देश की राजधानी दिल्ली में छात्र राजनीति और लोकतंत्र के बड़े मुद्दों पर एक ऐतिहासिक और विशाल जुटान देखने को मिला है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के 'अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ' अभियान के तहत आयोजित इस राष्ट्रीय महाजुटान में देश भर से 15 हजार से अधिक विद्यार्थी और निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारी शामिल हुए.
दिल्ली, पंजाब, लद्दाख, उत्तराखंड, ओडिशा, असम और पूर्वोत्तर के विभिन्न परिसरों से आए युवा नेताओं ने एक स्वर में यह स्पष्ट कर दिया कि भारत का युवा राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता के बजाय संविधान, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक गरिमा के साथ मजबूती से खड़ा है.
'लोकतंत्र सिर्फ सत्ता प्राप्ति का जरिया नहीं'
आयोजन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए देश भर से पहुंचे छात्रसंघ अध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र की ताकत हो सकती है, लेकिन सिर्फ अपने राजनीतिक लाभ के लिए देश की निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर बिना किसी पुख्ता प्रमाण के अविश्वास का माहौल बनाना बेहद खतरनाक और निंदनीय है.
इस महाजुटान में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) के अध्यक्ष यश डबास, सचिव रिया छावड़ी, पंजाब यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष अंकित भिदान, उत्कल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष अभिराम, और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के मानस प्रतिम कलिता सहित कई दिग्गज छात्र नेता मौजूद रहे.
विपक्षी दल पर की प्रतिक्रिया
प्रेस को संबोधित करते हुए अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने विपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि विपक्ष या राहुल गांधी को निर्वाचन प्रक्रिया पर कोई आपत्ति है, तो उन्हें हवा में आरोप लगाने के बजाय सबूतों के साथ संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए. केवल राजनीतिक मंचों से बयानबाजी कर जनता के विश्वास को कमजोर करना उचित नहीं है.
डॉ. सोलंकी ने विदेशी परिस्थितियों (जैसे बांग्लादेश और नेपाल) से भारत के लोकतंत्र की तुलना करने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र अपनी मजबूत ऐतिहासिक चेतना, अटूट संस्थागत व्यवस्थाओं और जनता की गहरी आस्था पर टिका है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी को घेरते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों पर 'स्मैश द पैट्रियार्की' या महिला अधिकारों की बात करने वालों को पहले अपने संगठन के भीतर महिलाओं को वास्तविक निर्णायक नेतृत्व और पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए.
छात्र नेताओं का संयुक्त संदेश: अराजकता स्वीकार्य नहीं
देशभर के निर्वाचित छात्र नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में दो टूक कहा कि परिसरों और देश के भीतर भ्रम, अविश्वास व अराजकता का वातावरण किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं किया जा सकता. यदि चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी को कोई भी शिकायत है, तो उसके समाधान के लिए देश के संविधान और कानून में पहले से ही मजबूत संस्थागत व्यवस्थाएं मौजूद हैं.
छात्र प्रतिनिधियों ने यह संदेश साफ कर दिया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्रियां बांटने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह देश के भावी और जिम्मेदार नेतृत्व के निर्माण की भूमि हैं और आज का युवा देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने वाली ताकतों को कभी कामयाब नहीं होने देगा.
आजतक एजुकेशन डेस्क