दिल्ली में आज चुनाव हुए तो दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंचेगी AAP!

अगर आज दिल्ली में विधानसभा चुनाव हों तो अरविंद केजरीवाल की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ेगा. इंडिया टुडे-एक्सिस-माई इंडिया के MCD नतीजों के पूर्वानुमान के तुलनात्मक अध्ययन से यही बात निकल कर सामने आई है.

Advertisement
दिल्ली विधानसभा दिल्ली विधानसभा

खुशदीप सहगल / राहुल कंवल

  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 5:12 PM IST

अगर आज दिल्ली में विधानसभा चुनाव हों तो अरविंद केजरीवाल की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ेगा. इंडिया टुडे-एक्सिस-माई इंडिया के MCD नतीजों के पूर्वानुमान के तुलनात्मक अध्ययन से यही बात निकल कर सामने आई है.

रविवार के म्युनिसिपल मतदान में बीजेपी को कुल 272 वार्ड में से 202-220 वार्ड में जीत मिलने की संभावना है. 2012 में बीजेपी को 142 वार्ड में ही जीत मिली थी. एक्सिस-माई-इंडिया चुनाव सर्वेक्षकों के मुताबिक कांग्रेस को 2017 के एमसीडी चुनाव में सिर्फ 19-31 वार्ड में ही जीत मिलने की संभावना है. कांग्रेस को पांच साल पहले एमसीडी चुनाव में 77 वार्डों में जीत हासिल हुई थी.

Advertisement

केजरीवाल की आम आदमी पार्टी 2017 में पहली बार एमसीडी चुनाव में उतरी है. चुनाव सर्वेक्षण के मुताबिक आम आदमी पार्टी को 23 से 35 वार्ड में कामयाबी मिल सकती है. अगर एमसीडी चुनाव के पूर्वानुमान को दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों से जोड़ कर देखा जाए तो ये आम आदमी पार्टी सरकार के लिए बड़ी खतरे की घंटी है.

एग्जिट पोल के पूर्वानुमान की वार्ड से विधानसभा सीट से जोड़ कर गणना करने से निष्कर्ष निकलता है कि आज दिल्ली विधानसभा के चुनाव कराए जाएं तो आम आदमी पार्टी की सीटें दहाई के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाएंगी. दो साल पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 70 सदस्यीय सदन में 67 सीटें प्राप्त की थीं. उस चुनाव में बीजेपी को महज 3 सीट पर ही जीत हासिल हुई थी जबकि कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया था.

Advertisement

लेकिन म्युनिसिपल पूर्वानुमान से कोई संकेत निकलते हैं तो आम आदमी पार्टी दिल्ली के मतदाताओं के विभिन्न वर्गों में लोकप्रिय समर्थन खो चुकी हैं जिन्होंने उसे 2015 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में भेजा था.

एमसीडी चुनाव के एग्जिट पोल पूर्वानुमान के गहन विश्लेषण से साफ होता है कि अगर अभी दिल्ली विधानसभा चुनाव होते हैं तो आम आदमी पार्टी के जन समर्थन के ग्राफ में भारी गिरावट और बीजेपी के ग्राफ में बड़ा उठान देखने को मिल सकता है.

एमसीडी चुनाव के पूर्वानुमान के आंकड़ों से पता चलता है कि अगर दिल्ली विधानसभा चुनाव अभी होते हैं तो केजरीवाल की 'आप' और कांग्रेस को महज 4-7 सीट पर ही सिमटना पड़ सकता है. दूसरी ओर बीजेपी 56-62 सीट पर जीत का परचम फहरा सकती है. 2015 में बीजेपी को मिली 3 सीटों से तुलना की जाए तो पार्टी के लिए ये जमीन आसमान का अंतर हो सकता है.

आकंड़ों से ये भी संकेत मिलता है कि लोकसभा में दिल्ली की 7 सीट के लिए आज चुनाव कराया जाए तो बीजेपी अपनी सातों सीट बरकरार रखने में कामयाब रहेगी.

एक्सिस-माई-इंडिया के पूरी दिल्ली में कराए सर्वे से ये बात निकल कर आई कि सर्वे के 57 फीसदी प्रतिभागी अरविंद केजरीवाल सरकार के राज्य प्रशासन के कामकाज से खुश नहीं हैं. वहीं 68 फीसदी प्रतिभागियों ने केंद्र में मोदी सरकार के कामकाज पर अपने अनुमोदन की मुहर लगाई.

Advertisement

सर्वे का एक दिलचस्प निष्कर्ष ये है कि अगर व्यक्तिगत रूप से नेताओं की बात की जाए तो 'आप' संयोजक अरविंद केजरीवाल अब भी दिल्ली के नागरिकों की पहली पसंद बने हुए हैं. सर्वे में 25 फीसदी प्रतिभागियों ने केजरीवाल में अपना भरोसा जताया. वहीं बीजेपी के मनोज तिवारी 23 फीसदी प्रतिभागियों की पसंद होने की वजह से ज्यादा पीछे नहीं हैं. कांग्रेस के अजय माकन इस मामले में काफी पिछड़े हुए हैं. सर्वे के मुताबिक दिल्ली के सिर्फ 4 फीसदी नागरिकों ने माकन को अपनी पसंद बताया.

