दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में करीब 1.5 लाख पात्र छात्र-छात्राओं की भारी-भरकम फौज, कैंपस की सड़कों पर बिखरे लाखों पर्चे, गाड़ियों के लंबे काफिले और छात्र संगठनों के करोड़ों के दावों के बावजूद वोटिंग प्रतिशत की तस्वीर बेहद निराशाजनक रही.
दोनों चरणों (डे और ईवनिंग शिफ्ट) की वोटिंग खत्म होने के बाद डूसू चुनाव में कुल 40.46% वोटिंग दर्ज की गई. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल के 39.45% के मुकाबले मामूली रूप से बेहतर है, लेकिन डीयू जैसे देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के लिए यह आंकड़ा गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर 60% छात्र वोट डालने ही क्यों नहीं निकले?
60% छात्रों की बेरुखी: क्या हुड़दंगबाजी और नूराकुश्ती से ऊब चुका है आम छात्र?
कैंपस में दिनभर चले शक्ति प्रदर्शन और घमासान के बाद भी 40.46% का आंकड़ा साफ बताता है कि डीयू का एक बड़ा वर्ग छात्र राजनीति से पूरी तरह से कटा हुआ महसूस करता है. नॉर्थ कैंपस में पढ़ने वाले एक छात्र ने कहा कि लिंगदोह कमिटी के नियमों की उड़ती धज्जियां, सड़कों पर बिखरा कचरा, गाड़ियों के काफिले और गुंडागर्दी के माहौल ने आम पढ़ने वाले छात्रों को पोलिंग बूथ से दूर रखा.
वहीं कई छात्रों का कहना है कि एबीवीपी (ABVP) और एनएसयूआई (NSUI) जैसी बड़ी पार्टियां हॉस्टल की कमी, महंगे पीजी, महिला सुरक्षा और लाइब्रेरी-कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर काम करने के बजाय केवल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने और गाड़ियों के प्रदर्शन में व्यस्त रहीं.
इसके अलावा शुक्रवार को वोटिंग होने के कारण कई बाहरी छात्र वोट डालने के बजाय वीकेंड मनाने अपने घर निकल गए, जिसका सीधा असर वोटिंग टर्नआउट पर पड़ा.
फर्स्ट फेज़ में सिर्फ 36%, ईवनिंग शिफ्ट ने थोड़ी बचाई साख
शुक्रवार सुबह 8:30 से दोपहर 1:00 बजे तक चले पहले चरण (डे कॉलेज) में वोटिंग की रफ्तार बेहद धीमी रही, जहां महज 36% के आसपास ही मतदान हुआ था. हालांकि, दोपहर 3:00 से शाम 7:30 बजे तक चले ईवनिंग शिफ्ट के मतदान में छात्रों ने थोड़ी अधिक दिलचस्पी दिखाई, जिससे आंकड़ा बढ़कर 40.46% तक पहुंच सका.
40.46% वोट पर किसके सिर सजेगा ताज?
कम वोटिंग टर्नआउट के बीच अब उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है. नॉर्थ कैंपस के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित मल्टीपर्पज हॉल में वोटों की गिनती जारी है.
एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों ही इस कम टर्नआउट में अपने-अपने कैडर वोट बैंक के दम पर 4-0 से क्लीन स्वीप का दावा कर रहे हैं. हालांकि, राजनीति के जानकारों का मानना है कि जब-जब वोटिंग प्रतिशत गिरता है, तब-तब किसी भी अप्रत्याशित नतीजे की गुंजाइश बढ़ जाती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क