इन दिनों जाह्ववी कपूर 'पेद्दी' फिल्म में अपने ऑब्जेक्टिफाई करने वाले सीन्स को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस का शिकार हो रही हैं. फिल्म में उनके सेन्शुअस और ग्लैमर से भरपूर सीन्स पर यूजर्स सवाल उठा रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि साउथ फिल्मों में आज भी हीरोइनों को अक्सर उनके किरदार या एक्टिंग से ज्यादा उनकी खूबसूरती और शारीरिक आकर्षण के जरिए पेश किया जाता है.
अब बचाव में भले ही जाह्नवी ने सारा ठीकरा डायरेक्टर बुची बाबू सन पर फोड़ दिया और कहा कि उन्हें इसका अंदाजा नहीं था कि फिल्म में उनके किरदार को इस तरह से पेश किया जाएगा. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इस बहस के बीच तापसी पन्नू का एक पुराना बयान फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने साउथ फिल्म इंडस्ट्री में हीरोइनों को दिखाने के तरीके पर खुलकर बात की थी.
तापसी ने बॉलीवुड में कदम रखने से पहले तमिल, तेलुगु फिल्मों में लंबे समय तक काम किया है. वो नॉर्थ से लेकर साउथ तक कई बड़ी फिल्मों का हिस्सा रही हैं. एक पॉडकास्ट में एक्ट्रेस ने बताया था कि साउथ फिल्मों में कई बार हीरोइन के लुक्स और शारीरिक बनावट पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
तापसी ने किया था बड़ा खुलासा
एक्ट्रेस ने कहा था कि कई मौकों पर एक्ट्रेसेस को पैडेड ब्रा पहनने के लिए कहा जाता था ताकि कैमरे पर उनका लुक ज्यादा आकर्षक दिखे. तापसी के मुताबिक, ऐसी बातें अक्सर सीधे नहीं कही जाती थीं, बल्कि असिस्टेंट डायरेक्टर और स्टाइलिंग टीम के जरिए एक्ट्रेस तक पहुंचाई जाती थीं.
एक्ट्रेस ने ये भी बताया था कि शूटिंग के दौरान इस तरह की डिमांड्स कई बार बेहद असहज और शर्मिंदगी भरी स्थिति पैदा कर देती थीं. अगर मेकर्स को लगता था कि कैमरे पर मनचाहा असर नहीं दिख रहा, तो एक्ट्रेस को दोबारा जाकर बदलाव करने के लिए कहा जाता था.
तापसी ने उस दौरान एक और दिलचस्प बात कही थी. उनके मुताबिक, साउथ फिल्मों में कैमरा अक्सर नाभि (नेवल) जैसे शारीरिक हिस्सों पर ज्यादा फोकस करता है, जबकि हिंदी फिल्मों में कई बार दूसरे ग्लैमरस एंगल्स को हाईलाइट किया जाता है. उनका मानना था कि ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि मेकर्स को लगता है कि इससे दर्शकों की फैंटेसी पूरी होती है और किरदार ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है.
जाह्नवी से हो गई चूक?
अब जब 'पेद्दी' में जाह्नवी कपूर के कुछ सीन्स को लेकर सोशल मीडिया पर बहस चल रही है, तो तापसी का ये बयान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. क्योंकि साउथ में इस तरह के सीन्स फिल्माया जाना नई बात नहीं है, ऐसे में जाह्नवी कपूर का इस बात से अहसहमति जताना कि उन्हें कुछ पता नहीं था, यूजर्स के गले नहीं उतर रहा है. हालांकि ये भी सच है कि हर फिल्म और हर निर्देशक की सोच अलग होती है, लेकिन साउथ सिनेमा में हीरोइनों को प्रेजेंट करने के तरीकों को लेकर चल रही बहस नई नहीं है.
तापसी के अलावा कई साउथ की फेमस एक्ट्रेसेस ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है. लेकिन सवाल ये है कि सालों पहले जिस मुद्दे की ओर इशारा किया था, वही आज फिर उठ रहा है- क्या फिल्मों में हीरोइन को उसके किरदार और एक्टिंग के लिए याद रखा जाए या फिर सिर्फ ग्लैमर और सेन्शुअस इमेज के जरिए दर्शकों के सामने पेश किया जाए?
आरती गुप्ता