सौम्य-शांत नहीं 'जुझारू डिंपल'! CJP प्रोटेस्ट के जरिए सपा ने कैसे साधा 'MY' समीकरण

पेपर लीक और शिक्षा में धांधली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का आंदोलन चल रहा है, जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी और पार्टी सांसद डिंपल यादव फ्रंटफुट पर संघर्ष करती नजर आ रही हैं. जंतर-मंतर पर उतरने से डिंपल की छवि एक जुझारू नेता की बनकर उभरी है.

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जंतर-मंतर पर संघर्ष करती डिंपल यादव (Photo-ITG) जंतर-मंतर पर संघर्ष करती डिंपल यादव (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के अगुवाई में आंदोलन चल रहा है. पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में धांधलियों के खिलाफ छिड़े 'संसद चलो' युवा आंदोलन के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी व पार्टी सांसद डिंपल यादव अपनी महिला ब्रिगेड के साथ फ्रंटफुट पर नजर आईं. डिंपल ने जो रुख और तेवर अपनाए रखा, उसने उनकी पारंपरिक 'सौम्य और शांत' छवि को पूरी तरह बदलकर एक संघर्षशील नेता के रूप में ढाल दिया है. 

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नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में सपा खुलकर खड़ी नजर आ रही है. डिंपल यादव शुरू से अपने सांसद साथियों के साथ जंतर-मंतर पहुंच कर सिर्फ आंदोलन में हिस्सा ही नहीं लिया बल्कि छात्रों के हक में आवाज उठाया. सोमवार को जब पुलिस एक्शन में प्रदर्शनकारी घायल हुए तो छात्रों की मदद करती नजर आईं. 

डिंपल यादव ने सड़क से संसद तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. उन्होंने जिस तरह आगे आकर मोर्चा संभाला, उसने न केवल आंदोलनकारी छात्रों को एक बड़ा राजनीतिक और नैतिक समर्थन दिया, बल्कि पार्टी के रुख को भी मजबूती से रेखांकित किया. यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले डिंपल यादव की छवि उभरकर आई है, वो सपा के लिए सियासी संजीवनी से कम नहीं है. 

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डिंपल यादव ने आंदोलन को किया लीड
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक शिक्षा सुधार, नीट पेपर लीक मामले में एक्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे थे.  डिंपल यादव ने सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहीं बल्कि सपा सांसदों के साथ जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक को अपना समर्थन दिया था. डिंपल ने आंदोलनकारियों से मिलीं और उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया. इस तरह जमीन पर उतरकर सीधी मौजूदगी दर्ज कराया. 

संसद से सड़क तक सोनम वांगचुक के उठाए जा रहे मुद्दों को लेकर संघर्ष करने का ऐलान डिंपल यादव ने कर दिया. मॉनसून सत्र के पहले दिन सीजेपी के नेतृत्व में छात्रों ने संसद कूच का नारा दिया तो डिंपल यादव भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर सड़क से संसद तक खड़ी नजर आईं. इतना ही नहीं संसद कूच के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया तो डिंपल यादव भी अपने सांसदों के साथ खड़ी रहीं. 

पुलिस एक्शन में घायल छात्र की तबीयत बिगड़ी तो डिंपल यादव उसके पास बैठी नजर हैं, उस छात्र के शर्ट का बटन खोलती हैं ताकि उसे सांस लेने में आसानी हो सके और आसपास मौजूद लोगों से उसकी मदद करने को कहती हैं.  वीडियो में एक समर्थक डिंपल यादव से कहता सुनाई देता है, ‘मैम, अगर एंबुलेंस की व्यवस्था हो सके तो प्लीज मदद कर दीजिए.’ इसके बाद डिंपल यादव अपने साथ मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं से छात्र को हवा करने और तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए कहती हैं. इसके अलावा एक घायल छात्रो को पानी पिलाती हुई नजर आती है. 

