स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास समेत कई ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजरायल भी ईरान पर हमलों में सीधे शामिल हो जाएगा?
इस पूरे संघर्ष को मध्य पूर्व का सबसे बड़ा टकराव माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. अगर यह जलमार्ग बंद हुआ तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो जाएगी.
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अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान पर कई हमले किए हैं. उसने ईरानी ड्रोन, मिसाइल साइटों और बंदर अब्बास के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी दे रहा था, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को खतरा था.
अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान दुनिया के तेल के रास्ते को ब्लैकमेल के हथियार के रूप में इस्तेमाल करे. इसलिए उसने ईरान की नौसेना और IRGC के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए. बंदर अब्बास ईरान का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जहां से ईरान होर्मुज को नियंत्रित करता है. अमेरिका इन्हीं ठिकानों को कमजोर करके ईरान की क्षमता घटाना चाहता है.
इजरायल की भूमिका क्या होगी?
इजरायल और ईरान के बीच दुश्मनी पुरानी है. ईरान इजरायल को मिटाने की धमकी देता रहा है, जबकि इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सबसे बड़ा खतरा मानता है.
पिछले साल इजरायल ने ईरान पर सीधे हमले किए थे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अब अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला करेगा? इजरायल ने पहले ही कहा है कि वह ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए किसी भी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा.
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अगर इजरायल इस जंग में शामिल हुआ तो युद्ध का दायरा बहुत बढ़ सकता है. इजरायल की एयर फोर्स बहुत मजबूत है. वह ईरान के अंदर गहराई तक हमला करने की क्षमता रखती है. फिलहाल इजरायल ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका के साथ मिलकर हमले करने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरे सैन्य और खुफिया संबंध हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों इतना अहम है?
होर्मुज दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है. फारस की खाड़ी से निकलने वाला ज्यादातर तेल इसी रास्ते से गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, UAE और कुवैत जैसे देशों का तेल इसी रास्ते पर निर्भर है.
ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे इस जलमार्ग पर मजबूत पकड़ देती है. अगर ईरान ने होर्मुज बंद कर दिया तो तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था ठप हो सकती है. अमेरिका इसी खतरे को रोकने के लिए सक्रिय हुआ है.
टकराव का असर क्या होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे-छोटे हमले जारी रह सकते हैं. अमेरिका होर्मुज को खुला रखना चाहता है, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय ताकत दिखाना चाहता है. अगर इजरायल ने हमलों में हिस्सा लिया तो स्थिति और बिगड़ सकती है. फिलहाल सीजफायर की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन पाकिस्तान की मध्यस्थता फेल होने के बाद कोई नई पहल नजर नहीं आ रही है.
ऋचीक मिश्रा