स्टैनफोर्ड-एमआईटी की डिग्री न होने पर मिला रिजेक्शन, 6 महीने बाद भारतीय इंजीनियर ने कर दिखाया कमाल

बड़ी-बड़ी कंपनियां कई बार केवल उन कॉलेजों के बच्चों को ही मौका देती हैं जो नामी हों. ऐसा ही एक घटना भारतीय छात्र के साथ भी हुई. एक सिंपल कॉलेज के छात्र को केवल इसलिए नौकरी नहीं मिली क्योंकि उसके पास स्टैनफोर्ड, एमआईटी या आइवी लीग जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं थी. लेकिन सिर्फ छह महीने बाद उसे एक ऐसे प्लेटफॉर्म में बैकएंड इंजीनियर की नौकरी मिल गई, जो 4 करोड़ से ज्यादा यूज़र्स को सेवा देता है.  इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि टेक इंडस्ट्री में हायरिंग डिग्री के आधार पर होनी चाहिए या असली स्किल पर. 

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US Company Rejected Indian Techie Amed College Degree US Company Rejected Indian Techie Amed College Degree

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:46 AM IST

कई बार जब आप बड़ी कंपनियों में इंटरव्यू के लिए जाते हैं, तो आपको आपकी स्किल पर नहीं बल्कि बड़े कॉलेजों की डिग्री पर आका जाता है. ये सुनने में थोड़ा हैरान कर देने वाला जरूर है लेकिन सच है. ऐसा ही मामला एक भारतीय टेक्नीशियन के सामने आया है. उन्होंने लिंक्डइन पर पोस्ट कर इन घटनाओं के बारे में बताया है. उन्होंने लिखा कि टेक इंडस्ट्री में अक्सर एमआईटी, स्टैनफोर्ड और आइवी लीग जैसी बड़ी यूनिवर्सिटियों की डिग्री को सफलता और नौकरी पाने के आसान रास्ते की तरह देखा जाता है. कई स्टार्टअप्स में कॉलेज का नाम भी उतना ही महत्व रखता है जितना किसी व्यक्ति का स्किल और अनुभव. लेकिन हाल ही में लिंक्डइन पर वायरल हुई एक पोस्ट ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसने बहस शुरू कर दी है कि क्या कंपनियां सिर्फ बड़ी डिग्रियों पर ध्यान देकर कई प्रतिभाशाली और योग्य लोगों को नजरअंदाज कर रही हैं. 

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पोस्ट में क्या बताया? 

दिल्ली की रहने वाली पेशेवर मेघा गुप्ता की ओर से शेयर की गई पोस्ट में बताया गया है कि कैसे एक टियर-2 कॉलेज के एक युवा इंजीनियर को इसलिए अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि उसके पास सही शैक्षणिक पृष्ठभूमि का अभाव था. लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनकी कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. उनकी सफलता की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई और एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि क्या किसी व्यक्ति की असली क्षमता और प्रतिभा का अंदाजी सिर्फ उसके कॉलेज के नाम से लगाया जा सकता है. 

इंटर्नशिप की तलाश में था उम्मीदवार 

मेघा की पोस्ट के मुताबिक, एक टियर 2 कॉलेज के छात्र ने इंटर्नशिप के अवसर की तलाश में एक भारतीय स्टार्टअप के संस्थापक से कनेक्ट किया. उसके बाद उसे जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. संस्थापक ने उनसे कहा कि कंपनी केवल स्टैनफोर्ड, एमआईटी या आइवी लीग जैसे कॉलेजों से ही हायरिंग करती है. 

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6 महीने बाद ही आया बदलाव 

लेकिन कहते हैं न कई बार आपका गुरूर ही आपको तोड़ देता है. छह महीने बाद उसी संस्थापक ने लिंक्डइन पर एक किया. गुप्ता की पोस्ट के अनुसार, संस्थापक ने लिखा कि कंपनी अच्छे इंजीनियरों को खोजने के लिए संघर्ष कर रही है और उन्होंने सुझाव दिया कि प्रतिभा की कमी है. इसी बीच जिस उम्मीदवार को पहले अस्वीकार कर दिया गया था, उसे 40 मिलियन से अधिक यूजर्स को सेवा प्रदान करने वाली कंपनी में बैकएंड इंजीनियर के रूप में नौकरी मिल गई. ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. 

यूजर्स ने दी सलाह 

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर प्रतिक्रिया दी है. कई लोगों का ऐसा मानना है कि बड़ी यूनिवर्सिटियां बेहतरीन छात्र तैयार करती हैं, लेकिन प्रतिभा सिर्फ वहीं से नहीं आती. एक अच्छा इंजीनियर असली अनुभव, लगातार सीखने की इच्छा और कठिन समस्याओं को हल करने की क्षमता से बनता है. वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को पहचानना है, जिनकी क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है.
 

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