जब राहिनी 10वीं कक्षा में थीं, तभी उन्होंने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की ठानी थी. इसी सोच के साथ साल 2024 में उन्होंने सिर्फ 6 महिलाओं के साथ 'सूत्रधार' नाम की पहल की शुरुआत की. विचार बेहद सीधा और असरदार था, वो था कि महिलाओं को उनके घर पर ही हुनर सिखाया जाए और उस हुनर को सीधी कमाई से जोड़ दिया जाए.
राहिनी खासतौर पर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं और बेटियों को सिलाई, कढ़ाई और बुनाई की ट्रेनिंग देती हैं. इसके बाद कपड़ा उद्योग (टेक्सटाइल इंडस्ट्री) से बेकार फेंके जाने वाले कतरन को इन महिलाओं तक पहुंचाया जाता है, जिसे वे शर्ट और अन्य उपयोगी सामानों में तब्दील कर देती हैं.
यह मॉडल एक साथ दो बड़े मसलों को हल करता है, पहला- महिलाओं को रोज़गार देना, और दूसरा बेकार हो चुके कपड़ों का सही इस्तेमाल करना (वेस्ट मैनेजमेंट). 'सूत्रधार' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि महिलाओं को काम के लिए किसी फैक्ट्री नहीं जाना पड़ता. वे अपनी सुविधा के मुताबिक घर पर ही रोज़ कुछ घंटे काम करती हैं.
इस काम के जरिए महिलाएं हर महीने 4,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक कमा रही हैं. कई महिलाओं के लिए यह कमाई उनके आर्थिक रूप से आजाद होने की पहली सीढ़ी साबित हुई है.
एक कमाई, जिसने बदल दी परिवारों की तस्वीर
शोभा (45 वर्ष) का कहना है कि पहले उनके पास आय का कोई ज़रिया नहीं था, लेकिन अब वे अपने बच्चों की बेहतर पढ़ाई में योगदान दे पा रही हैं. वहीं चंदा कहती हैं कि अपनी इस कमाई का इस्तेमाल अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने के लिए कर रही हैं.
प्राची कहती हैं अपनी कमाई से अपनी बी.ए. (BA) की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं और भविष्य में फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हैं. मोनिका बताती हैं कि वो अपने पैसों से अपने भाई की कंप्यूटर ट्रेनिंग की फीस भर रही हैं.
इतना ही नहीं, 'सूत्रधार' से ऐसी महिलाएं भी जुड़ी हैं जिन्होंने अपने जीवन में घरेलू हिंसा का दंश झेला है. अपने पैरों पर खड़े होने से मिली इस आर्थिक आज़ादी ने उन्हें नए सिरे से अपनी ज़िंदगी जीने का हौसला दिया है.
रोज़गार से बढ़कर क्यों है 'सूत्रधार'?
राहिनी की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है. जो कतरन ज़मीन में दफन होकर कचरा बनते, वे आज महिलाओं के हाथों में जाकर काम की चीज़ बन रहे हैं. महज 6 महिलाओं से शुरू हुआ यह सफर आज 250 से ज़्यादा महिलाओं का एक सशक्त परिवार बन चुका है.
महज़ 17 साल की राहिनी, जो खुद अभी 12वीं की छात्रा हैं, उनके लिए यह विचार तीन चीज़ों का अनोखा संगम है हुनर, कमाई और कचरे की रीसाइक्लिंग. राहिनी की ओर से इकट्ठा किए गए कपड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े सिर्फ नए उत्पाद नहीं बना रहे, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के जीवन को स्वाभिमान और एक बेहतर भविष्य की उम्मीद दे रहे हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क