एक ही जॉब में लंबे वक्त तक क्यों नहीं टिकता Gen Z?

Gen Z के लिए नौकरी अब सिर्फ सैलरी और पद का खेल नहीं है. अगर जॉब में कुछ नया सीखने को नहीं मिल रहा या वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ रहा है, तो वे नौकरी बदलने करने से पीछे नहीं हटते. 'नौकरी' की रिपोर्ट बताती है कि आज के यंगस्टर्स के लिए तरक्की, सीखना और मेंटल हेल्थ का ठीक रहना नौकरी में टिके रहने की बड़ी वजह बन रहे हैं.

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जेन जी एक ही कंपनी में लंबे समय तक क्यों नहीं करना चाहती काम? जेन जी एक ही कंपनी में लंबे समय तक क्यों नहीं करना चाहती काम?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:54 PM IST

कॉर्पोरेट कल्चर में Gen Z के आने के साथ काम करने के तरीके में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. धीरे-धीरे जेन जी Gen Z अब वर्क कल्चर का हिस्सा बन रही है और काम करने के पुराने तरीकों को भी अपने हिसाब से बदल रही है. चाहे बात शिफ्ट के बाहर काम न करने की हो, या जितनी सैलरी उतना काम, ऑफिस में हेडफोन लगाकर काम करने की हो. Gen Z अब नौकरी को सिर्फ सैलरी के नजरिए से नहीं देख रही, बल्कि लर्निंग, करियर ग्रोथ और वर्क-लाइफ बैलेंस को भी अहमियत दे रही है. लेकिन सवाल ये है कि वह एक संस्था या ऑर्गेनाइजेशन को कितना लंबा वक्त दे रही है?

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'नौकरी डॉट कॉम' की एक सर्वे में सामने आया है कि भारत में Gen Z के तीन में से एक से ज्यादा प्रोफेशनल्स किसी नौकरी में दो से तीन साल से ज्यादा समय तक काम नहीं करना चाहते. वे करियर में तरक्की, वर्क-लाइफ बैलेंस और मानसिक सेहत को प्राथमिकता देते हैं. बार-बार नौकरी बदलने की वजह सिर्फ ज्यादा सैलरी नहीं है, बल्कि सीखने के मौके और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी उम्मीदों का पूरा न होना भी है. कॉर्पोरेट इंडिया में Gen Z के लिए ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) यानी काम और ग्रोथ को लेकर साफ जानकारी काफी जरूरी है.

ये रिपोर्ट नौकरी की ‘वॉइसेज @ वर्क: द जेन जी वर्क कोड’ रिपोर्ट से सामने आया है. ये रिपोर्ट 80 से ज्यादा इंडस्ट्रीज में काम करने वाले 23 हजार से ज्यादा Gen Z प्रोफेशनल्स के जवाबों पर आधारित है. ये रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि भारत की युवा वर्कफोर्स अब करियर में स्थिरता को पहले से अलग तरीके से देख रही है.

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अक्सर माना जाता है कि Gen Z ज्यादा सैलरी के लिए बार-बार नौकरी बदलती है. लेकिन रिपोर्ट में ऐसा नहीं पाया गया. Gen Z के नौकरी बदलने की एक बड़ी वजह ये है कि उन्हें नौकरी में सीखने के नए मौके नहीं मिलते या उनका वर्क लाइफ में बैलेंस बिगड़ने लगता है. ऐसे में ज्यादा पैसे मिलने का इंतजार किए बिना भी वे नौकरी बदलने के बारे में सोचने लगते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z के लिए करियर में ग्रोथ का मतलब सिर्फ प्रमोशन या सैलरी बढ़ना नहीं है. 57% लोगों के लिए ग्रोथ का मतलब जॉब में नई स्क्लिस सीखना है, जबकि 21% ने सैलरी बढ़ने और 12% ने प्रमोशन को करियर में तरक्की से जोड़ा. ये सोच डिजाइन और ऐड जैसे इंडस्ट्री में और मजबूत दिखी, जहां 78% लोगों ने नई चीजें सीखने को करियर ग्रोथ का सबसे बड़ा फैक्टर बताया.

रिपोर्ट के मुताबिक, 81% जेन जी प्रोफेशनल्स सिर्फ तारीफ से ज्यादा ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट और नए प्रोजेक्ट्स के लिए मौके मिलने को जरूरी समझते हैं. सिर्फ 9% के लिए केवल तारीफ मायने रखती थी.वहीं, 15–25 लाख रुपए सालाना कमाने वाले लोगों में पैसों से मिलने वाले इनाम को लेकर थोड़ा ज्यादा इंटरेस्ट दिखा. लेकिन अलग-अलग सैलरी वाले Gen Z लोगों के बीच भी career में आगे बढ़ने और नई चीजें सीखने वाले मौके ज्यादा जरूरी रहे.

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रिपोर्ट में आगे Gen Z के वर्कस्पेस में स्ट्रेस के बारे में भी बताया गया. 34% लोगों ने वर्क लाइफ में बैलेंस की कमी को सबसे बड़ा तनाव का फैक्टर बताया, जबकि 31% ने  ग्रोथ के मौके में कमी को इसकी वजह माना. वहीं 19% Gen Z प्रोफेशनल्स ने टॉक्सिक ऑफिस कलीग्स  को वर्क प्लेस में स्ट्रेस का रीजन बताया.

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