न भेजा रिज्यूमे, न नौकरी के लिए किया अप्लाई, फिर कैसे मिले 50 लाख के दो जॉब ऑफर? 

एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट को बिना किसी पोस्ट पर अप्लाई किए 50 लाख रुपये का जॉब ऑफर मिला है. उन्होंने बताया कि कैसे AI-पावर्ड प्रोडक्ट बनाने और सीधे स्टार्टअप फाउंडर्स से संपर्क करने से उन्हें कॉलेज में रहते हुए दो अच्छे ऑफर मिले. 

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किसी जॉब के लिए नहीं किया अप्लाई फिर भी मिल गया 50 लाख पैकेज की दो जॉब ऑफर. किसी जॉब के लिए नहीं किया अप्लाई फिर भी मिल गया 50 लाख पैकेज की दो जॉब ऑफर.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:06 AM IST

कॉलेज में पढ़ाई के साथ नौकरी की तैयारी करना और अच्छी कंपनी में जगह बनाना आसान नहीं होता. इसके लिए ज्यादातर छात्रों को मेहनत करनी होती है. कभी वह कैंपस प्लेसमेंट की राह देखते हैं या तो जॉब पोर्टल पर आवेदन करते हैं. लेकिन एक इंजीनियरिंग छात्र ने इससे अलग रास्ता अपनाया.

उसने नौकरी के लिए आवेदन करने के बजाय अपने दोस्त के साथ मिलकर AI की मदद से एक वीडियो एडिटिंग टूल बनाया. इस प्रोजेक्ट को करीब 13 हजार यूजर्स मिले और इसी काम ने एक स्टार्टअप के फाउंडर का ध्यान खींच लिया. जबकि ध्यान से टारगेट किए गए ईमेल के एक राउंड ने उसे एक हफ्ते के अंदर दूसरा ऑफर दिलाने में मदद की.

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रेडिट पर अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए, स्टूडेंट ने कहा कि उसे पहला मौका कॉलेज के तीसरे साल में मिला था. उसने एक दोस्त के साथ मिलकर AI-पावर्ड वीडियो एडिटर डेवलप करने में करीब दो साल लगाए थे. हालांकि प्रोडक्ट में कुछ बग थे और दोनों ने आखिरकार इस पर काम करना बंद कर दिया क्योंकि वे बिजनेस को बढ़ा नहीं पा रहे थे, लेकिन यह करीब 13,000 यूज़र्स को अट्रैक्ट करने में कामयाब रहा. 

दो साल तक दोस्त के साथ बनाया AI वीडियो एडिटर

छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपना अनुभव शेयर किया है. उसने बताया कि कॉलेज के तीसरे साल में ही उसे नौकरी के दो बड़े ऑफर मिल गए थे. इसकी शुरुआत करीब दो साल पहले हुई, जब उसने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर AI आधारित वीडियो एडिटर बनाना शुरू किया.

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हालांकि, यह प्रोडक्ट पूरी तरह से तैयार नहीं था और इसमें कई सारी कमियां भी थीं. बाद में जब दोनों दोस्तों ने इसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम रोक दिया क्योंकि वे इसके बिजनेस को बढ़ाने में सफल नहीं हो पा रहे थे. इसके बावजूद उनके बनाए टूल को करीब 13 हजार लोगों ने इस्तेमाल किया था.

बिना रिज्यूमे के मिला 50 लाख का पहला ऑफर

छात्र के मुताबिक, प्रोडक्ट लॉन्च करने के कुछ दिनों बाद एक्स पर एक स्टार्टअप फाउंडर की नजर उनके काम पर पड़ी. वह फाउंडर भी इसी तरह के प्रोडक्ट पर काम कर रहे थे. उन्हें छात्र का अनुभव अपनी कंपनी के काम के लिए उपयोगी लगा और उन्होंने उसे रिमोट जॉब का ऑफर दे दिया.

इस ऑफर की सालाना सैलरी करीब 50 लाख रुपये थी. छात्र ने बताया कि उस समय उसके पास रिज्यूमे तक तैयार नहीं था. उसे अपने बनाए प्रोडक्ट और उससे मिले अनुभव के आधार पर यह मौका मिला. यानी उसे नौकरी पाने के लिए किसी जॉब पोर्टल पर आवेदन करने या ट्रेडिशनल हायरिंग प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ा. 

30 स्टार्टअप्स को भेजे ईमेल, एक हफ्ते में मिला दूसरा ऑफर

छात्र को एक और नौकरी का मौका मिला, लेकिन उसमें ऑफिस जाकर काम करना जरूरी था. वह अपनी पढ़ाई के साथ इस व्यवस्था में काम नहीं करना चाहता था. इसलिए उसने दूसरी जगह अवसर तलाशने का फैसला किया.

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इस बार उसने सैकड़ों कंपनियों में एक जैसा आवेदन भेजने के बजाय अपने काम और रुचि से मेल खाने वाले स्टार्टअप्स की तलाश की. उसने करीब 30 स्टार्टअप्स की सूची बनाई और उनके फाउंडर्स को सीधे ईमेल भेजे. इन ईमेल में उसने अपने प्रोजेक्ट और अनुभव के बारे में बताया.

छात्र के मुताबिक, 30 में से 13 स्टार्टअप्स ने जवाब दिया. इसके बाद एक हफ्ते के भीतर उसे एक और ऑफर मिल गया. यह ऑफर Y Combinator से जुड़े एक स्टार्टअप की ओर से था और इसका सालाना पैकेज भी करीब 50 लाख रुपये बताया गया.

