पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तपिश गर्म है, लेकिन कांग्रेस के अंदर अलग ही घमासान छिड़ा हुआ है. पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और सुखविंदर सिंह रंधावा इस बात को लेकर मोर्चा खोले हुए हैं कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाया जाए. चन्नी और रंधावा के चलते पंजाब में पार्टी की वापसी का बना बनाया खेल गड़बड़ता जा रहा है.
पिछले एक हफ्ते से कांग्रेस की अंदरुनी कलह को दूर करने में जुटे पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल नाकाम रहे. चरणजीत चन्नी के साथ भूपेश बघेल की चली दो घंटे तक की बैठक बेनतीजा रहने के बाद अब कांग्रेस हाईकमान के पाले में गेंद है.
पंजाब कांग्रेस में चल रही सियासी खींचतान को सुलझाने के लिए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे फ्रंटफुट पर उतर रहे हैं. पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल से मिले फीडबैक पर राहुल, खड़गे और केसी वेणुगोपाल मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर सकते हैं. अब देखना है कि पंजाब के सियासी संकट को कैसे कांग्रेस दूर करती है?
कांग्रेस हाईकमान को चुनौती देते चन्नी-रंधावा
पंजाब विधानसभा चुनाव को अब छह महीने से भी कम समय है. कांग्रेस हाईकमान ने करीब दो महीने के सियासी मंथन के बाद पूरी तैयारी के साथ पंजाब चुनाव में उतरने का फैसला लिया है. राहुल गांधी ने पंजाब के एक-एक नेता से दिल्ली में बैठक कर फीडबैक लिया. लंबे मंथन और कांग्रेस हाईकमान से मंजूरी के बाद एक जुलाई को राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया. पंजाब में चुनाव समितियों की घोषणा होने के साथ ही चन्नी और रंधावा ने बगावत शुरू कर दी.
कांग्रेस हाईकमान के फैसले को चुनौती देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बगावत का बिगुल फूंक दिया. मामले को सुलझाने के लिए पंजाब कांग्रेस प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा गया. छह दिन तक उन्होंने चंडीगढ़ में पार्टी नेताओं के साथ ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर पर नेताओं से मुलाकात और मंथन किया. पांच दिनों तक चन्नी गुट ने दूरी बनाए रखी और राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग करते रहे. इसके चलते कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई.
कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के घर शनिवार को बैठक में चन्नी और रंधावा पहुंचे. दो घंटे तक चली बैठक में चन्नी और रंधावा कांग्रेस हाईकमान के द्वारा संगठन में किए बदलाव के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग पर अड़ा रहा. प्रदेश प्रभारी ने चन्नी गुट की बात हाईकमान तक पहुंचाने की बात तो की है, लेकिन साथ साफ किया है कि फैसला नहीं बदलेगा. बघेल ने यह साफ कर दिया है कि राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से नहीं हटाया जाएगा. इसकी एक बड़ी वजह राजा वडिंग के नेतृत्व में 2024 का चुनाव जीतना रहा है.
राजा वडिंग पर कांग्रेस हाईकमान का भरोसा
पंजाब के 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटें मिली थी, जो राज्य में पार्टी का अब तक सबसे खराब प्रदर्शन रहा था. आम आदमी पार्टी ने 92 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल कर सरकार बनाई थी. 2022 के बाद कांग्रेस में कोई भी प्रदेश अध्यक्ष की कमान कोई भी लेने को तैयार नहीं था. ऐसे में राहुल गांधी ने राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था.
राजा वडिंग ने पंजाब में सिर्फ संगठन की बागडोर ही नहीं संभाली बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य की 13 में से 7 लोकसभा सीटें जिताकर अपना लोहा भी मनवाया था जबकि चन्नी चुनाव हार के बाद पंजाब छोड़कर विदेश चले गए थे और रंधावा राजस्थान का प्रभार संभाल रहे हैं.
यही वजह है कि चरणजीत सिंह चन्नी और रंधावा के बागी रुख अख्तियार किए बाद भी भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से नहीं हटाया जाएगा. चन्नी और रंधावा के सियासी तेवर के बाद भी वडिंग धैर्य बनाए हुए हैं और पंजाब की चुनावी जंग जीतने का तानाबाना बुन रहे हैं. ऐसे में राजा वडिंग को हटाकर कांग्रेस किसी तरह का कोई जोखिम भरा कदम नहीं उठाना चाहती है.
पंजाब की लड़ाई अब दिल्ली दरबार पहुंची
चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब में नवजोत सिंह सिद्दू के अवतार में नजर आ रहे हैं. इसी तरह 2022 के चुनाव से पहले सिद्धू ने भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था और उसके बाद चन्नी के साथ वही तेवर अपनाए रखा. इसकी खामियाजा कांग्रेस को चुनावी हार से चुकाना पड़ा था और चन्नी और रंधावा भी कांग्रेस के कुछ नेताओं को अपने साथ लेकर गोलबंदी कर रहे हैं.
चन्नी समर्थक विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के लिए पार्टी हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी ही 2027 के चुनाव में पार्टी का चेहरा होंगे. बघेल ने कहा कि पंजाब कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरेगी, मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला उचित समय पर होगा, जबकि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी के राष्ट्रीय चेहरे हैं. इस तरह कांग्रेस की गुटबाजी को खत्म की रणनीति मानी जा रही है.
बघेल की रिपोर्ट पर हाईकमान लेगा फैसला
पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल से मिले फीडबैक पर कांग्रेस आलाकमान को चर्चा कर फैसला करना बाकी है. पंजाब में असली विवाद की वजह पार्टी के अंदर चल रही खेमेबंदी है.एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग हैं तो दूसरी तरफ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर रंधावा और उनके समर्थक.
हाईकमान के फैसले से पहले बघेल ने साफ कर दिया. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि पंजाब का मतदाता लोकसभा चुनाव की तरह ही विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी पर भरोसा कर रहा है. कांग्रेस पार्टी का पंजाब में एक ही चेहरा है.
पंजाब में जारी सियासी उठापठक पर अब आलाकमान को फैसला लेना होगा, लेकिन चुनाव से पहले खींचतान पर विरोधियों को एक और दांव मिल गया है. चन्नी खेमे के एक पूर्व मंत्री का रुख बदल रहा है. उन्होंने कहा कि हम पार्टी के खिलाफ नहीं हैं और हम चाहते हैं कि पार्टी की कलह खत्म हो. केंद्रीय नेतृत्व राजा वडिंग को लेकर कोई बदलाव नहीं आया है.
वडिंग के प्रति उनका समर्थन तीन आधारों पर आधारित है. 2027 की चुनावी तैयारियों के तेज होने के साथ पार्टी अस्थिरता से बचना, नेतृत्व के सवालों को फिर से उठाकर गुटबाजी को रोकना और यह विश्वास कि अभी बदलाव होने से पार्टी संगठन को मजबूत करने के बजाय कमजोर करेगा. इसके अलावा राजा वडिंग का धैर्य बनाए रखना भी काम आ रहा है. अब देखना है कि पार्टी हाईकमान दिल्ली में बैठक कर क्या फैसला
लेते हैं?
कुबूल अहमद