इंडियन करेंसी पर गांधी जी की फोटो से पहले क्या छपता था? जानें पूरी कहानी

भारत को 1947 में आजादी मिल चुकी थी, लेकिन भारतीय करेंसी से ब्रिटिश छाप तुरंत मिट नहीं सकी. नया भारत अपनी अलग पहचान बनाने की प्रक्रिया में था और कॉलोनियल हैंगओवर समाज, प्रशासन और करेंसी तीनों में नजर आता था.

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साल 1949 में भारतीय करेंसी पर पहली बड़ी बदलाव हुआ (Photo:Pixabay) साल 1949 में भारतीय करेंसी पर पहली बड़ी बदलाव हुआ (Photo:Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:56 AM IST

डिजिटल इंडिया के दौर में भले यूपीआई ने कैश के इस्तेमाल को कम कर दिया हो, लेकिन भारतीय करेंसी पर छपे महात्मा गांधी के मुस्कुराते चेहरे की अहमियत आज भी उतनी ही है. हर भारतीय इन नोटों को पहचानता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आज़ादी के तुरंत बाद भारतीय नोटों पर गांधी जी की तस्वीर नहीं थी. उस समय करेंसी पर ब्रिटिश राजा किंग जॉर्ज सिक्स की फोटो छपती थी. यह बदलाव कब हुआ, गांधी जी की तस्वीर क्यों चुनी गई और यह फोटो कहां की है, यही पूरी कहानी आज समझते हैं.

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भारत को 1947 में आज़ादी जरूर मिल गई थी, लेकिन भारतीय करेंसी से ब्रिटिश प्रभाव तुरंत खत्म नहीं हुआ. 1947 से 1949 तक नोटों पर किंग जॉर्ज सिक्स की तस्वीर ही छपती रही. यह वह दौर था जब नया भारत अपनी पहचान तलाश रहा था और कॉलोनियल हैंगओवर अभी बाकी था.

साल 1949 में भारतीय करेंसी पर पहली बड़ी बदलाव हुआ. एक रुपये के नोट से किंग जॉर्ज की तस्वीर हटाई गई और उसकी जगह सारनाथ के अशोक स्तंभ यानी लायन कैपिटल को शामिल किया गया. इसी अवधि में यह प्रस्ताव भी आया कि महात्मा गांधी की तस्वीर को नोटों पर लाया जाए. डिजाइन भी तैयार था, लेकिन अंत में सरकार ने अशोक स्तंभ को ही फाइनल किया क्योंकि वह भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक था.

Photo: Wikimedia

कैसे आई महात्मा गांधी की तस्वीर

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महात्मा गांधी की तस्वीर भारतीय नोटों पर पहली बार 1969 में दिखाई दी. यह वर्ष गांधी जी की जन्म शताब्दी का था और इसी मौके पर एक स्पेशल कमेमोरेटिव सीरीज जारी की गई. इस सीरीज में गांधी जी की तस्वीर के पीछे सेवाग्राम आश्रम का बैकग्राउंड था. हालांकि, यह नियमित करेंसी का हिस्सा नहीं बनी और सीमित अवधि के लिए ही जारी की गई.

1978 की नोटबंदी के बाद भारतीय नोटों की डिजाइनिंग में बदलावा आया. नए नोटों पर भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को जगह मिली. कोणार्क व्हील, मोर और अन्य राष्ट्रीय चिन्ह इसी दौर में नोटों पर आए. इसके बाद 1987 में पहली बार 500 रुपये का नोट जारी किया गया. इस नोट पर गांधी जी की तस्वीर थी, लेकिन वाटरमार्क अब भी अशोक स्तंभ का ही था.

90 के दशक में नकली नोटों का खतरा तेजी से बढ़ रहा था. पुराने सुरक्षा फीचर कमजोर साबित हो रहे थे. इसी कारण 1996 में भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नई करेंसी सीरीज लॉन्च की, जिसे ‘महात्मा गांधी सीरीज़’ नाम दिया गया. इसमें बदला हुआ वाटरमार्क, साइड में मैटेलिक स्ट्रिप, लेटेंट इमेज और दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए उभरी हुई प्रिंट जैसे नए सिक्योरिटी फीचर शामिल किए गए. यही सीरीज आगे चलकर भारतीय करेंसी की स्थायी पहचान बन गई.

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यह फोटो कब और कहां ली गई थी?

आज भारतीय नोटों पर छपी गांधी जी की तस्वीर कोई पेंटिंग या स्केच नहीं है. यह 1946 में ली गई एक असली फोटोग्राफ का कट-आउट है. इस फोटो में गांधी जी लॉर्ड फ्रेडरिक विलियम पैथिक लॉरेंस के साथ खड़े मुस्कुरा रहे थे. रिजर्व बैंक ने इसे नोटों पर छापने के लिए सबसे परफेक्ट और स्वाभाविक तस्वीर माना. महात्मा गांधी सत्य, अहिंसा और एकता के प्रतीक हैं, इसलिए उनकी तस्वीर को भारतीय मुद्रा का प्रमुख चेहरा बनाया गया.

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