पहाड़ों में मैगी और चाय बेचकर ऑफ सीजन में होती है हजारों की कमाई! छोटा बिजनेस लेकिन धांसू है बिक्री

सोचिए अगर ऑफ सीजन में आपकी रोज की बिक्री 14 से 15 हजार रुपये हो रही है, तो आप महीने का कितना कमा लेते होंगे. ये सुनने में हैरान कर देने वाला है लेकिन रोहतांग के पास एक मैगी का स्टॉल लगाने वाले कारोबारी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. लेकिन क्यों चलिए जानते हैं. 

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चाय-मैगी बेचकर होती है तगड़ी कमाई. चाय-मैगी बेचकर होती है तगड़ी कमाई.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:51 AM IST

पहाड़ों पर घूमने जाने वाले लोगों के लिए मैगी और चाय का स्वाद सफर का हिस्सा बन जाता है. ठंडे मौसम में गर्मागर्म मैगी की एक प्लेट मिल जाए तो पर्यटक अक्सर रुककर इसका मजा लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पहाड़ों में सड़क किनारे मैगी बेचने वाला दुकानदार एक दिन में कितनी कमाई कर सकता है? हिमाचल प्रदेश के रोहतांग पास पर एक मैगी विक्रेता की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है.

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दावा है कि ऑफ सीजन में भी उसकी दुकान पर रोजाना करीब 14 से 15 हजार रुपये की बिक्री हो जाती है. हालांकि, इस रकम को मुनाफा समझना सही नहीं होगा क्योंकि इसमें सामान लाने और दुकान चलाने का खर्च भी शामिल है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक टूरिस्ट ने वीडियो शेयर किया है. 

रोज बिकती हैं मैगी की 60-70 प्लेट और 200 कप चाय

कंटेंट क्रिएटर हर्ष चौहान रोहतांग पास घूमने के लिए गए थे. इस दौरान उन्होंने वहां मैगी बेचने वाले एक दुकानदार से उसके कारोबार के बारे में बातचीत की. हर्ष ने जब उससे पूछा कि कितनी बिक्री हो जाती है? तो दुकानदार ने कहां कि अभी तो ऑफ सीजन चल रहा है. तब उन्होंने दूसरा सवाल किया कि ऑफ सीजन में भी दुकान पर कितनी बिक्री हो जाती है. तब दुकानदार ने बताया कि वह रोजाना करीब 60 से 70 प्लेट मैगी बेचता है.

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एक प्लेट की कीमत 100 रुपये है. इसके अलावा रोज लगभग 200 कप चाय की बिक्री होती है जिसकी कीमत 40 रुपये प्रति कप है. दुकान पर अंडों के ऑर्डर भी आते हैं, हालांकि उनकी संख्या कम रहती है.

ऐसे बनता है 14 से 15 हजार रुपये का रोजाना टर्नओवर

दुकानदार की बताई बिक्री के हिसाब से मैगी की 60 से 70 प्लेट बेचने पर रोजाना 6,000 से 7,000 रुपये मिलते हैं. वहीं, 200 कप चाय की बिक्री से करीब 8,000 रुपये आते हैं. इस तरह दोनों को मिलाकर रोजाना की अनुमानित बिक्री 14,000 से 15,000 रुपये तक पहुंच जाती है. इसमें अंडों की बिक्री से होने वाली रकम शामिल नहीं की गई है. हर्ष चौहान ने सोशल मीडिया पर इस बातचीत का वीडियो शेयर करते हुए बताया कि यह आंकड़ा ऑफ सीजन का है. ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जब पर्यटकों की संख्या बढ़ती होगी, तब इस दुकान का कारोबार कितना होता होगा.

कमाई के पीछे मेहनत और खर्च भी कम नहीं

इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने कारोबार की बिक्री के साथ-साथ वहां काम करने की चुनौतियों पर भी चर्चा की. कई लोगों ने कहा कि रोहतांग पास जैसी जगह पर सामान पहुंचाना आसान नहीं है. मैगी, चाय, अंडे और गैस सिलेंडर जैसी चीजों को मनाली से ऊपर तक लाने में ट्रांसपोर्ट का खर्च लगता है.

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वहीं, कुछ यूजर्स ने यह भी बताया कि पानी दूर से लाना पड़ता है और ठंड तथा हवाओं के बीच यह काम करना पड़ता है. ऐसे मौसम में खाना तैयार करने के लिए गैस की खपत भी बढ़ सकती है. एक यूजर ने दावा किया कि सामान को मनाली से दुकान तक पहुंचाने में करीब 2,000 रुपये खर्च होते हैं. हालांकि, यह खर्च भी सोशल मीडिया पर किए गए दावे पर आधारित है.

छोटा कारोबार भी बन सकता है कमाई का जरिया

हर्ष चौहान ने इस बातचीत के जरिए यह बताने की कोशिश की कि कारोबार छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि उसकी जगह, ग्राहकों की जरूरत और काम करने के तरीके से उसकी संभावनाएं तय होती हैं. रोहतांग पास पर मैगी और चाय की दुकान इसका एक उदाहरण है. हालांकि, रोजाना 14 से 15 हजार रुपये की बिक्री का मतलब उतना ही मुनाफा होना नहीं है. दुकानदार के वास्तविक खर्च और बचत की जानकारी सामने नहीं आई है.

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