बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह की जोड़ी को इंडस्ट्री की सबसे मजबूत जोड़ियों में गिना जाता है. लेकिन रत्ना से शादी से पहले नसीरुद्दीन शाह की पहली शादी और उनकी निजी जिंदगी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही.
अपनी आत्मकथा 'एंड देन वन डे' में नसीरुद्दीन शाह ने अपनी पहली पत्नी परवीन मुराद (मनारा सिकरी) के साथ रिश्ते को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने माना कि कम उम्र में वह अच्छे पति और अच्छे पिता नहीं बन पाए.
19 साल की उम्र में 34 साल की महिला से हुआ प्यार
यह कहानी उस वक्त की है, जब नसीरुद्दीन शाह सिर्फ 19 साल के थे और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे. उसी दौरान उनकी मुलाकात 34 साल की मेडिकल इंटर्न परवीन मुराद से हुई. परवीन उनसे 15 साल बड़ी थीं. वह तलाकशुदा थीं और दो बच्चों की मां भी थीं. लेकिन वही पहली इंसान थीं जिन्होंने नसीरुद्दीन के एक्टर बनने के सपने पर भरोसा किया. यही बात नसीर के दिल को छू गई और दोनों को प्यार हो गया.
जब शादी की बात आई तो दोनों परिवारों ने इसका विरोध किया. नसीरुद्दीन शाह के परिवार को परवीन के तलाकशुदा होने और पहले से दो बच्चों की मां होने पर आपत्ति थी. वहीं परवीन के परिवार को डर था कि कम उम्र का लड़का कभी भी रिश्ता छोड़ सकता है. कहा जाता है कि परिवार का भरोसा जीतने के लिए नसीरुद्दीन शाह ने यहां तक मान लिया था कि अगर कभी तलाक हुआ तो वह गुजारा भत्ता (एलिमनी) भी देंगे.
बेटी के जन्म के बाद और बढ़ गई दूरियां
शादी के एक साल बाद दोनों की बेटी हीबा का जन्म हुआ. लेकिन बच्चे के आने से रिश्ता मजबूत होने के बजाय दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. नसीरुद्दीन शाह ने अपनी किताब में लिखा कि उस समय वह अपनी पत्नी की भावनाओं को बिल्कुल नहीं समझ पाए.
उन्होंने माना- मैं इतना अपरिपक्व था कि पत्नी की प्रेग्नेंसी के दौरान उनका साथ भी नहीं दे पाया. मैं सिर्फ अपने बारे में सोचता था. नसीरुद्दीन शाह ने स्वीकार किया कि बेटी के जन्म के बाद भी वह अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागते रहे. उन्होंने लिखा- आज भी मुझे शर्म आती है कि मैंने अपनी बेटी की अनदेखी की. मैं उसके साथ भावनात्मक रिश्ता ही नहीं बना पाया.
'बेटी के लिए कुछ महसूस ही नहीं होता था'
उन्होंने यह भी माना कि उस समय उनका पूरा ध्यान सिर्फ अपने एक्टिंग करियर पर था और वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर ज्यादा व्यस्त थे.
नसीरुद्दीन शाह ने अपनी किताब में एक बेहद भावुक बात भी लिखी. उन्होंने कहा- कई सालों तक मुझे अपनी बेटी के लिए कोई खास एहसास ही नहीं होता था. ऐसा लगता था जैसे वह मेरी जिंदगी का हिस्सा ही नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलतियों में से एक थी, जिसका अफसोस उन्हें आज भी है.
इसी दौरान रत्ना पाठक से हुई मुलाकात
पहली शादी टूटने के दौर में ही नसीरुद्दीन शाह की मुलाकात थिएटर के दौरान रत्ना पाठक से हुई. धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आए और प्यार हो गया. हालांकि, परवीन से तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में कई साल लग गए. इसके बाद 1982 में नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने शादी कर ली.
नसीरुद्दीन शाह अपनी किताब में रत्ना पाठक को अपनी जिंदगी का 'इकलौता सच्चा प्यार' भी बता चुके हैं. एक इंटरव्यू में रत्ना पाठक ने बताया था कि उनकी शादी को लेकर भी दोनों परिवार पूरी तरह खुश नहीं थे. उस समय एक्टिंग को सुरक्षित करियर नहीं माना जाता था. ऊपर से नसीरुद्दीन शाह संघर्ष कर रहे थे.
रत्ना ने बताया कि कई लोग नसीर से कहते थे-ऐसा चेहरा लेकर हीरो कैसे बनोगे? लेकिन समय ने साबित कर दिया कि वही अभिनेता आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल हो गए.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क