'लौट आओ मेरे बच्चे!' NEET पेपर लीक के पीछे छूटा मौत, लाचारी-गुस्से का वो खौफनाक मंजर, जिसने पूरे देश को रुला दिया!

आज ही नीट (NEET) की एक और होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने घर के पंखे से लटककर अपनी जान दे दी. आकांक्षा को हाल में दी परीक्षा में 650 नंबर आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के सदमे ने उसकी हिम्मत तोड़ दी. नीट पेपर लीक के कारण ये अकेला सुसाइड नहीं है, अब तक ये आंकड़ा डराने वाला है. आप भी समझ‍िए कि तैयारी कर रहे बच्चे क‍िस मनोस्थ‍िति से गुजर रहे हैं?

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मानसी मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:04 AM IST

चले जाओगे तो वापस कैसे आओगे मेरे बच्चे... लौट आओ! यह उस बेबस, लाचार और किस्मत की मारी मां की चीख है, जिसके आंसुओं की धार दिल्ली से लेकर राजस्थान और यूपी से लेकर बिहार तक के पूरे परीक्षा तंत्र के दामन को भिगो रही है.

इस चीख में आज मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज के मगनिया गांव से उठी एक और दर्दनाक आवाज जुड़ गई है. आज ही नीट (NEET) की एक और होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने घर के पंखे से लटककर अपनी जान दे दी. आकांक्षा को हाल में दी परीक्षा में 650 नंबर आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के सदमे ने उसकी हिम्मत तोड़ दी. मौके से मिले सुसाइड नोट में उसने लिखा, 'सॉरी, मम्मी-पापा.. आपको भरोसा था कि मेरी बेटी डॉक्टर बनेगी, पर दोबारा नीट का पेपर देने की अब हिम्मत नहीं है. मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया...'

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आकांक्षा इस राह में अकेली नहीं है. 3 मई 2026 को देश-विदेश के केंद्रों पर जब 22.7 लाख से अधिक मासूम आंखें डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा हॉल में बैठी थीं, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि पर्दे के पीछे चंद रुपयों के लालची मगरमच्छ उनके भविष्य का सौदा कर चुके हैं. राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच में जब यह खौफनाक सच सामने आया कि परीक्षा से पहले ही बायोलॉजी और केमिस्ट्री के 120 से ज्यादा हूबहू सवाल वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर लीक हो चुके थे, तो सरकार ने आनन-फानन में 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द कर दी.

लेकिन सरकार ने सिर्फ एक 'कागज का टुकड़ा' रद्द किया था. उस कागज के टुकड़े के साथ कितने घरों के चिराग बुझ गए, इसका दिल दहला देने वाला हिसाब इंडिया टुडे की इस ताजा डेटा एनालिसिस रिपोर्ट में दर्ज है. 

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'भ्रष्ट तंत्र' ने छीन ली मासूमों की सांसें
जब हम इस डेटा को खंगालते हैं, तो समझ आता है कि एक मजदूर या किसान के लिए बच्चे को पढ़ाना क्या होता है. आज दम तोड़ने वाली आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी वैसे तो किसानी करते थे, लेकिन बेटी को नागपुर की निजी कोचिंग में पढ़ाने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से 3 लाख का लोन लिया और खुद नागपुर में कुक (रसोइया) की नौकरी करने लगे. पूरे परिवार को भरोसा था कि बेटी डॉक्टर बनेगी, लेकिन पेपर लीक माफियाओं ने उनकी सारी खुशियां छीन लीं.

यह भी पढ़ें: Sorry, मम्मी-पापा, दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है...पेपर लीक के चलते छात्रा ने लगाई फांसी

यही कहानी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (गंगोत्री नगर) के रहने वाले होनहार छात्र ऋतिक मिश्रा की भी थी. ऋतिक ने इस बार बहुत जोरदार तैयारी की थी, लेकिन टीवी पर लगातार नीट घोटाले और परीक्षा निरस्त होने की खबरें देखकर वह इस कदर सहमा कि उसने फंदे को गले लगा लिया.