कॉलेज के छात्रों को क्या सलाह दी?

अपने अनुभव से छात्र ने दूसरे इंजीनियरिंग छात्रों को सलाह दी कि वे सिर्फ जॉब पोर्टल पर आवेदन भेजने तक सीमित न रहें. उन्हें अपनी पसंद का कोई एक क्षेत्र चुनकर उस पर काम करना चाहिए और ऐसा प्रोजेक्ट बनाना चाहिए, जिसे संभावित कंपनी के सामने दिखाया जा सके.

उसका कहना है कि सैकड़ों कंपनियों को सामान्य ईमेल भेजने के बजाय करीब 30 ऐसी कंपनियों की पहचान करनी चाहिए, जिनके काम से उनकी स्किल मेल खाती हो. इसके बाद हर कंपनी के हिसाब से फाउंडर या संबंधित व्यक्ति को ईमेल करना चाहिए.

छात्र ने अपनी बात समझाते हुए कहा कि उम्मीदवारों को हर कंपनी के लिए थोड़ा-थोड़ा उपयुक्त होने के बजाय कुछ चुनिंदा कंपनियों के लिए अपनी स्किल को बेहतर तरीके से तैयार करना चाहिए. उसने इसे 95 फीसदी फिट बनाम 60 फीसदी फिट के उदाहरण से समझाया.

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अब AI टूल बनाने पर भी कर रहा है काम

छात्र ने बताया कि वह Backdoor नाम के एक प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है. यह एक AI एजेंट है, जिसका मकसद लोगों को स्टार्टअप्स के लिए पर्सनलाइज्ड ईमेल तैयार करने और भेजने में मदद करना है. उसकी कहानी से यह बात सामने आती है कि कॉलेज के दौरान बनाया गया कोई प्रोजेक्ट भी करियर के नए अवसर खोल सकता है. उसका वीडियो एडिटर भले ही एक सफल बिजनेस नहीं बन पाया, लेकिन उसे बनाने और करीब 13 हजार यूजर्स तक पहुंचाने का अनुभव नौकरी पाने में काम आया.

हालांकि, यह छात्र का निजी अनुभव है. इससे यह नहीं माना जा सकता कि हर छात्र को इसी तरीके से 50 लाख रुपये का ऑफर मिल जाएगा. लेकिन यह जरूर दिखाता है कि अपनी स्किल को किसी प्रोजेक्ट के जरिए साबित करना और सही कंपनियों तक अपना काम पहुंचाना नौकरी की तलाश में मददगार हो सकता है.

AI समझ रहा है...

स्टूडेंट का यह अनुभव ऐसे समय में आया है जब टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स से उम्मीद की जाने वाली स्किल्स पर फिर से सोच रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कई कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के कामों को तेज बना रहे हैं जबकि कंपनियां ऐसे लोगों की तलाश में हैं जो इन टूल्स का इस्तेमाल करके प्रोडक्ट्स बना और डिलीवर कर सकें.

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लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल से ट्रेडिशनल टेक्नोलॉजी जॉब्स को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो रही है. CNN के साथ शेयर किए गए हाल ही के स्टैक ओवरफ्लो सर्वे में पाया गया कि इसमें हिस्सा लेने वाले 10 में से छह टेक्नोलॉजी वर्कर्स ने कहा कि वे AI का इस्तेमाल करने से बचने की कोशिश करते हैं. इस सर्वे में 169 देशों के लगभग 30,000 सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को शामिल किया गया.

वहीं, 65 प्रतिशत जवाब देने वालों ने कहा कि वे कोडिंग असिस्टेंट या AI एजेंट का इस्तेमाल करते हैं। नतीजे बताते हैं कि डेवलपर्स का टेक्नोलॉजी के साथ एक मुश्किल रिश्ता है जबकि कई लोग इसे अपना रहे हैं, हर कोई इस बात से सहमत नहीं है कि इससे उनका काम आसान हो जाता है.

स्टैक ओवरफ्लो के CEO प्रशांत चंद्रशेखर ने CNN को बताया कि AI करियर ग्रोथ और जॉब सिक्योरिटी को लेकर मौजूदा चिंताओं को और बढ़ा रहा है. अनुभवी डेवलपर्स सवाल कर रहे हैं कि उनकी मौजूदा स्किल्स कितनी काम की रहेंगी, जबकि एंट्री-लेवल वर्कर्स को ज्यादा उम्मीदें हैं क्योंकि AI टूल्स पहले से ही कुछ बेसिक काम संभाल सकते हैं.

यह स्थिति भारत में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए खास तौर पर जरूरी है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए हाल ही में लिखे एक कॉलम में लेखक और कॉलमिस्ट चेतन भगत ने सवाल किया कि क्या भारतीय परिवार अपने बच्चों को ऐसे जॉब मार्केट के लिए तैयार कर रहे हैं जो AI की वजह से तेजी से बदल रहा है.

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उनके कॉलम में दिए गए डेटा से पता चला कि भारत के IT-BPM सेक्टर में नए ग्रेजुएट की भर्ती FY22 में लगभग चार लाख से घटकर FY26 में 1.75 लाख हो गई, जबकि इंजीनियरिंग में एडमिशन 9.2 लाख से बढ़कर 13.5 लाख हो गए. 

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रिपोर्टर- अंकिता गर्ग

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