आज की जेन जी पढ़ाई पूरी करने के बाद तेजी से नौकरी की दुनिया में कदम रख रही है. लेकिन कॉलेज से निकलते ही नौकरी शुरू करने वाले युवाओं को लेकर कंपनियों की कुछ शिकायतें भी सामने आ रही हैं. एम्प्लॉयर्स का कहना है कि कई नए ग्रेजुएट्स काम की जिम्मेदारियों, ऑफिस के तौर-तरीकों और प्रोफेशनल माहौल को समझने में स्ट्रगल कर रहे हैं.
एक नामी वेबसाइट ने करीब 1000 अमेरिकी बिजनेस लीडर्स का सर्वे किया. ये प्लेटफॉर्म युवाओं और उनके करियर से जुड़ी जानकारी देने का काम करता है. सर्वे में सामने आया कि 2024 में कॉलेज से निकलकर नौकरी करने वाले युवाओं की कुछ कमियां अब कंपनियों के आगे के भर्ती फैसलों को प्रभावित कर रही हैं. इसका असर आने वाले नए ग्रेजुएट्स की नौकरी पर पड़ सकता है.
युवा एम्प्लॉइज के साथ कई तरह की दिक्कतों का सामना करने के बाद, हर 6 में से 1 बॉस ने कहा कि वो आगे कॉलेज से नए ग्रेजुएट्स को नौकरी देने को लेकर हिचकिचा रहा है. वहीं, हर 7 में से 1 बॉस ने माना कि वो अगले साल कॉलेज से निकलने वाले युवाओं को नौकरी पर रखने से पूरी तरह बच सकता है. सर्वे में शामिल करीब तीन-चौथाई कंपनियों ने कहा कि उनके यहां हाल ही में नौकरी पर रखे गए कुछ या कई ग्रेजुएट्स किसी न किसी मामले में उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाए.
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कंपनियां जेन जी एम्प्लॉयर्स को क्यों निकाल रही हैं?
एम्प्लॉयर्स की सबसे बड़ी शिकायत युवाओं में काम को लेकर उत्साह और खुद से पहल करने की कमी को लेकर है. सर्वे में शामिल 50% बिजनेस लीडर्स ने इसे नए इम्पलॉइज के साथ काम न चल पाने की एक वजह बताया. बॉसेज ने जेन जी एम्प्लॉयर्स को नौकरी से निकालने की कुछ और वजहें भी बताई हैं. इनमें ऑफिस के हिसाब से सही तरीके से काम न करना, काम को व्यवस्थित न रखना और बातचीत करने में दिक्कत आना जैसी प्रॉबलम्स शामिल है.
कंपनी के बड़े अधिकारियों का कहना है कि उन्हें नई पीढ़ी के एम्प्लॉयर्स के साथ रोज किसी न किसी तरीके परेशानियां भी झेलनी पड़ीं. इनमें काम और मीटिंग में बार-बार देर से पहुंचना, ऑफिस के हिसाब से सही कपड़े न पहनना और ऑफिस में सही तरीके से बात न करना जैसी प्रॉब्लम्स को मेंशन किया गया.
नए ग्रेजुएट्स नहीं संभाल पाते काम का बोझ!
वहीं आधे से ज्यादा भर्ती करने वाले मैनेजर्स का मानना है कि कॉलेज से निकलने वाले ग्रेजुएट्स काम की दुनिया के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते. वहीं, 20% से ज्यादा का कहना है कि कुछ नए ग्रेजुएट्स काम का बोझ भी ठीक से नहीं संभाल पाते.
कॉलेजों को भी इस कमी का एहसास होने लगा है. इसलिए कुछ कॉलेज अपने स्टूडेंट्स को नौकरी की असली दुनिया के लिए तैयार करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
उदाहरण के लिए, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी अपने स्टूडेंट्स को पेशेवर लोगों से बातचीत करना सिखा रही है. जब बॉसेज से आगे ये पूछा गया कि स्टूडेंट्स को हायरिंग के लिए कैसे तैयार किया जाए तो बॉसेज ने जवाब में कहा- एक अच्छा ऐटिट्यूड और सामने से काम करने की पहल.
इंटेलिजेंट के शिक्षा और करियर विकास सलाहकार ह्यू गुयेन का कहना है कि नई नौकरी में जेन जी को अपने आसपास के एम्प्लॉयद के काम करने और बात करने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए. इससे उन्हें ऑफिस के माहौल को समझने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही खुद से सवाल पूछना, काम पर राय लेना, वक्त पर काम पूरा करना और जरूरत पड़ने पर आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेना भी जरूरी है. यानी कंपनियों की नजर में सिर्फ डिग्री काफी नहीं, बल्कि काम के प्रति अच्छा रवैया, सीखने की इच्छा और खुद से पहल करना भी नौकरी में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है.
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