5 साल में 93 मौतें: साल दर साल बढ़ रहे ये हादसे 
डेटा को करीब से देखो तो रूह कांप जाती है. नीट परीक्षा के इस जानलेवा दबाव और अनिश्चितता ने पिछले पांच वर्षों में देश के 93 होनहार छात्रों को आत्महत्या के दलदल में धकेल दिया है. साल-दर-साल बढ़ता यह आंकड़ा चीख-चीखकर कह रहा है कि हमारा सिस्टम हर साल और ज्यादा हिंसक होता जा रहा है:

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साल 2021: 4 मासूमों ने दम तोड़ा
साल 2022: आंकड़ा बढ़कर 9 हुआ
साल 2023: 14 घरों के चूल्हे बुझे
साल 2024: 19 छात्रों की सांसें थमीं
साल 2025: क्रूरता की हद पार हुई, रिकॉर्ड 32 मौतें दर्ज की गईं
साल 2026 (अब तक): इस साल के शुरुआती पांच महीनों में ही करीब 14 छात्र सुसाइड कर चुके हैं, जिनमें से 5 बच्चों ने तो महज 12 मई को परीक्षा रद्द होने की खबर सुनने के बाद डिप्रेशन में आकर अपनी जान दे दी!

'मौत के कारखाने' बन रहे हैं देश के ये राज्य और शहर
इस डेटा का सबसे स्याह पहलू यह है कि देश के कुछ राज्य और कोचिंग हब इन मासूमों के लिए 'कब्रिस्तान' साबित हो रहे हैं.

बिहार (19.8%): देश में नीट से जुड़ी आत्महत्याओं का हर पांचवां शिकार बिहार का रहने वाला है.
राजस्थान (18.7%): कोटा और सीकर जैसे शहरों को समेटे यह राज्य दूसरे नंबर पर है. इसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु (15.4% प्रत्येक) और मध्य प्रदेश (8.8%) का नंबर आता है.

कोटा का सच: अकेले कोटा शहर में पिछले पांच सालों में 40 छात्रों ने सुसाइड किया है. सफलता की कहानियां बेचने वाले इस शहर के आलीशान कोचिंग संस्थान आज बच्चों के अकेलेपन और डिप्रेशन के सबसे बड़े गवाह हैं.

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पेपर लीक का पूरा सच और सुलगते सवाल
नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों को जो झटका लगा है, उसके पीछे एक पूरा आपराधिक नेटवर्क है. NTA के मुताबिक, 7 मई की शाम को परीक्षा में बड़ी अनियमितताओं की जानकारी मिली, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी गई. 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और बाद में 21 जून को री-एग्जाम कराने का निर्णय लिया गया. पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) कर रही है और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में लगातार नई याचिकाएं दायर कर पेन-पेपर मोड के स्थान पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) लागू करने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां लगातार शिकंजा कस रही हैं. लेकिन सवाल वही है कि जो जिंदगियां चली गईं, उनका क्या?

आखिर इन मौतों का 'एफआईआर' किस पर दर्ज होगा?
अब सवाल यह है कि आप सर्वर बदल देंगे, परीक्षा का मोड बदल देंगे, सीबीआई जांच सौंपकर कुछ लोगों को जेल भी भेज देंगे. लेकिन मुझे ये बताइए कि पेपर लीक माफियाओं की तिजोरियां भरने के चक्कर में आकांक्षा और ऋतिक जैसे होनहार बच्चों के माता-पिता की जो गोद सूनी हो गई, उनकी कोख को कौन सा सिस्टम दोबारा आबाद करेगा?

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(नोट: अगर आप या आपके आस-पास कोई भी छात्र इस समय परीक्षा के तनाव या अनिश्चितता से जूझ रहा है, तो कृपया उसे अकेला न महसूस कराएं. जिंदगी किसी भी परीक्षा, किसी भी सरकारी पद से हजार गुना अनमोल है. खुदकुशी का ख्याल आना बेहद गंभीर मेडिकल एमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.)

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