13 साल के रॉय किम का अनोखा आविष्कार, हवा की नमी से बना रहा पानी, किसानों की परेशानी का निकाला हल

अमेरिका के ओरेगन के 13 साल के एक छात्र ने ऐसा चैंबर बनाया है, जो हवा की नमी को पानी में बदल सकता है. इस तकनीक से सूखे से प्रभावित खेतों को पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है. इस खास आविष्कार के लिए उसे 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज के टॉप फाइनलिस्टों में चुना गया है. 

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हवा की नमी से पानी बना रहा है ये 13 साल का बच्च.  (Photo: youngscientistlab.com) हवा की नमी से पानी बना रहा है ये 13 साल का बच्च. (Photo: youngscientistlab.com)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

दुनिया भर में सूखे की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं लेकिन इस बीच ओरेगन के एक 13 साल के छात्र ने एक ऐसा कर दिखाया है, जो किसानों को हवा की नमी से ही पानी बनाने में मदद कर सकता है. व्हिटफोर्ड मिडिल स्कूल के छात्र रॉय किम ने एक ऐसा चैंबर बनाया है, जो हवा की नमी को पानी में बदलकर सिंचाई में इस्तेमाल किया जा सकता है. उनके इस शानदार आविष्कार के लिए उन्हें 2026 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज के टॉप 10 फाइनलिस्ट में चुना गया है. 

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कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी? 

रॉय के इस टेक्नोलॉजी में पेल्टियर मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया है, जो बिजली लगाने पर तापमान में अंतर पैदा करने वाला उपकरण है. एक तरफ गर्म हो जाती है जबकि दूसरी तरफ ठंडी हो जाती है, जिससे गर्म हवा में मौजूद नमी पानी की बूंदों में बदल जाती है. इस प्रक्रिया में पहले हवा को चैंबर के अंदर भेजा जाता है, जहां उसे गर्म किया जाता है फिर पंखे की मदद से उसे ठंडी सतह पर भेजा जाता है, जिससे पानी की बूंदें बनती हैं. इस पानी को इकट्ठा करके वाल्व के जरिए पौधों तक पहुंचाया जाता है.इस सिस्टम में मिट्टी की नमी, तापमान और हवा की नमी मापने वाले सेंसर लगे हैं. ये सेंसर खुद तय करते हैं कि पौधों को कब पानी चाहिए और उसी हिसाब से हवा का प्रवाह नियंत्रित करते हैं. इससे पानी की बर्बादी कम होती है. 

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छोटा उपकरण पर बड़ा लक्ष्य 

परीक्षण के दौरान, प्रोटोटाइप ने दो घंटे में 10 मिलीलीटर पानी का उत्पादन किया जिसकी अधिकतम दक्षता 135.8 ग्राम प्रति किलोवाट-घंटा थी. रॉय ने खेती में पानी की कमी की समस्या को हल करने के लिए यह प्रोजेक्ट को बनाया गया है. आज कई किसान बारिश, भूजल और नदियों पर निर्भर हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण ये स्रोत लगातार कम भरोसेमंद होते जा रहे हैं. 

बड़े सपनों वाले युवा आविष्कारक

3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज में अमेरिका के कक्षा 5 से 8 तक के छात्र हिस्सा लेते हैं. साइंस और इंजीनियरिंग की मदद से असली समस्याओं का समाधान खोजते हैं. रॉय को उम्मीद है कि उनका आविष्कार खेती में पानी बचाने वाली तकनीकों को बढ़ावा देगा. आगे चलकर वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं और जल संकट व जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के लिए नए समाधान करने की दिशा में काम करना चाहते हैं. 

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