भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी दमदार आवाज, रौबदार स्क्रीन प्रेजेंस और खतरनाक विलेन वाले किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में जिंदा हैं. 'गजनी', 'लगान', 'स्ये' और 'महाभारत' जैसे यादगार प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे एक्टर प्रदीप रावत अब इस दुनिया में नहीं रहे.
पांच साल तक ब्लड कैंसर से लड़ने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री और फैंस दोनों गहरे सदमे में हैं. लेकिन पर्दे पर खौफ पैदा करने वाले प्रदीप रावत की असल जिंदगी बेहद सादगी, प्यार और संघर्ष से भरी रही.
प्रदीप रावत अपने पीछे पत्नी कल्याणी रावत और दो बेटों को छोड़ गए हैं. वह अपने परिवार को ज्यादातर से दूर रखते थे. फिल्मों में चाहे वह खूंखार विलेन बने हों, लेकिन निजी जिंदगी में उन्हें परिवार के बेहद करीब माना जाता था.
प्रदीप रावत का बड़ा बेटा विक्रम रावत कभी-कभार उनके साथ फिल्म इवेंट्स में स्पॉट हुआ है. उसकी कद-काठी देख हर कोई हैरान था. वो पिता जितना ही हैंडसम पर्सनैलिटी का लगा. फैंस बेहद इम्प्रेस हुए थे. जबकि छोटा बेटा बेहद प्राइवेट रहना पसंद करता है.
प्रदीप रावत की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी. दोनों की पहली मुलाकात तेलुगु फिल्म 'स्टालिन' के सेट पर हुई थी. इस फिल्म में प्रदीप रावत, प्रकाश राज के दामाद के किरदार में नजर आए थे.
इसी दौरान उनकी मुलाकात कल्याणी से हुई. कहा जाता है कि पहली नजर में ही प्रदीप उनकी खूबसूरती पर फिदा हो गए थे. हालांकि, वह सीधे जाकर बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए.
ऐसे में उन्होंने अपने मेकअप आर्टिस्ट को कल्याणी से बात करने के लिए भेजा. यहीं से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया. कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली और जिंदगीभर एक-दूसरे का साथ निभाया.
करियर की बात करें तो, मध्य प्रदेश के जबलपुर से आने वाले प्रदीप रावत के लिए फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं था. करियर की शुरुआत उन्होंने 1985 में फिल्म 'मेरी जंग' से की, लेकिन लंबे समय तक उन्हें छोटे-छोटे रोल ही मिले. उनकी जिंदगी का पहला बड़ा मोड़ तब आया, जब बीआर चोपड़ा ने उन्हें टीवी के ऐतिहासिक शो 'महाभारत' में अश्वत्थामा का किरदार दिया.
साल 2004 में एस.एस. राजामौली की फिल्म 'स्ये' में उन्होंने भिक्षु यादव का किरदार निभाया. यह रोल उनके करियर का गेम चेंजर साबित हुआ. उनकी दमदार एक्टिंग ने उन्हें तेलुगु सिनेमा का सबसे पसंदीदा विलेन बना दिया. इसके बाद भद्रा, अंदरीवाडु, छत्रपति, लक्ष्मी जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में उन्होंने यादगार निगेटिव किरदार निभाए.
साल 2005 में तमिल फिल्म 'गजनी' में उन्होंने जिस खूंखार विलेन का किरदार निभाया, उसी किरदार के नाम पर फिल्म का टाइटल रखा गया था. बाद में जब आमिर खान के साथ हिंदी 'गजनी' बनी, तब भी प्रदीप रावत ने वही किरदार निभाया. यह फिल्म बॉलीवुड की पहली 100 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली फिल्म बनी और प्रदीप रावत का 'गजनी' वाला किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन में गिना जाने लगा. हालांकि उन्हें लगान के देवा के तौर पर भी फैंस पहचानते हैं.
पर्दे पर उनका गुस्सा और खौफ देखकर शायद ही कोई यकीन करे कि असल जिंदगी में प्रदीप रावत बेहद शांत, सरल और परिवार से प्यार करने वाले इंसान थे. उन्होंने कभी स्टारडम का शोर नहीं मचाया. अपने काम से पहचान बनाई और हर इंडस्ट्री में सम्मान कमाया.