टेलीग्राम बैन से क्या सचमुच रुक जाएगा NEET पेपर लीक? जानिए देश के साइबर रिसर्चर न‍िसर्ग ने क्या कहा

निसर्ग ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए साफ कहा है कि किसी एक पूरे के पूरे कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर देना 'पेपर लीक' का इलाज नहीं है. जब तक आप उस सड़ चुके सिस्टम और कमियों को ठीक नहीं करेंगे जहां से पेपर सचमुच लीक होता है, तब तक ऐसे बैन बेअसर साबित होंगे.

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आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई द‍िल्ली ,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

आगामी 21 जून को होने जा रही नीट (UG) री-एग्जामिनेशन को पूरी तरह से लीक-प्रूफ बनाने के लिए सरकार ने 22 जून तक पूरे देश में टेलीग्राम सर्विस पर पाबंदी लगा दी है. सरकार का मानना है कि इस डिजिटल लॉकडाउन से पेपर लीक माफिया और अफवाहबाजों के नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा. लेकिन सरकार के इस 'मास्टरस्ट्रोक' पर देश के सबसे उभरते हुए और महज 19 साल के साइबर सुरक्षा रिसर्चर निसर्ग अधिकारी ने बहुत ही तार्किक बात कही है.

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निसर्ग ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए साफ कहा है कि किसी एक पूरे के पूरे कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर देना 'पेपर लीक' का इलाज नहीं है. जब तक आप उस सड़ चुके सिस्टम और कमियों को ठीक नहीं करेंगे जहां से पेपर सचमुच लीक होता है, तब तक ऐसे बैन बेअसर साबित होंगे.

आइए आपको बताते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर निसर्ग अधिकारी ने सरकार को क्या आईना दिखाया है और क्यों उनका यह बयान चर्चा का विषय बन गया है.

'टेलीग्राम को पूरी तरह रोकना नामुमकिन'
निसर्ग अधिकारी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि पेपर लीक रोक नहीं सकते, और आखिर में टेलीग्राम ब्लॉक कर दिया. इसके पीछे उन्होंने दो बेहद मजबूत तकनीकी कारण बताए हैं.

निसर्ग के मुताबिक, टेलीग्राम का आर्किटेक्चर (बनावट) ऐसा है कि सरकार भले ही इस पर बैन लगा दे, लेकिन शातिर यूजर्स और लीक करने वाले गिरोह प्रॉक्सी (Proxies) और अन्य बाईपास टूल्स के जरिए इस पाबंदी को आसानी से दरकिनार कर सकते हैं. व्यावहारिक रूप से टेलीग्राम को 100% बंद करना मुमकिन ही नहीं है.

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युवा एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को अपनी पूरी ऊर्जा किसी प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने में बर्बाद करने के बजाय परीक्षा के सिक्योरिटी सिस्टम को मजबूत करने, लीक के असली सोर्स (जहां पेपर छपता है या रखा जाता है) की पहचान करने और संस्थागत कमजोरियों को दूर करने पर लगानी चाहिए.

कौन हैं निसर्ग अधिकारी, जिन्होंने हिला दिया था CBSE का सिस्टम?
बता दें कि यह 19 साल का लड़का कोई आम छात्र नहीं है. निसर्ग अधिकारी हाल ही में तब पूरे देश की सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने देश के सबसे बड़े स्कूल बोर्ड CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल में एक बहुत बड़ी तकनीकी कमी खोज निकाली थी और उसे रिपोर्ट किया था.

उनकी इस बेजोड़ प्रतिभा और खोजी दिमाग को देखते हुए देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा इनोवेशन सेंटर (C3iHub) ने उन्हें बकायदा OSINT और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के पद पर नियुक्त किया है. इतनी कम उम्र में निसर्ग भारत के साइबर सुरक्षा इकोसिस्टम में एक बेहद मजबूत और जिम्मेदार आवाज बनकर उभरे हैं.

बता दें कि टेलीग्राम पर लगे इस प्रतिबंध ने देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. निसर्ग जैसे एक्सपर्ट्स और आलोचकों का मानना है कि ऐसे बैन से आम जनता और लाखों सीधे-साधे छात्रों का कम्युनिकेशन टूटता है, जबकि अपराधी रास्ता निकाल ही लेते हैं. वहीं सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि इस अस्थाई पाबंदी से लीक मटेरियल या झूठी अफवाहों के फैलने की रफ्तार और उनके दायरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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