जेजू आईलैंड... जहां जाकर फंस जाते हैं भारतीय पर्यटक! वहां रहने की हैं ये अजीब शर्तें

साउथ कोरिया से सटा एक आईलैंड है, जहां जाने पर अक्सर भारतीय टूरिस्ट फंस जाते हैं. इस द्वीप का नाम जेजू आईलैंड है, यह यूनेस्को के वर्ल्ड हैरिटेज साइट में शामिल है और कई मायनों में अनोखा भी है. अगर लोग उस द्वीप पर जाने के नियम और शर्तों से अनजान हैं तो वहां जाने पर उन्हें काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है.

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जेजू आईलैंड सैकड़ों रेयर प्रजातियों के जीव-जंतुओं का घर है (Photo - Pexels) जेजू आईलैंड सैकड़ों रेयर प्रजातियों के जीव-जंतुओं का घर है (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि एक भारतीय इंफ्लुएंसर दक्षिण कोरिया के पास एक द्वीप पर फंस गया है. उसे वहां बेवजह 38 घंटे तक हिरासत में रखा गया और अपराधियों की तरह व्यवहार किया गया. इस द्वीप का नाम 'जेजू द्वीप' है. इंफ्लुएंसर की खबर वायरल होने के बाद साउथ कोरिया स्थित भारतीय दूतावास को 'जेजू द्वीप' जाने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी करनी पड़ी. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये जेजू आईलैंड चीज क्या है, जहां जाने पर भारतीय टूरिस्ट फंस जाते हैं. 

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जेजू आईलैंड एक ज्वालामुखी द्वीप है, जिसका निर्माण लगभग दो मिलियन वर्ष पूर्व हुआ था. यूनेस्को में साइट पर इसका एक बायोस्फेयर (जैवमंडल) रिजर्व के तौर पर जिक्र किया गया है. यह कोरियाई प्रायाद्वीप के दक्षिण भाग में स्थित प्राकृतिक संसाधनोंऔर जैव विविधता से भरा खूबसूरत द्वीप है. यहां पाए जाने वाली रेयर और अनोखी प्रजातियां इस द्वीप के इकोसिस्टम को रेयरेस्ट बनाता है.

यह समुद्र तल से 1,950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक ज्वालामुखी वाले लावा पठार को कवर करता है. यहां का बायोडायवर्सिटी अभयारण्य द्वीप के सेंटर में स्थित है. इसके प्रमुख इलाकों में माउंट हाल्ला राष्ट्रीय उद्यान, दो जलधारा गलियारे और तीन छोटे द्वीप शामिल हैं. जेजू द्वीप में अनेक प्रजातियां निवास करती हैं. जेजू द्वीप के प्रमुख उद्योग पर्यटन, कृषि और पशुपालन हैं.

इसका अनूठा बायोडायवर्सिटी है मुख्य आकर्षण
इस द्वीप के बायोस्फेयरिक इलाके में चार प्रमुख इकोसिस्टम है. इनमें अल्पाइन शंकुधारी वन, शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले वन, गर्म शीतोष्ण सदाबहार ल्यूसिडोफिल वन और शीतोष्ण घास के मैदान शामिल हैं. 

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राष्ट्रीय उद्यान के रूप में संरक्षित मुख्य इलाका जेजू द्वीप के केंद्र में स्थित है. जेजू द्वीप में कई लुप्तप्राय पौधे और जीव निवास करते हैं. जेजू द्वीप में कोरियाई मूल के पौधों की 134 प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से 90 प्रजातियां जेजू की मूल प्रजातियां हैं. विशेष रूप से, कोरिया या जेजू के मूल के पौधों की 28 प्रजातियाँ माउंट हलासान के शिखर के आसपास पाई जाती हैं.

कई विलुप्त प्रजातियों का घर है जेजू आईलैंड
यूनेस्को की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, ग्लोबल टेंप्रेचर में वृद्धि के कारण इन प्रजातियों को संरक्षित करना आवश्यक है. यह पाए जाने वाले जीव-जंतुओं की कुल 103 प्रजातियां हैं.  इनमें तेंदुआ बिल्ली (प्रियोनाइलुरस बेंगालेंसिस), डैम्सेलफिश (क्रोमिस नोटाटा) और जेजू घोड़ा शामिल हैं, जो जेजू द्वीप की मूल निवासी घोड़े की नस्ल है.

इस द्वीप पर हरे समुद्री कछुए (Chelonia mydas japonica), काले चेहरे वाले स्पूनबिल (Platalea minor) और स्टेलर समुद्री शेर (Eumetopias jubatus) जैसी लुप्तप्राय प्रजातियां भी पाई जाती हैं. जेजू द्वीप एकमात्र ऐसा स्थान है जहां चार अंतरराष्ट्रीय धरोहर साइट एक ही जगह पर हैं. इनमें जेजू वोलकेनिक आईलैंड और लावा ट्यूब वर्ल्ड हैरिटेज साइट , जेजू द्वीप बायोस्फेयर रिजर्व, जेजू द्वीप यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क और 2 रामसर वेटलैंड साइट मौजूद हैं.एक वेटलैंड मुलजांगोरी और दूसरा ओरेउम यहीं है.

