जब कागजों से बार-बार की गई गुहार सरकारी फाइलों के अंबार में गुम हो जाती हैं, तो फिर सोए हुए सिस्टम को जगाने के लिए ढोल-नगाड़ों की थाप का ही सहारा लेना पड़ता है. पौड़ी गढ़वाल से प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां बी.आर. मॉडर्न स्कूल के मासूम छात्र-छात्राएं हाथों में ढोल, ड्रम और बैंड लेकर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे. बच्चों की मांग सिर्फ इतनी है कि स्कूल के रास्ते में सिर पर मौत बनकर मंडरा रहे ख़तरनाक पेड़ों को तुरंत हटाया जाए.
साल भर से चक्कर काट रहे थे बच्चे और शिक्षक
मामला स्कूल रूट पर मौजूद जर्जर और खतरनाक चीड़ के पेड़ों से जुड़ा है. स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, इस खतरे को लेकर वे पिछले एक साल से शासन और प्रशासन के चक्कर काट रहे थे. मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर जिलाधिकारी और वन विभाग तक, हर जगह लिखित शिकायतें दी गईं. लेकिन लालफीताशाही का आलम यह रहा कि 12 महीने बीत जाने के बाद भी अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. आखिरकार, जान के जोखिम से तंग आकर मासूमों को ही विरोध की कमान संभालनी पड़ी.
वन विभाग की दलील- कागजी NOC में फंसा था मामला
मासूम बच्चों के इस अनोखे प्रदर्शन और ढोल की गूंज के बाद बैकफुट पर आए वन विभाग के अधिकारियों ने अब सफाई पेश की है. डीएफओ महातिम यादव के अनुसार, जिन पेड़ों को लेकर विवाद है, वे पॉलिटेक्निक कॉलेज की जमीन पर हैं और पुरानी वन पंचायत की सीमा में आते हैं. इस वजह से एनओसी (NOC) और विभागीय प्रक्रियाओं में वक्त लग गया. अफसरों ने अब दावा किया है कि सभी कागज़ी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और अगले एक से दो दिनों के भीतर इन पेड़ों को कटवा दिया जाएगा.
आजतक एजुकेशन डेस्क