उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चर्चा तेज है. इंडिया गठबंधन के तहत दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग पर अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है. अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि गठबंधन तभी संभव है जब कांग्रेस अपनी सभी सीटों की सूची उम्मीदवार के बैकग्राउंड के साथ सौंपेगी. अखिलेश यादव ने दिल्ली में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में शामिल न होने का फैसला किया है और अपनी जगह पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है. इस बीच, अखिलेश यादव ने कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से अपनी रथ यात्रा शुरू करके एक राजनीतिक संकेत भी दिया है. समाजवादी पार्टी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में उनका बड़ा जनाधार है, जबकि कांग्रेस राहुल गांधी की लोकप्रियता के दम पर अधिक सीटों की मांग कर रही है. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 105 से 115 सीटों की मांग कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी उन्हें 85 से 90 सीटें ही देने के मूड में है. विशेष रूप से रायबरेली और अमेठी की कुछ प्रमुख सीटों जैसे ऊंचाहार, हरचंदपुर और अमेठी को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान जारी है. समाजवादी पार्टी के नेता लगातार कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे गठबंधन के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.