वह ऐसे कमेंट्स को निराशा का इजहार मानते हैं और उन्हें अपने फैसलों पर असर नहीं डालने देते.
प्रोपगैंडा के सवाल पर दिया जवाब
जब इंटरव्यू लेने वाले ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग 'धुरंधर' जैसी फिल्मों को प्रोपेगेंडा कहते हैं और 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' की आलोचना इसलिए की गई क्योंकि उसमें भारतीय परंपराओं और संस्कृति पर बहुत ज्यादा जोर दिया गया था, तो माधवन ने अपनी बात का बचाव किया. उन्होंने सवाल किया कि एक भारतीय के तौर पर अपनी पहचान जाहिर करने को समस्या क्यों माना जाए. उन्होंने जवाब दिया, 'भारतीय होने में क्या गलत है? मैं यह क्यों नहीं दिखा सकता कि मैं भारतीय हूं? हम बस वही दिखा रहे हैं जो हुआ था. मैं इसे कोई राजनीतिक बयान के तौर पर नहीं कह रहा – असल में, मुझे यह बात समझ नहीं आती. 'धुरंधर' में हमने दिखाया है कि पाकिस्तान में क्या हुआ था – यह प्रोपेगेंडा कैसे है?
'रॉकेट्री' में हमने दिखाया है कि नंबी सर असल जिंदगी में कैसे हैं और क्या कहते हैं. हमने इसे मनगढ़ंत नहीं बनाया है. मैं कहानी के प्रति ईमानदार कैसे रह सकता हूं अगर मुझे इस बात से डर लगे कि वे असल में कौन हैं. मुझे किरदार के प्रति सच्चा रहना होगा.'
इस बीच आर माधवन जल्द ही GDN में नजर आएंगे, जो मशहूर इंजीनियर और समाजसेवी गोपालस्वामी दोराईस्वामी नायडू की जिंदगी पर आधारित है.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क