देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान अब सिर्फ इंजीनियर ही नहीं, बल्कि एक नए तरह के 'हाइब्रिड डॉक्टर' तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. IIT कानपुर ने अपनी महात्वाकांक्षी मेडिकल परियोजना को लेकर 'इंडिया टुडे डिजिटल' के साथ एक एक्सक्लूसिव बातचीत में कुछ बेहद चौंकाने वाले और बड़े खुलासे किए हैं.
सबसे बड़ा खुलासा यह है कि IIT कानपुर फिलहाल MBBS की डिग्री ऑफर नहीं करेगा. इसके बजाय, संस्थान की योजना पहले उच्च चिकित्सा डिग्री और 'सुपर-स्पेशियलिटी' डिग्री जैसे डीएम और एमसीएच शुरू करने की है.
MBBS की डिग्री में क्यों है देरी?
IIT कानपुर के नवनियुक्त डीन, प्रोफेसर अनिल के. लालवानी ने साफ किया कि देश को अब सिर्फ एक और मेडिकल कॉलेज की जरूरत नहीं है, बल्कि एक ऐसे संस्थान की जरूरत है जो मेडिसिन और इंजीनियरिंग के संगम पर काम कर सके. उन्होंने बताया कि MBBS डिग्री शुरू करने में अभी तीन से चार साल का समय और लगेगा.
असल में IIT कानपुर की रणनीति जमीन से छत नहीं, बल्कि छत से जमीन बनाने जैसी है. संस्थान पहले उन विशेषज्ञों को तैयार करना चाहता है जो अस्पताल को एक मजबूत नैदानिक गहराई दे सकें, उसके बाद ही स्नातक छात्रों को व्हाइट कोट पहनाई जाएगी.
मार्च 2027 में पहला मरीज
संस्थान में गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी का काम तेजी से चल रहा है. इसके साथ ही एक अत्याधुनिक अस्पताल भी आकार ले रहा है. यदुपति सिंघानिया सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल: इस 500 बेड वाले अस्पताल का उद्घाटन इस साल के अंत तक हो जाएगा.
डीन लालवानी के अनुसार, अस्पताल में पहले मरीज को मार्च 2027 तक भर्ती किए जाने की संभावना है. अस्पताल के पास ही एक 50 बेड का कैंसर केयर और रिसर्च सेंटर भी बन रहा है. इस भव्य मेडिकल विंग को संभालने के लिए, IIT कानपुर ने 60 नए फैकल्टी सदस्यों को नियुक्त करने की शुरुआती मंजूरी ले ली है, जिनमें क्लिनिकल मेडिसिन और रिसर्च दोनों क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे.
कैसा होगा IIT Kanpur का 'हाइब्रिड डॉक्टर'?
संस्थान के डीन प्रोफेसर अनिल के. लालवानी खुद इस बात का एक जीता-जागता उदाहरण हैं कि एक डॉक्टर और इंजीनियर कैसे एक साथ काम कर सकते हैं. वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में करीब तीन दशकों तक ईएनटी के प्रोफेसर होने के साथ-साथ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे हैं.
IIT कानपुर चाहता है कि एक ऐसा डॉक्टर तैयार हो, जो न सिर्फ मरीज के बेड के पास बैठ सके, बल्कि एक इंजीनियर के बेंच पर भी उतना ही समय बिता सके. ताकि बिस्तर के पास देखी गई किसी समस्या का समाधान उसी दिन गलियारे के उस पार बैठे इंजीनियर की डेस्क पर पहुंंच सके.
बता दें कि IIT कानपुर अकेला ऐसा संस्थान नहीं है जो इस दिशा में बढ़ रहा है. 'इंडिया टुडे डिजिटल' को IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी ने भी मेडिकल डिग्री ऑफर करने की अपनी योजना की पुष्टि की है. IIT खड़गपुर पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुका है.
डीन लालवानी ने भविष्यवाणी की है कि आने वाले समय में हर IIT अपना मेडिकल स्कूल शुरू करेगा, जिससे भारत की उच्च शिक्षा का पूरा नक्शा ही बदल जाएगा, जैसे IITs ने कभी इंजीनियरिंग को बदल दिया था.
रदीफा कबीर