कौन हैं अन्वी भूटानी, ऑक्सफोर्ड छात्रसंघ चुनाव जीतकर बनीं अध्यक्ष, इंडिया से क्या है कनेक्शन

अन्वी भारतीय मूल की हैं. वो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मेगडलेन कॉलेज से मानव विज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं. उन्हें छात्र संघ के बाई इलेक्शन में जीत मिली है.

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अन्वी भूटानी अन्वी भूटानी

aajtak.in

  • लंदन ,
  • 21 मई 2021,
  • अपडेटेड 3:00 PM IST

आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन (SU)के बाइ इलेक्शन यानी उपचुनाव  में मैग्डालेन कॉलेज की छात्रा अन्वी को प्रेसीडेंट चुना गया है. भारतीय मूल की अन्वी मानव विज्ञान की छात्रा हैं, अपनी राजनीतिक जागरूकता को लेकर अन्वी काफी लोकप्रिय हैं. 

ऑक्सफोर्ड एसयू में नस्लीय जागरूकता और समानता (सीआरएई) के सह-अध्यक्ष और ऑक्सफोर्ड इंडिया सोसाइटी की अध्यक्ष अन्वी भूटानी, 2021-22 शैक्षणिक वर्ष के उपचुनाव के लिए मैदान में थी. रिकॉर्ड मतदान के बाद अन्वी ने भारी बहुमत पाया.  गुरुवार रात उन्हें विजेता घोषित किया गया. 

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'चेरवेल' छात्र समाचार पत्र के अनुसार भूटानी ने अपने घोषणापत्र में ऑक्सफोर्ड लिविंग वेज के कार्यान्वयन, कल्याणकारी सेवाओं को अलग करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा पाठ्यक्रम में विविधता लाने के लिए प्रचार की प्राथमिकताओं का विस्तार करना शामिल किया था. जीत हासिल करने के बाद अन्वी ने अपने विजय घोषणा पत्र में कहा कि पाठ्यक्रम को और अधिक विविध बनाने के लिए ऑक्सफोर्ड और उपनिवेशवाद केंद्र जैसी पहलों के साथ काम करने के लिए विद्यार्थी अभियानों से मिले सुझावों का उपयोग किया जाए.

उन्होंने इस घोषणा पत्र में कहा कि मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कार्यक्रमों के लिए अधिक वित्तपोषण के लिए प्रचार करें, विश्वविद्यालय परामर्श सेवाओं तक अधिक पहुंच और कम प्रतीक्षा समय की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए.  समाचार पत्र के मुताबिक उपचुनाव के लिए अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया.

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छात्र समाचार पत्र के अनुसार, उपचुनाव में अब तक का सबसे अधिक मतदान हुआ था, इसमें पिछले कई वार्षिक चुनावों की तुलना में कहीं अध‍िक मतदान हुआ है. इसमें 2,506 लोगों ने मतदान किया था, जो कि 2019 में आखिरी उपचुनाव की तुलना में 146 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कराता है; 

इस बार चुनाव मैदान में ऑक्सफोर्ड एसयू के प्रेसीडेंट इलेक्शन में अब तक के सबसे अधिक उम्मीदवार थे, जिसमें 11 छात्र इस पद की होड़ पर थे. ये उपचुनाव भारतीय छात्र रश्मि सामंत के इस्तीफे के बाद हुआ, जिन्हें फरवरी में अपने पिछले सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद के बीच पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

 

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