हरियाणा कैडर के सीनियर अधिकारी डी सुरेश रिटायमेंट के पांच दिन पहले ही कानूनी मामले में फंस चुके हैं. उनपर FIR दर्ज की गई है. दरअसल, उनपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है. मुख्य सचिव से मंजूरी मिलने के बाद 26 अगस्त को दर्ज इस केस में खुलासा हुआ है कि गुरुग्राम के पॉश सेक्टर-23 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के जिस 500 गज के प्लॉट की बाजार कीमत करीब ₹3.5 करोड़ (कलेक्टर रेट ₹1.75 करोड़) थी, उसका मालिकाना हक महज ₹6.71 लाख में थमा दिया गया. जब से यह खबर सामने आई है, लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं.
कौन हैं डी सुरेश?
बता दें कि डी सुरेश का जन्म 12 अगस्त को 1966 में हुआ था. उन्होंने हिस्ट्री से ग्रेजुएशन करने के बाद से MBA की डिग्री हासिल की. प्रशासनिक सेवा में आने के बाद से उन्होंने हरियाणा कैडर में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं.
कई अहम पदों पर निभाई जिम्मेदारी
डी. सुरेश कम से कम तीन दशक से प्रशासनिक पदों पर काम कर रहे हैं. उन्होंने प्रधान सचिव, मुख्य प्रशासक, आवासीय आयुक्त, सचिव, आयुक्त और महानिदेशक जैसे अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं. इसके अलावा उन्होंने प्रबंध निदेशक, प्रशासक, निदेशक, उप सचिव, निजी सचिव, संयुक्त सचिव और मंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में भी जिम्मेदारियां संभाली हैं. साथ ही उन्होंने जिला स्तर पर भी अच्छा काम किया है. उन्होंने उपायुक्त, अपर उपायुक्त और अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में भी काम किया है. इस तरह उनका करियर राज्य प्रशासन के निचले स्तर से लेकर सरकार के वरिष्ठ पदों तक फैला हुआ है.
अभी ही मिली थी हरियाणा की जिम्मेदारी
बता दें कि सुरेश को जनवरी 2026 में मत्स्य विभाग के प्रधान सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था. उन्होंने इस पद की जिम्मेदारी 30 जनवरी को संभाली.
क्यों दर्ज हुई FIR?
हालांकि, उनके खिलाफ FIR गुरुग्राम में स्थित 3.5 करोड़ के जमीन को लेकर हुआ है. उनपर 500 गज का प्लॉट महज ₹6.71 लाख में लुटाने का आरोप लगा है.
आजतक एजुकेशन डेस्क