कभी DUSU चुनाव में बांटें पर्चे... आगे जाकर मिला मुख्यमंत्री से केंद्रीय मंत्री तक का ताज, ये हैं वो बड़े नाम

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति का महत्वपूर्ण दिन है जहां 1.4 लाख से अधिक छात्र अपने प्रतिनिधियों के चुनाव के लिए वोट डाल रहे हैं. यह चुनाव केवल चार पदों के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य के नेताओं के लिए एक मंच है. कई पूर्व छात्र नेता जैसे अरुण जेटली, अजय माकन, विजय गोयल, अलका लांबा और रेखा गुप्ता ने इसी मंच से राजनीति की शुरुआत की और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे, जानें इनके बारे में...

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अरुण जेटली, अजय माकन, रेखा गुप्ता (बीच में), अलका लांबा और विजय गोयल अरुण जेटली, अजय माकन, रेखा गुप्ता (बीच में), अलका लांबा और विजय गोयल

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:36 AM IST

आज दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्र राजनीति का सबसे बड़ा दिन है. नॉर्थ से लेकर साउथ कैंपस तक बैरिकेडिंग है, सुरक्षा सख्त है और 1.4 लाख से ज्यादा छात्र अपने भावी नेताओं को चुनने के लिए वोट डाल रहे हैं. लेकिन डीयू का ये चुनाव केवल चार पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव की जंग भर नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी की ये राजनीति दरअसल देश के सियासी मंच की सबसे बड़ी नर्सरी मानी जाती है.

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आज जब छात्र वोटिंग के लिए लाइनों में खड़े हैं, तब यह जानना दिलचस्प है कि इसी कैंपस की जमीन पर पर्चे बांटने और चुनावी नारेबाजी करने वाले छात्र नेता आगे चलकर देश के वित्त मंत्री, खेल मंत्री और संसद के दिग्गज चेहरे बने. आइए जानते हैं कैंपस से निकलकर देश की राजनीति में अपनी धाक जमाने वाले ऐसे ही प्रमुख नेताओं के बारे में:

अरुण जेटली: SRCC का वो छात्र नेता जो देश का वित्त मंत्री बना
दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति का सबसे बड़ा और सबसे सफल नाम दिवंगत अरुण जेटली हैं. श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में पढ़ाई के दौरान जेटली ने छात्र राजनीति में कदम रखा. साल 1974 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के टिकट पर DUSU अध्यक्ष चुने गए थे. इसी दौर में आपातकाल के दौरान उन्होंने छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गए. आगे चलकर वे भारत के वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जैसे अहम पदों पर पहुंचे.

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अजय माकन: 21 साल की उम्र में DUSU अध्यक्ष, फिर बने केंद्रीय मंत्री
हंसराज कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले अजय माकन ने साल 1985 में NSUI के बैनर तले DUSU अध्यक्ष का चुनाव जीता. उस समय उनकी उम्र महज 21 साल थी. छात्र राजनीति में अपनी पैठ बनाने के बाद वे दिल्ली के सबसे कम उम्र के विधायकों में शामिल हुए. आगे चलकर वे दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और UPA सरकार के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री व आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री जैसे बड़े पदों पर पहुंचे.

विजय गोयल: आपातकाल के दौर का छात्र आंदोलन और वाजपेयी-मोदी सरकार में मंत्री
1977-78 में ABVP के बैनर तले DUSU अध्यक्ष बने विजय गोयल ने भी अपनी राजनीतिक जमीन इसी कैंपस से तैयार की थी. इमरजेंसी के समय छात्र अधिकारों के लिए मुखर रहने वाले गोयल ने आगे चलकर दिल्ली से लोकसभा का चुनाव जीता. वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में और बाद में नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री और संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे.

