अब तक यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा है कि नाना पाटेकर अब दुनिया में नहीं रहे. 8 अक्टूबर को उनके निधन की खबर ने फैन्स को बड़ा झटका दिया. गुरुवार शाम पुणे फार्महाउस में उनका अंतिम संस्कार किया गया. नाना को अंतिम विदाई देने वहां हजारों की भीड़ उमड़ी. सभी ने नम आंखों से उन्हें अलविदा है. कई लोगों के मन में ये भी सवाल था कि आखिर सूर्यास्त के बाद उनका अंतिम संस्कार क्यों किया गया. आइए जानते हैं कि इस पर उनके बेटे मल्हार पाटेकर का क्या कहना है.
पिता के अंतिम संस्कार पर बोले मल्हार
परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद नहीं किए जाते हैं. पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद मल्हार ने मीडिया से बात की. उन्होंने कहा- हम गोवा में थे और उनकी पार्थिव देह को गांव के फार्महाउस लाना था. हमें उम्मीद थी कि हम जल्दी पहुंच जाएंगे, लेकिन इसमें कुछ समय लग गया. उनका निधन सुबह-सुबह हुआ था, इसलिए काफी समय पहले ही बीत चुका था और पार्थिव देह को ज्यादा देर तक रखना ठीक नहीं था. इसलिए हमें सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करना पड़ा.
पिता को बताया अमर
मल्हार ने पिता के सामाजिक कार्य की विरासत को आगे बढ़ाने पर भी बात की. उन्होंने कहा- उन जैसे लोग कहीं नहीं जाते. वो अपने काम के जरिए हमेशा जिंदा रहते हैं. वो अमर होते हैं. उन्होंने हमें हमेशा एक ही बात कही कि हमें मानवता के लिए एकजुट होना चाहिए. दुनिया की भलाई के लिए काम करना चाहिए. वो इंटरनेशनल लेवल पर सोचते थे. हमारा सामाजिक कार्य महाराष्ट्र से लेकर पूरे भारत तक फैला हुआ है. हम शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में वहां अपना सारा सामाजिक कार्य कर रहे हैं.
मल्हार ने बताया कि उनके पिता पहले ही हर उस व्यक्ति को जिम्मेदारियां सौंप दी थीं, जो इसके लायक था. उन्हें पता था कौन किस चीज के साथ न्याय कर सकता है. इसलिए उन्होंने उस हिसाब सभी को उनका काम सौंपा.
नाना चले गए, लेकिन उनकी यादें आज भी जिंदा हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क