'रात 12 से 5 र‍िसेप्शन‍िस्ट का काम करके भरी Yale की फीस' पेप्सिको की पूर्व CEO ने बताई कहानी

जब पेप्सिको की पूर्व CEO इंद्रा नूयी 1970 के दशक के आखिर में येल यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएट-लेवल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के लिए US आईं, तो वह खुद को भारत से आई एक मिसफिट मानती थीं. कॉलेज की लाइफ के हिसाब से ढलने के बजाय, नूयी अपनी डिग्री के लिए पेमेंट करने के लिए हर सुबह क्लास जाने से पहले आधी रात से सुबह 5 बजे तक डॉरमेट्री रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं.  

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पेप्सिको की पूर्व CEO. (Photo: Getty Images) पेप्सिको की पूर्व CEO. (Photo: Getty Images)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:10 AM IST

आज दुनिया की बड़ी कंपनियों में नेतृत्व कर चुकीं इंद्रा नूयी के करियर की शुरुआत आसान नहीं थी. पेप्सिको की पूर्व CEO जब अमेरिका में पढ़ाई करने पहुंचीं, तब उन्हें अपनी शिक्षा का खर्च उठाने के लिए रात में नौकरी करनी पड़ती थी. वह Yale University में पढ़ाई के दौरान एक हॉस्टल में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं. उनकी शिफ्ट आधी रात से सुबह 5 बजे तक होती थी और इसके बाद वह क्लास में जाती थीं. अपनी इस जर्नी के बारे में  उन्होंने Fortune  के साथ खुलकर बातचीत की है. तो चलिए जानते हैं कि एक पद तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया है. 

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आज इंद्रा नूयी के पास NYU, ड्यूक और येल समेत एक दर्जन से ज्यादा मानद डिग्रियां हैं. वह Amazon, Honeywell और Philips जैसी कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं. Forbes के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 340 मिलियन डॉलर यानी लगभग 3,000 करोड़ रुपये है.

पढ़ाई के साथ नौकरी करना थी मजबूरी

Fortune की रिपोर्ट के मुताबिक, इंद्रा नूयी 1970 के दशक के आखिर में भारत से अमेरिका पढ़ाई करने के लिए गई थीं. लेकिन इस दौरान उन्हें ये नहीं पता था कि Yale में मैनेजमेंट की पढ़ाई के समय उनका सामना आर्थिक चुनौती से भी होगा. उस समय उनके माता-पिता उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं थे लेकिन अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी करने का भी फैसला किया.

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रिपोर्ट के अनुसार, उस दौर में Yale की सालाना ट्यूशन फीस आज की कीमतों के हिसाब से करीब 20,000 डॉलर यानी लगभग 20 लाख रुपये के बराबर थी. नूयी ने बताया कि उनका और उनके जैसे दूसरे अंतरराष्ट्रीय छात्रों का लक्ष्य साफ था- पढ़ाई करना, अच्छे अंक लाना और आगे बढ़ने के लिए नौकरी हासिल करना. 

रात में काम, सुबह पढ़ाई

इंद्रा नूयी ने बताया कि वह रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक हॉस्टल में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थीं. इसके बाद उन्हें क्लास में जाना होता था. उन्होंने अपनी छात्र जीवन की चुनौतियों को याद करते हुए कहा कि वह और उनके साथ पढ़ने वाले कई छात्र सामाजिक गतिविधियों के बजाय पढ़ाई और करियर पर ध्यान देते थे. नूयी के मुताबिक, जब उन्हें और उनके साथियों को आगे चलकर कंसल्टिंग और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग जैसी नौकरियां मिलीं, तो लोगों ने उनकी मेहनत को पहचाना. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई और काम संभालने के उनके प्रयासों से लोगों के बीच उनके प्रति सम्मान बढ़ा. 

Yale से PepsiCo के CEO तक का सफर

1980 में येल से पब्लिक और प्राइवेट मैनेजमेंट में डिग्री के साथ ग्रेजुएट होने के बाद, नूयी ने कॉर्पोरेट सीढ़ी पर चढ़ना शुरू किया. उन्होंने जॉनसन एंड जॉनसन , बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और मोटोरोला जैसी कंपनियों में अलग-अलग मैनेजमेंट और स्ट्रेटेजी पोजीशन पर काम किया, और आखिरकार 1994 में पेप्सिको में आ गईं. साल 2001 तक, उन्हें चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और 2006 तक CEO बना दिया गया. 

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उस समय, फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से केवल 2% कंपनियों को ही महिलाएं लीड कर रही थीं और उन्हें उन लोगों से मुश्किलों का सामना करना पड़ा जो सवाल उठा रहे थे कि क्या वह इस चुनौती के लिए तैयार हैं. साल 2018 तक उन्होंने कंपनी का नेतृत्व किया. Fortune रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि उनके कार्यकाल में कंपनी की बिक्री में करीब 80 फीसदी बढ़ोतरी हुई. 
 

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