MPSC स्कैम: जंतर-मंतर के बाद पुणे में पेपरलीक के खि‍लाफ Gen Z का हल्ला बोल, सड़कों पर युवा

आज सुबह 10 बजे से पुणे के ऐतिहासिक ओंकारेश्वर मंदिर चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में युवक-युवतियों ने हिस्सा लिया. हाथों में तख्तियां और दिल में आक्रोश लिए प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ कहना है कि दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के हक पर डाका डाला जा रहा है.

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पेपर लीक के ख‍िलाफ सड़कों पर उतरे पुणे के युवा पेपर लीक के ख‍िलाफ सड़कों पर उतरे पुणे के युवा

ओमकार / इसरारउद्दीन चिश्ती

  • पुणे,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, धांधली और पेपर लीक के गंभीर आरोपों को लेकर MPSC (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) अभ्यर्थियों का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है. व्यवस्था से नाराज और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हजारों छात्रों ने आज पुणे की सड़कों पर उतरकर आक्रामक विरोध दर्ज कराया है.

आज सुबह 10 बजे से पुणे के ऐतिहासिक ओंकारेश्वर मंदिर चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में युवक-युवतियों ने हिस्सा लिया.

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हाथों में तख्तियां और दिल में आक्रोश लिए प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ कहना है कि दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के हक पर डाका डाला जा रहा है. आयोग में बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और एजेंटों की साठगांठ ने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की धज्जियां उड़ा दी हैं.

आक्रोशित MPSC छात्रों की ये हैं 12 मांगें

MPSC के वर्तमान अध्यक्ष और सचिव का तुरंत इस्तीफा लिया जाए और उनकी जगह बेदाग व स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति हो.

ग्रुप-B परीक्षा में लगे धांधली के आरोपों पर आयोग 7 दिनों के भीतर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे और निष्पक्ष जांच कराए.

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 और कृषि सेवा परीक्षा के वर्णनात्मक (Descriptive) पेपरों के मूल्यांकन में हुई गलतियों की उच्च स्तरीय जांच की जाए.

मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा MPSC को सौंपी गई प्राथमिक जांच रिपोर्ट को बिना किसी देरी के सार्वजनिक किया जाए.

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गिरफ्तार आरोपी अपर सचिव अभिजीत लांडे के पूरे कार्यकाल के दौरान आयोजित की गई सभी परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए.

मुख्य आरोपी लांडे, मराठे और नरखड़े के सेवाकाल, पद स्थापना और पदोन्नति के मानदंडों की गहराई से जांच हो.

इन तीनों संदिग्ध आरोपियों के संपर्क में रहे सभी चयनित उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की बारीकी से जांच की जाए.

मामले में शामिल प्रवीण पाटील और मयूर ठाकरे के अलावा बाकी सक्रिय एजेंटों की भूमिका का भी पर्दाफाश किया जाए.

आयोग की अन्य परीक्षाओं के परिणामों पर छात्रों द्वारा जताई गई आशंकाओं को दूर करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए.

ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में सामने आए संदिग्ध परिणामों और उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए.

25 अक्टूबर 2025 को प्रस्तावित ग्रुप-C प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह से फुलप्रूफ और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की गारंटी दी जाए.

प्रतियोगी परीक्षाओं में लघुलेखक (स्टेनोग्राफर) के पदों को पुनर्जीवित कर उन पर तत्काल भर्तियां निकाली जाएं.

छात्रों का स्पष्ट अल्टीमेटम है कि जब तक उनकी इन जायज और 12 सूत्रीय मांगों पर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं.

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