पूर्वानुमान के मुताबिक जहां तक पसंदीदा पार्टी का सवाल है तो प्रतिभागियों में 43 फीसदी ने बीजेपी को पहली पसंद बताया. दूसरे नंबर पर 'आप' (25%) है. कांग्रेस पर 18 फीसदी प्रतिभागियों ने ही भरोसा जताया.


समाज के निचले पायदान के लोगों के उत्थान के वादे के साथ केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दो साल पहले पिछड़ी जातियों का भरोसा पाया था. लेकिन एग्जिट पोल के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि 'आप' ने इन वर्गों में से भी अधिकतर लोगों का भरोसा खो दिया है. 2017 में एससी/एसटी के 41 फीसदी और ओबीसी के 49 फीसदी प्रतिभागी बीजेपी को अपना समर्थन जताते दिख रहे हैं. एक्सिस-माई-इंडिया के सर्वे के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रतिभागियों के लिए 'आप' दूसरी और कांग्रेस आखिरी पसंद है.

Advertisement

मुस्लिम
पिछड़े वर्गों की तरह मुस्लिमों का भी 2015 में आम आदमी पार्टी को भारी समर्थन मिला था. लेकिन एक्सिस-माई-इंडिया के सर्वे के पूर्वानुमान से लगता है कि 'आप' से अधिकतर मुस्लिमों का भी मोहभंग हो गया है. सर्वे के संकेतों के मुताबिक मुस्लिम फिर से राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस की ओर लौटते लगते हैं. सर्वे के 42 फीसदी मुस्लिम प्रतिभागियों ने कांग्रेस को अपनी पहली पसंद बताया. जबकि 37 फीसदी मुस्लिम प्रतिभागियों ने ही 'आप' पर भरोसा जताया.

जहां तक दिल्ली के सिख मतदाताओं का सवाल है तो सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 43 फीसदी सिख प्रतिभागी बीजेपी को समर्थन देते दिख रहे हैं. 27 फीसदी सिख प्रतिभागियों ने 'आप' और 23 फीसदी ने कांग्रेस को अपनी पसंद बताया.


आय वर्गों की बात की जाए तो दिल्ली में सभी वर्गों मे बीजेपी अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टियों पर बढ़त लेती दिख रही है. अब चाहे दस हजार रुपए से नीचे का आय वर्ग हो या आलीशान कोठियों में रहने वाले उच्च आय वर्ग के लोग हों.

झुग्गी झोपडियों में रहने वाले और अन्य कमजोर आय वर्ग के लोग जो कि 2015 में 'आप' के समर्थन का मुख्य आधार थे, उनमें से भी अधिकतर ने बीजेपी की ओर झुकना शुरू कर दिया है. सर्वे के मुताबिक झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले 40 फीसदी प्रतिभागियों ने मोदी की पार्टी में भरोसा जताया. यहां 26 फीसदी प्रतिभागी ही केजरीवाल की 'आप' और 25 फीसदी ही राहुल गांधी की कांग्रेस को समर्थन देते दिखे.

Advertisement

दस हजार रुपए तक मासिक आय वाले लोगों में 42 फीसदी अब बीजेपी पर भरोसा जताते दिख रहे हैं. ऐसे वर्ग में 25 फीसदी लोगों की अब भी 'आप' पहली पसंद है, वहीं 23 फीसदी कांग्रेस पर भरोसा जता रहे हैं.


दो साल पहले युवा वोटर्स ने बड़ी संख्या में 'आप' को समर्थन दिया था. एक्सिस-माई-इंडिया के सर्वे के संकेतों के मुताबिक अब अधिकतर युवा भी 'आप' से छिटकते नजर आ रहे हैं. सर्वे के पूर्वानुमान के मुताबिक 18-35 आयु वर्ग में 45 फीसदी प्रतिभागियों ने मोदी की पार्टी बीजेपी पर भरोसा जताया. वहीं इस आयु वर्ग में 23 फीसदी की पसंद अब भी 'आप' बनी हुई है. एक्सिस-माई-इंडिया सर्वे के दौरान दिल्ली के 272 वार्ड में 13,800 प्रतिभागियों का 'फेस टू फेस' इंटरव्यू लिया गया. दिल्ली के नागरिकों में 68 फीसदी ने मोदी सरकार के कामकाज पर संतोष जताया. एक्सिस-माई-इंडिया के प्रबंध निदेशक प्रदीप गुप्ता का कहना है कि इसका मुख्य कारण ब्रैंड मोदी का वोटरों को 'आप' से छिटका कर बीजेपी की ओर मोड़ना रहा है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »