जरा सोचिए आपके ऑफिस में अप्रेजल का समय है और आप अपने मैनेजर के सामने बैठे हैं (या इससे भी बुरा,जल्दबाजी में किए गए वीडियो कॉल पर), अपनी बात रख रहे हैं, अपने आंकड़ों का बचाव कर रहे हैं, अच्छी सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद में लेकिन आपका मैनेजर कुछ कह नहीं रहा है. वह चुप रहता है. तो कहीं न कहीं आपके दिमाग में ये बात जरूर आती है कि वह किसका पक्ष ले रहा है? अगर आप भी ऐसा फील कर रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं.
फाउंडिट की 2026 की मूल्यांकन रुझान रिपोर्ट के अनुसार, करीब 3 में से 1 कर्मचारी का अप्रेजल इस साल मैनेजर के खास सहयोग के बिना पूरा हुआ. यह रिपोर्ट जून 2026 में 15 क्षेत्रों के 2,598 कर्मचारियों के सर्वे पर आधारित है. सर्वे में 22% कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें अप्रेजल के समय मैनेजर से कोई मदद नहीं मिली, जबकि 10% ने कहा कि उन्हें ज्यादातर काम खुद ही संभालना पड़ा. यानी कुल 32% कर्मचारियों को अपने मैनेजर का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला.
वहीं, 37% कर्मचारियों ने बताया कि उनके मैनेजर ने अप्रेजल चर्चा के दौरान उनका साथ दिया और उनकी उपलब्धियों को आगे रखा. यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीदें कंपनियों द्वारा दी जा रही वास्तविक बढ़ोतरी से ज्यादा है.
ज्यादा उम्मीद लेकिन कम हुआ अप्रेजल
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रेजल के दौरान ज्यादातर कर्मचारियों को 6% से 10% तक की सैलरी इंक्रीमेंट मिला. करीब 19% कर्मचारियों ने इतनी बढ़ोतरी मिलने की बात कही. वहीं, 15% कर्मचारियों को 5% तक की बढ़ोतरी मिली, जबकि 12% को 11% से 15% के बीच सैलरी बढ़ी. केवल 7% कर्मचारियों को 16% से 20% तक और 12% कर्मचारियों को 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी मिली.
सर्वे में 28% कर्मचारियों ने बताया कि उनका अप्रेजल अभी तक नहीं हुआ है, जबकि 8% ने कहा कि अप्रेजल के बाद भी उन्हें कोई सैलरी नहीं मिली है.
यानी एक तिहाई से ज्यादा कर्मचारियों को या तो अभी तक अप्रेजल नहीं मिला या फिर उनकी सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई.
वहीं, नौकरी बदलने को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें काफी ज्यादा है. सिर्फ 7% कर्मचारी 10% से कम बढ़ोतरी पर भी नौकरी बदलने को तैयार हैं. करीब 23% कर्मचारी 11% से 20% तक, जबकि 27% कर्मचारी 21% से 30% तक सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद रखते हैं.
इसके अलावा 23% कर्मचारी 31% से 40% तक और करीब 20% कर्मचारी 40% से ज्यादा सैलरी बढ़ोतरी मिलने पर ही नौकरी बदलने की सोचते हैं.
यानी करीब 70% कर्मचारी नई नौकरी के लिए कम से कम 21% वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि मौजूदा अप्रेजल में ज्यादातर बढ़ोतरी एकल अंक (10% से कम) में ही रही है.
कर्मचारी तलाश रहे हैं नौकरी
रिपोर्ट में कर्मचारियों को नौकरी पर बनाए रखने को लेकर भी सवाल उठे, जिन्होंने अपनी नौकरी की तलाश की योजनाओं के बारे में बताया, उनमें से 52% ने कहा कि वे सक्रिय रूप से एक नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं. अन्य 34% लोगों ने कहा कि यदि उन्हें सही ऑफर मिलता है तो वे नए अवसरों के लिए तैयार हैं.
केवल 11% लोगों ने कहा कि वे फिलहाल नौकरी की तलाश में नहीं हैं, लेकिन सही अवसर मिलने पर वे इस बारे में विचार करेंगे. केवल 4% लोगों ने कहा कि उनकी नौकरी बदलने की कोई योजना नहीं है.
रिपोर्ट से पता चलता है कि कई कर्मचारी अपने मौजूदा अप्रेजल से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने के बावजूद नौकरी बदलने के लिए तैयार हैं.बेहतर सैलरी और नए अवसरों की उम्मीद में बड़ी संख्या में प्रोफेशनल नई नौकरी तलाशने का मन बना रहे हैं.
पैसा ही नहीं है नौकरी छोड़ने की वजह
हालांकि, बेहतर सैलरी ही नौकरी बदलने के लिए काफी नहीं है. करियर ग्रोथ भी अहम भूमिका निभा रही है. सर्वे में 23% लोगों ने कहा कि वे बेहतर सैलरी के लिए नौकरी बदलना चाहते हैं. वहीं, 20% कर्मचारियों ने पदोन्नति या करियर में आगे बढ़ने के अवसर न मिलने को इसका कारण बताया.
इसके अलावा, 17% लोगों ने कहा कि उनकी सैलरी बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. 16% कर्मचारी बेहतर सीखने के अवसरों की तलाश में हैं, जबकि 14% लोगों ने खराब कार्य संस्कृति या मैनेजर को नौकरी बदलने की वजह बताया. वहीं, 11% लोगों ने अन्य कारण बताए.
कुल मिलाकर, 40% कर्मचारियों ने सैलरी और अन्य आर्थिक कारणों को नौकरी बदलने की वजह बताया, जबकि 36% लोगों ने करियर विकास और सीखने के अवसरों को अहम माना. इससे साफ है कि कर्मचारी अब सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि बेहतर करियर अवसरों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं.
नए कर्मचारी को करना पड़ रहा सबसे ज्यादा इंतजार
सर्वे में कर्मचारियों के अनुभव के आधार पर भी बड़ा अंतर देखने को मिला.रिपोर्ट के अनुसार, जिन कर्मचारियों को अपनी मौजूदा कंपनी में काम करते हुए तीन साल से कम समय हुआ है, उनके अप्रेजल होने की संभावना सबसे ज्यादा है. इस ग्रुप के करीब 43% कर्मचारियों ने बताया कि उनका अभी तक मूल्यांकन नहीं हुआ है. वहीं, ज्यादा अनुभवी कर्मचारियों में यह आंकड़ा करीब 21% से 29% के बीच रहा.
नए कर्मचारियों के लिए अप्रेजल की संभावना बेहद कम है. रिपोर्ट से पता चलता है कि वरिष्ठ कर्मचारियों की तुलना में नए कर्मचारियों का अप्रेजल की स्पीड धीमी है.
कर्मचारियों के अनुभव में बड़ा अंतर
रिपोर्ट से पता चलता है कि कर्मचारियों के अप्रेजल अनुभव दो अलग-अलग हिस्सों में बंटे हुए हैं. कुछ कर्मचारियों को ऐसे मैनेजर मिले, जिन्होंने अप्रेजल चर्चा के दौरान उनका पूरा समर्थन किया, जबकि कई कर्मचारियों को अपनी उपलब्धियों और सैलरी बढ़ोतरी के लिए खुद ही अपना पक्ष रखना पड़ा.
वहीं, कंपनियां अभी भी ज्यादातर एकल-अंक (10% से कम) सैलरी वृद्धि दे रही हैं, जबकि कई कर्मचारी मानते हैं कि नौकरी बदलने पर उन्हें 20% से ज्यादा बढ़ोतरी मिल सकती है.
कंपनियों द्वारा दी जा रही सैलरी और कर्मचारियों की बाजार में संभावित कमाई के बीच यह अंतर आने वाले समय में प्रतिभाओं को बनाए रखने के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क