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जेजू द्वीप के निवासियों की नस्लीय पृष्ठभूमि कोरिया की मुख्य भूमि के निवासियों से बहुत अलग नहीं है. हालांकि, एक अलग-थलग द्वीप होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति ने इसकी अपनी विशिष्ट बोली, संस्कृति और रीति-रिवाजों को विकसित किया है. इस बायोस्फेयर रिजर्व में लगभग 20,000 निवासी रहते हैं.

अनोखी है यहां की हेन्यो संस्कृति
जेजू द्वीप के प्रमुख उद्योगों में पर्यटन, कृषि और मत्स्य पालन शामिल हैं. इसके अलावा, जेजू द्वीप में 434 ईस्वी से चली आ रही हेन्यो (समुद्री महिलाएं) नामक गोताखोरी की परंपरा है. हेन्यो कोरिया का एकमात्र पारंपरिक व्यवसाय है जिसमें बिना किसी मशीनरी उपकरण के समुद्र में समुद्री भोजन पकड़ा जाता है. हेन्यो का जीवन चक्र 15 वर्ष की आयु से शुरू होता है और तब तक चलता है जब तक वे समुद्र में स्वतंत्र रूप से घूमने में असमर्थ नहीं हो जातीं.

सेवानिवृत्त होने के बाद, वे समुद्री बुद्धिजीवियों और समुद्री संसाधनों की रक्षा करने वाले रक्षकों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. 2010 तक, जेजू द्वीप में 4,996 हेन्यो रहती थीं. हालांकि, अब सभी बुजुर्ग हो चुकी हैं. अन्य उद्योगों में आर्थिक विकास के अनुरूप उत्तराधिकारियों की कमी के कारण, हेन्यो विलुप्त होने के कगार पर हैं. अत: हेन्यो संस्कृति के संरक्षण की नीति स्थापित करना आवश्यक है.

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अभी हाल में ही सियोल स्थित इंडियन एंबेसी ने जेजू द्वीप को लेकर एडवाइजरी जारी की है,  जिसमें वहां जाने की शर्तों और निर्देश का जिक्र है. एडवाइजरी में कहा गया है कि समय-समय पर, सियोल स्थित भारतीय दूतावास को दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप की यात्रा के लिए वीजा फ्री प्लान के तहत भारतीय यात्रियों को होने वाली असुविधाओं या आगमन पर प्रवेश या वापसी से इनकार किए जाने की सूचना मिलती रहती है.

 ऐसी संभावनाओं को कम करने के लिए जेजू द्वीप की यात्रा की प्लानिंग कर रहे भारतीय नागरिकों को कुछ बातों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है. इसके तहत जेजू में वीजा फ्री सुविधा के तहत प्रवेश केवल अल्पकालिक पर्यटन के लिए ही है. वहां से कोरिया  में प्रवेश का निर्णय कोरियाई कानून के अनुसार जेजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमीग्रेशन अधिकारियों द्वारा ही किया जाता है. वीज़ा फ्री प्लान वहां प्रवेश की गारंटी नहीं देता है. 

एडवायजरी में ये भी कहा गया है कि जेजू आने के लिए यहां के वीजा फ्री कार्यक्रम की शर्तों को समझना जरूरी है.  जेजू वीजा फ्री स्कीम के तहत वहां से कोरिया के मेनलैंड की यात्रा की अनुमति नहीं है. यानी आप बिना वीजा के सिर्फ जेजू आईलैंड आ सकते हैं, वहां से दक्षिण कोरिया नहीं जा सकते.

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 बिना वीज़ा के जेजू से कोरिया की मुख्य भूमि जाने का प्रयास करना अवैध है. साथ ही निर्धारित समय से अधिक समय तक रुकना या अनधिकृत गतिविधि के परिणामस्वरूप भविष्य में यात्रा प्रतिबंध लग सकते हैं. यदि वहां प्रवेश से इनकार कर दिया जाता है, तो यात्री को उसी एयरलाइन की अगली उपलब्ध उड़ान से वापस भेज दिए जाएंगे.

सियोल स्थित भारतीय दूतावास दक्षिण कोरिया में प्रवेश से संबंधित मामलों में दक्षिण कोरिया के इमीग्रेशन ऑथरिटी के निर्णयों को पलटने की स्थिति में नहीं है. इसलिए हिरासत में रखे गए भारतीय नागरिकों को उचित सहायता प्रदान करने के लिए दूतावास दक्षिण कोरिया के अधिकारियों से सहयोग मांग सकता है. 

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