अलका लांबा: 1995 में NSUI का बड़ा चेहरा, अब कांग्रेस महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष
वर्ष 1995 में NSUI की ओर से भारी मतों से DUSU अध्यक्ष चुनी गईं अलका लांबा कैंपस राजनीति की सबसे चर्चित महिला चेहरों में से एक थीं. अपनी तेजतर्रार भाषण शैली के लिए जानी जाने वाली अलका लांबा ने बाद में मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा. वे दिल्ली की चांदनी चौक विधानसभा सीट से विधायक बनीं और वर्तमान में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं.

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रेखा गुप्ता: दौलत राम कॉलेज से शुरुआत और दिल्ली का ताज
दौलत राम कॉलेज की छात्रा रहीं रेखा गुप्ता ने वर्ष 1996-97 में ABVP की तरफ से DUSU अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था. उन्होंने कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. छात्र राजनीति से निकलकर वे भारतीय जनता पार्टी के संगठन से जुड़ीं, दिल्ली में पार्षद और निगम की विभिन्न समितियों की अध्यक्ष रहीं और आज दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं.

कैंपस से संसद तक का सफर जारी...
आज फिर ईवीएम का बटन दबाते समय 1.4 लाख से ज्यादा छात्र केवल अपने कॉलेज के प्रतिनिधि को नहीं चुन रहे हैं, बल्कि संभवतः देश के किसी भावी मंत्री या सांसद की राजनीतिक यात्रा की नींव रख रहे हैं. आज शाम 7:30 बजे तक चलने वाले इस मतदान का फैसला शनिवार को आएगा, लेकिन इतिहास गवाह है कि DUSU की यह नर्सरी नए नेतृत्व को गढ़ने का काम हमेशा जारी रखेगी.

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DUSU से निकले 10 और प्रमुख चेहरे, जिन्होंने देश और राज्यों की राजनीति में बनाई पहचान

राजीव गोस्वामी (1991 में निर्दलीय डूसू अध्यक्ष): 1990 के ऐतिहासिक मंडल कमीशन विरोध प्रदर्शनों का चेहरा रहे राजीव गोस्वामी ने छात्रों के अधिकारों की बड़ी लड़ाई लड़ी थी。
अनिल झा (1997-98 में ABVP से डूसू अध्यक्ष): डूसू से शुरुआत कर बीजेपी के बड़े नेता बने और दिल्ली विधानसभा में किराड़ी सीट से विधायक रहे.
विजय जोली (1980-81 में ABVP से डूसू अध्यक्ष): श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के छात्र रहे जोली बीजेपी के वरिष्ठ नेता बने और साकेत से विधायक रहे.
सुधांशु मित्तल (1981-82 में ABVP से डूसू अध्यक्ष): डीयू राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और प्रवक्ता बने.
नूपुर शर्मा (2008-09 में ABVP से डूसू सह-सचिव): लॉ फैकल्टी से पढ़ाई करते हुए डूसू चुनाव जीता और बाद में बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं.
रागिनी नायक (2005-06 में NSUI से डूसू अध्यक्ष): मिरांडा हाउस की छात्रा रहीं रागिनी ने डूसू से पहचान बनाई और वर्तमान में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.
अमृता धवन (2006-07 में NSUI से डूसू अध्यक्ष): दिल्ली विश्वविद्यालय से शुरुआत कर दिल्ली कांग्रेस और महिला कांग्रेस में वरिष्ठ पदों पर जिम्मेदारी संभाली.
आशीष सूद (1988-89 में ABVP से डूसू अध्यक्ष): ARSD कॉलेज के छात्र रहे सूद ने बोफोर्स घोटाले के खिलाफ छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था और बाद में बीजेपी के वरिष्ठ नेता व पार्षद बने.
गजराज बहादुर नागर (1954-55 में डूसू के पहले अध्यक्ष): डूसू के शुरुआती दौर के अध्यक्ष रहे और बाद में हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बने.
सुभाष चोपड़ा (1970-71 में NSUI से डूसू अध्यक्ष): डूसू से निकलकर मुख्यधारा में आए, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष बने और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष रहे.

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