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जंतर-मंतर पर फ्रंटफुट पर डिंपल यादव 
नीट और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में उतरना और पुलिस के हाथों हिरासत में जाना, सपा के लिए एक बड़ी सियासी संजीवनी साबित हो रहा है, इससे पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं और बेरोजगारों के सबसे बड़े मुखर विकल्प के रूप में उभरने का मौका मिल रहा है.  डिंपल यादव का आमतौर पर शांत और संयमित चेहरा होता है, लेकिन जंतर-मंतर पर सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखे हमले करते दिखीं.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उनका आक्रामक तेवर, बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश और एक घायल छात्र की मदद करते हुए मानवीय चेहरा सोशल मीडिया पर खासा चर्चा में रहा. जंतर-मंतर की सड़क पर मोर्चा खोलने के बाद अपने सांसदों के साथ डिंपल यादव संसद भवन में भी नीट और पेपर लीक के मुद्दे को उठाकर  बीजेपी और मोदी सरकार को कठघऱे में खड़ी करती नजर आ रही हैं. 

डिंपल जंतर-मंतर के मुद्दों को संसद के भीतर और मीडिया के सामने प्रमुखता से उठाया, जिससे इस आंदोलन को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में केंद्र बिंदु बनाने में मदद मिली. डिंपल यादव ने कहा कि देश के युवा अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने और संवाद करने के लिए तैयार नहीं है. उनके मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था से सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों और युवाओं को हो रहा है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है. 

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अखिलेश यादव का संयोग या प्रयोग
डिंपल यादव की पहचान अखिलेश यादव की पत्नी और मुलायम सिंह यादव के बहु के रूप में रही है, लेकिन इस सीजेपी आंदोलन से उनकी छवि पूरी तरह बदल गई है. जंतर-मंतर पर उतरकर उन्होंने सिर्फ आंदोलन को समर्थन ही नहीं बल्कि सहानुभूति का भी दांव है.  

उत्तर प्रदेश में सात महीने के बाद विधानसभा चुनाव है, सपा के लिए यह चुनाव अपने सियासी वजूद को बचाए रखने का है. जंतर-मंतर के मंच का इस्तेमाल करके सपा ने सीधे सत्ताधारी दल की घेराबंदी की. इससे पार्टी को खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में और अधिक मुखरता से पेश करने का मौका मिला.

दिल्ली के जंतर मंतर की सड़क पर उतर डिंपल यादव ने लखनऊ की सियासत को सियासी संदेश देने का दांव चला है. सपा की यह सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है. डिंपल यादव ने एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते प्रदर्शनकारियों से सीधे बातचीत की, उनकी मांगों को ध्यान से सुना और उनके दर्द को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का भरोसा दिया. 

सपा का एम-वाई समीकरण साधने का दांव

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के प्रोटेस्ट के जरिए सपा ने एम-वाई समीकरण मुस्लिम-यादव नहीं बल्कि महिला और यूथ को साधने का दांव माना जा रहा है. भारतीय राजनीति में महिला वोटर एक स्वतंत्र और निर्णायक वोट बैंक बनकर उभरी हैं, डिंपल यादव की आंदोलन में सक्रियता से महिलाओं के मुद्दों पर सपा की छवि एक संवेदनशील और सुरक्षा देने वाली पार्टी के रूप में मजबूत कर सकती है.

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सपा की महिला विंग और कार्यकर्ताओं को आंदोलन के समर्थन में लामबंद करके उन्होंने प्रदर्शन को जमीनी और सांगठनिक ताकत दी. डिंपल यादव के इस आक्रामक और संवेदनशील नेतृत्व का सीधा रणनीतिक लाभ सपा को मिल सकता है. 

डिंपल यादव का सौम्य लेकिन मजबूत रुख उन्हें सपा के भीतर और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख महिला नेता के रूप में स्थापित करता है. पार्टी को एक ऐसा चेहरा मिला है जो सीधे महिला वर्ग से जुड़ सकता है. इसके अलावा छात्रों के साथ खड़ी होकर डिंपल ने युवाओं के समर्थन को हासिल करने की कवायद मानी जा रही है. डिंपल यादव के जंतर-मंतर आंदोलन में आगे रहने से सपा न केवल महिलाओं और युवाओं के मुद्दे पर नैतिक बढ़त हासिल करने की है ताकि आगामी चुनाव में जीत दर्ज की जा सके. 

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