रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की एंटोंमोलॉजी परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पेपर लीक के 36 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी प्रोफेसर समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जांच में दो लोगों की मुख्य भूमिका सामने आई है, जिनमें दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया का नाम शामिल है. प्रार्थी डॉ. एनआर. रंगारे ने थाना तेलीबांधा में रिपोर्ट दर्ज कराया कि वह इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी के पद पर कार्यरत हैं.
कब लीक हो गया पेपर?
विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी 28 कृषि महाविद्यालयों में बीएससी (कृषि) द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के एजीसीएच-221 (एंटोंमोलॉजी) विषय की परीक्षा होनी थी. परीक्षा से एक दिन पहले 20 अगस्त 2026 को सुबह 8:41 बजे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कवर्धा के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली. संबंधित अधिकारियों को यह सूचना 8:54 बजे मिली. इसके अलावा छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी विश्वविद्यालय को व्हाट्सऐप के जरिए प्रश्नपत्र के कुछ सवालों के साथ वायरल होने की जानकारी दी. मिली जानकारी के मुताबिक और उपलब्ध सामग्री की जांच में प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की पुष्टि हुई. बताया गया कि किसी अज्ञात आरोपी ने एंटोंमोलॉजी का प्रश्नपत्र लीक कर सोशल मीडिया के जरिए वायरल किया था.
दर्ज की गई शिकायत
इसके बाद शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया. पुलिस ने छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5 और 10 तथा बीएनएस की धारा 316 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी. घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे अत्यंत संवेदनशील मामला माना. उन्होंने संबंधित अधिकारियों, प्रभारी एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना प्रभारी तेलीबांधा को अज्ञात आरोपी की जल्द पहचान सुनिश्चित कर उसे गिरफ्तार करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए.
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट एवं थाना तेलीबांधा पुलिस सहित अन्य पुलिस बल की 100 से अधिक लोगों की टीम बनाकर अज्ञात आरोपी की पता लगाने को कहा गया. गठित की गई टीमों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की गई.
वायरल हो रहे फोटो-वीडियो की हुई जांच
एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की साइबर विंग ने सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वायरल प्रश्नपत्र, स्क्रीनशॉट, फोटो, मैसेज और पोस्ट का तकनीकी जांच की. इस दौरान जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल नंबर या डिजिटल माध्यम से शेयर किया गया था. इसके लिए वायरल सामग्री की टाइमलाइन और उसे आगे भेजे जाने की पूरी श्रृंखला की बारीकी से जांच की गई. इसके अलावा संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल नंबर, ग्रुप और आपसी डिजिटल संपर्कों की तकनीकी जांच की गई. उपलब्ध डिजिटल सबूतों के आधार पर संबंधित लोगों की गतिविधियों और लोकेशन की भी जांच की गई.
इस तरह हुई गिरफ्तारी
मिले तकनीकी सबूतों और पूछताछ से मिली जानकारी का मिलान करते हुए पुलिस टीमों ने लगातार मैदानी और तकनीकी जांच की. जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत तक पहुंचते हुए दुर्ग निवासी अनुज मिंज के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद पुलिस टीम दुर्ग पहुंची और अनुज मिंज को पकड़ लिया. मिली जानकारी और सबूतों के आधार पर पूछताछ आगे बढ़ाई गई.
इसके बाद कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों में अलग-अलग पुलिस टीमें भेजी गईं. पुलिस टीमों ने लगातार 36 घंटे तक जांच और कार्रवाई की. इस दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत का पता लगाते हुए अज्ञात आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की गई. पुलिस के मुताबिक, मामले का खुलासा करते हुए कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
मुख्य आरोपी में ये नाम हैं शामिल
पुलिस के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया है. वह भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में साल 2019 से प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है. पिछले करीब एक साल से वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लेने के लिए कृषि महाविद्यालय, रायपुर आता था. 17 अगस्त 2026 को भी वह भारती एग्रीकल्चर कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए रायपुर के जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय पहुंचा.
उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के बाद उसने अगले एक सप्ताह में होने वाली परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लिए और उन्हें अपने कॉलेज ले गया. सभी प्रश्नपत्रों के लिफाफे कॉलेज में रख दिए गए, लेकिन 20 अगस्त को होने वाली एजीसीएच-221 (कीटशास्त्र) परीक्षा का प्रश्नपत्र वाला लिफाफा वह अपने घर ले गया.
पुलिस के अनुसार, घर पर आरोपी ने लिफाफे में सुई और नुकीले उपकरण से छोटा छेद किया और उसमें मोबाइल कैमरा डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली.
इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री की नकल तैयार की और उसे अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को 11 हजार रुपये में बेच दिया. इसके बाद अजय नायक ने यह प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को उपलब्ध कराया.
पुलिस ने मामले में सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. उनके पास से 11 हजार रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपी और फेविकोल जब्त किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, मामले में 2 अन्य आरोपी अभी फरार हैं. उनकी तलाश जारी है. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर अन्य आरोपियों की भूमिका और मामले में उनकी संलिप्तता की भी जांच की जा रही है.
महेंद्र नामदेव