बॉस से प्रमोशन की जगह ले ल‍िया ड‍िमोशन... सिल‍िकॉन वैली के इंजीन‍ियर ने बताई चौंकाने वाली वजह!

क्या बड़ा पद और मोटी सैलरी ही कामयाबी की गारंटी है? Meta के पूर्व सीनियर इंजीनियर फिलिप सु की कहानी इस सोच पर करारा तमाचा है. सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचने के बाद जब काम का तनाव बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो उन्होंने खुशी-खुशी डिमोशन स्वीकार कर ली. पढ़िए यह खास रिपोर्ट, जो बताती है कि कॉर्पोरेट की इस अंधी दौड़ में आखिर असली जीत किसे कहते हैं.

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 Former Meta engineer explains why he asked for a demotion at peak of career (Image courtersy: Philip Su/Linkedln) (AI enhanced image) Former Meta engineer explains why he asked for a demotion at peak of career (Image courtersy: Philip Su/Linkedln) (AI enhanced image)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

कॉर्पोरेट की दुनिया में हर कोई बस एक ही रेस में भागा जा रहा है. हर क‍िसी को प्रमोशन और सैलरी हाइक चाह‍िए . बड़ा पद, बड़ी केबिन, भारी-भरकम सैलरी और वो रुतबा, जिसे हम और आप कामयाबी मानते हैं. लेकिन ज़रा सोचिए, कोई इंसान करियर के बिल्कुल टॉप पर पहुंचकर खुद कंपनी से कहे कि मुझे प्रमोशन नहीं, डिमोशन दे दो!, तो आप क्या सोचेगे. 

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सुनने में यह पागलपन लग सकता है, लेकिन सिलिकॉन वैली के दिग्गज इंजीनियर फिलिप सु ने ठीक यही किया. Meta और OpenAI जैसी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में सबसे ऊंचे पद यानी IC9 (डिस्टिंग्विशड इंजीनियर) पर काम कर चुके फिलिप ने खुद आगे बढ़कर कंपनी से कहा कि उन्हें डिमोट करके नीचे वाले पद (IC7) पर भेज दिया जाए.

जब दुनिया प्रमोशन के पीछे अंधी होकर भाग रही है, तब फिलिप के इस एक फैसले ने पूरी कॉर्पोरेट दुनिया को हिलाकर रख दिया है. जान‍िए क्या है इसकी वजह... 

जब 'प्रमोशन' खुशी नहीं, बल्कि जी का जंजाल बन गया

एक हालिया पॉडकास्ट में फिलिप ने इस फैसले के पीछे की कड़वी सच्चाई से पर्दा उठाया. उन्होंने बताया कि जब करियर की शुरुआत हुई थी, तो हर प्रमोशन पर बहुत खुशी मिलती थी. लगता था कि मेहनत का फल मिल रहा है. लेकिन जैसे-जैसे वे सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचे, प्रमोशन का वो रोमांच गायब हो गया.

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उनकी जगह ले ली अंतहीन उम्मीदों और कभी न खत्म होने वाले तनाव ने!

फिलिप कहते हैं कि Meta में सबसे टॉप लेवल पर पहुंचने के बाद उन्हें ऐसा लगता था मानो 24 घंटे उन पर किसी की सख्त और पैनी नजर टिकी हुई है. हर दिन, हर मिनट खुद को साबित करने का दबाव! स्थिति यह हो गई कि अपनी पूरी जान लगाने के बाद भी उन्हें लगता था कि वे इस पद के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं. इस घुटन से बचने के लिए उन्होंने आखिरकार डिमोशन का रास्ता चुना.

खुद मांगा डिमोशन, तो जूनियर निकल गए आगे

प्रमोशन तो सब आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन डिमोशन मांगना इतना आसान नहीं होता. फिलिप बताते हैं कि जब उन्होंने खुद को नीचे के पद पर डिमोट कराया, तो मानसिक रूप से एक अलग तरह की चुनौती सामने आई.

जिन लोगों को कभी उन्होंने खुद ट्रेन किया था, जो कल तक उनके जूनियर थे, वे प्रमोशन पाकर उनसे आगे निकल गए. यह देखना और पचाना आसान नहीं था. लेकिन फिलिप कहते हैं कि इस डिमोशन ने उन्हें वो शांति और सुकून वापस लौटा दिया, जो वे खो चुके थे. अब वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी पसंद का काम कर पा रहे थे.

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माइक्रोसॉफ्ट से लेकर अमेजन में डिलीवरी बॉय तक का सफर

फिलिप सु का करियर ट्रैक किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. वो बताते है कि कैसे शुरुआत में माइक्रोसॉफ्ट में सीनियर इंजीनियर से लेकर प्रिंसिपल ग्रुप मैनेजर तक रहे.

वो कभी फेसबुक लंदन के बॉस थे, वो Meta (फेसबुक) के लंदन इंजीनियरिंग ऑफिस के डायरेक्टर रहे. साल 2021 में उन्होंने सबको हैरान करते हुए अमेजन के वेयरहाउस में एक सामान्य डिलीवरी/पैकिंग वर्कर (फुलफिलमेंट सेंटर एसोसिएट) के रूप में एक महीना बिताया.

फ‍िर 2023 से 2025 के बीच वे ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के सिएटल ऑफिस के हेड रहे. आज वे अपनी खुद की कंपनी 'Superphonic' के फाउंडर और सीईओ हैं.

प्रमोशन की इस अंधी दौड़ में असली सवाल क्या है?

फिलिप सु का यह फैसला आज हर उस इंसान के लिए एक बड़ा सबक है जो सुबह से शाम तक सिर्फ अगले प्रमोशन और बड़ी सैलरी के पीछे अपनी नींद और दिमागी सुकून नीलाम कर रहा है.

फिलिप एक सीधा सा सवाल पूछते हैं कि जिस अगले पद या प्रमोशन के पीछे आप भाग रहे हैं, सोचिए कि वहां पहुंचने के बाद आप क्या करेंगे? वो कहते है कि प्रमोशन पाना बुरा नहीं है, लेकिन अगर वो प्रमोशन आपकी दिमागी शांति छीन ले, आपको अपने ही काम से नफरत करने पर मजबूर कर दे, तो उस मुकाम पर बने रहने से बेहतर है एक कदम पीछे हट जाना. क्योंकि असली कामयाबी पद के नाम से नहीं, बल्कि मानसिक सुकून से तय होती है.

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