वो 3 शब्द क्या थे जो ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट ने अपने कमांड को भेजे थे

ईरान ने अमेरिकी F-15E विमान मार गिराया. घायल वेपन ऑफिसर 24 घंटे पहाड़ी दरार में छिपा रहा. उसने तीन शब्दों का संदेश भेजा - God is Good. शुरू में इसे ईरानी जाल समझा गया. 200 सैनिकों वाली स्पेशल फोर्स ने रात में हाई रिस्क रेस्क्यू किया. CIA ने डिसेप्शन मिशन चलाया और इजरायल ने मदद दी.

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ये है अमेरिकी फाइटर जेट एफ-15 स्ट्राइक ईगल जिसके पायलट और वेपन सिस्टम ऑफिसर को पैराशूट से कूदना पड़ा था. (File Photo: Getty) ये है अमेरिकी फाइटर जेट एफ-15 स्ट्राइक ईगल जिसके पायलट और वेपन सिस्टम ऑफिसर को पैराशूट से कूदना पड़ा था. (File Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:49 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच 2026 की जंग में अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को ईरान ने मार गिराया. इस विमान में दो क्रू थे- पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO). दोनों पैराशूट की मदद से विमान से कूदे. लेकिन वे अलग-अलग जगहों पर उतरे. WSO घायल हो गया. पहाड़ी में 24 घंटे से ज्यादा छिपा रहा.  

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि इस अधिकारी ने तीन शब्दों का SOS संदेश भेजा – God is good. शुरू में अमेरिकी अधिकारियों को डर लगा कि यह संदेश ईरानी फोर्स का जाल हो सकता है. वे सोच रहे थे कि शायद ईरानी सैनिक इस संदेश का इस्तेमाल करके अमेरिकी बचाव टीम को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. 

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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रेडियो पर सुनाई दिया Power be to God जैसा कुछ और यह सुनकर लगा कि यह कोई मुस्लिम व्यक्ति बोल रहा है. बाद में पता चला कि यह अधिकारी बहुत धार्मिक है इसलिए उसने यह कहा था. बाद में डिफेंस अधिकारियों ने पुष्टि की कि संदेश God is good ही था.

ये है जाग्रोस पहाड़ों की रेंज. इसी में से किसी पहाड़ में छिपा था अमेरिकी पायलट. (Photo: Getty)

अधिकारी पहाड़ की दरार में कैसे छिपे और बचाव कैसे हुआ

घायल WSO ने पहाड़ की एक दरार में छिपकर खुद को बचाया. उसके चारों तरफ हजारों ईरानी सैनिक और स्थानीय लोग उसे ढूंढ रहे थे. तेहरान सरकार ने उसके लिए इनाम की घोषणा कर दी थी. अधिकारी ने SERE ट्रेनिंग का इस्तेमाल किया. वह बीकन का इस्तेमाल बहुत कम करता था ताकि उसकी जगह न पता चले.

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इसके बजाय उसने सुरक्षित एन्क्रिप्टेड डिवाइस से अमेरिकी फोर्स से संपर्क किया. अमेरिकी सर्वेलांस टेक्नोलॉजी ने आखिरकार उसकी सटीक लोकेशन ट्रैक कर ली. ट्रंप ने बताया कि अधिकारी 24 घंटे से ज्यादा समय तक पहाड़ी इलाके में जिंदा रहा. बचाव के लिए हाई रिस्क नाइट स्पेशल फोर्स मिशन चलाया गया जिसमें 200 सैनिक थे. 

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यह मिशन रात में हुआ. इससे पहले दिन में एक और तेज बचाव अभियान चलाकर F-15E पायलट को भी निकाला गया था जो कुछ मील दूर उतरा था. अमेरिकी डिफेंस अधिकारियों ने पहले बचाव को bold and quick snatch कहा जो भारी ईरानी गोलीबारी के बीच हुआ.

CIA का डिसेप्शन मिशन और इजरायल की मदद

बचाव के दौरान CIA ने ईरान के अंदर एक बड़ा डिसेप्शन मिशन चलाया. CIA ने झूठी खबर फैलाई कि एयरमैन को पहले ही ढूंढ लिया गया है. उसे जमीन रास्ते से बाहर निकाला जा रहा है. इसका मकसद था कि ईरानी सर्च टीम गलत जगह पर चली जाए. असली WSO की जगह का पता न चले. 

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने खास टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अधिकारी की लोकेशन कन्फर्म की. लोकेशन मिलने के बाद समन्वय व्हाइट हाउस और पेंटागन के साथ किया गया. ट्रंप ने को बताया कि इजरायल ने इस ऑपरेशन में सीमित मदद दी. इजरायली खुफिया एजेंसी ने ईरानी सैनिकों की मूवमेंट की जानकारी दी.

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इजरायली एयर फोर्स ने रेस्क्यू जोन की तरफ बढ़ रहे ईरानी फोर्स पर हमला करके उन्हें धीमा किया. ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप बहुत मजबूत है. उन्होंने इस ऑपरेशन में करीबी से काम किया.

जाग्रोस माउंटेन रेंज का एक हिस्सा. (File Photo: Getty)

दोनों बचाव अभियानों में क्या खास था

F-15E विमान गिरने के बाद दो अलग-अलग बचाव अभियान चलाए गए. पहला दिन के उजाले में पायलट के लिए था. दूसरा रात में WSO के लिए था जो ज्यादा मुश्किल और खतरनाक था क्योंकि अधिकारी घायल था और ईरानी फोर्स चारों तरफ थी. दोनों ही मिशनों में अमेरिकी फोर्स ने ईरानी इलाके के अंदर अस्थाई बेस बनाया.

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