ईरान का रौद्र रूप... अमेरिकी बेस पर हमले के लिए किया 5 अचूक हथियारों का इस्तेमाल

IRGC ने अमेरिकी ठिकानों पर रविवार के हमलों का फुटेज जारी किया. क़द्र, एमाद, खैबर शेकन, फतेह-110 और जोल्फाग़ार जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया.

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इस तस्वीर में फतह-110 और एमाद मिसाइल दिख रही है, इसी से ईरान ने हमला किया. (Photo: ITG) इस तस्वीर में फतह-110 और एमाद मिसाइल दिख रही है, इसी से ईरान ने हमला किया. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:16 PM IST

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी बलों पर रविवार के हमलों का फुटेज जारी किया है. इस हमले में क़द्र, एमाद, खैबर शेकन, फतेह-110 और जोल्फागार जैसी एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ. ये मिसाइलें ठोस और तरल ईंधन वाली दोनों प्रकार की हैं. प्रेसिजन गाइडेड हैं. यह हमला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के बीच हुआ, जिसमें ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया.

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मिसाइलों की क्षमता और मारक शक्ति

कद्र मिसाइल: यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी रेंज 1800 से 2000 किलोमीटर तक है. इसमें 650 से 1000 किलोग्राम तक वॉरहेड ले जाने की क्षमता है. यह तरल और ठोस ईंधन का मिश्रण इस्तेमाल करती है. इसकी सटीकता अच्छी है. यह रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है.

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एमाद मिसाइल: यह भी मध्यम दूरी की मिसाइल है, जिसकी रेंज लगभग 1700 किलोमीटर है. इसमें 750 किलोग्राम पेलोड ले जा सकती है. खास बात यह है कि इसमें मैन्यूवरेबल री-एंट्री व्हीकल (MARV) लगा है, जो लक्ष्य पर पहुंचने तक दिशा बदल सकता है. इससे एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में मदद मिलती है.

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खैबर शेकन: यह ठोस ईंधन वाली मिसाइल है, जो तेजी से लॉन्च हो सकती है. इसकी रेंज 1450 किलोमीटर है और वॉरहेड 450-600 किलोग्राम तक. यह मैन्यूवरेबल वॉरहेड वाली है, जो दुश्मन की मिसाइल डिफेंस को भेदने में माहिर है.

फतेह-110: यह छोटी दूरी की मिसाइल है. रेंज 300 किलोमीटर तक, वॉरहेड लगभग 450-500 किलोग्राम. ठोस ईंधन वाली होने से यह मोबाइल और तेज है. सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल होती है.

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जोल्फागार: फतेह परिवार की ही एडवांस मिसाइल. रेंज 700 किलोमीटर तक और वॉरहेड 450-600 किलोग्राम. यह भी ठोस ईंधन वाली है और सबमुनिशन वॉरहेड ले जा सकती है, जिससे एक मिसाइल कई छोटे-छोटे विस्फोट कर सकती है.

इन मिसाइलों के अलावा ड्रोन भी हमले में इस्तेमाल हुए, जो कम ऊंचाई पर उड़कर टारगेट्स को भेदते हैं. इनकी मारक क्षमता कम दूरी पर बहुत अधिक होती है और ये सस्ते तथा प्रभावी हैं.

कैसे किए गए हमले? 

आईआरजीसी ने इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर अमेरिकी बेस जैसे जॉर्डन, बहरीन आदि पर हमला किया. ठोस ईंधन वाली मिसाइलें जल्दी तैयार हो जाती हैं, जबकि तरल ईंधन वाली लंबी दूरी तय करती हैं. प्रेसिजन गाइडेंस से निशाना सटीक होता है. 

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फुटेज में मिसाइलों के लॉन्च और लक्ष्य पर गिरने के दृश्य दिखाए गए, जिससे ईरान अपनी तैयारियों का संदेश देना चाहता है. यह हमला क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाता है. अमेरिका की एयर डिफेंस सिस्टम जैसे पैट्रियट इन मिसाइलों को रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन मैन्यूवरेबल वॉरहेड और सैल्वो अटैक उन्हें चुनौती देते हैं.

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ईरान इन मिसाइलों के जरिए क्षेत्रीय वर्चस्व दिखाना चाहता है. ये हथियार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और दुश्मन बेस को लक्ष्य करने में उपयोगी हैं. लेकिन अमेरिका की बेहतर तकनीक के सामने ईरान को चुनौतियां भी हैं. इस हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ और तेल की कीमतें बढ़ीं.

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले युद्ध को बढ़ा सकते हैं. दोनों पक्ष अब और जवाबी कार्रवाई की तैयारी में हैं. आईआरजीसी का फुटेज जारी करना प्रचार का भी हिस्सा है, जो घरेलू समर्थन बढ़ाता है. यह हमला ईरान की मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन है. कद्र से जोल्फागार तक की मिसाइलें अलग-अलग रेंज और शक्ति वाली हैं, जो ईरान को विकल्प देती हैं.  

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