ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा अमेरिका, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि अमेरिका मध्य पूर्व में सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है. कतर के अल उदेद, जॉर्डन के मुवाफक साल्टी और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान बेस पर फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट विमान और पैट्रियट सिस्टम बढ़ाए गए है. ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमले की तैयारी दिख रही है. ट्रंप की चेतावनी से तनाव चरम पर है.

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कतर के दोहा में मौजूद अल उदेद एयरफोर्स बेस पर तैनात अमेरिकी वायुसेना का फाइटर जेट. (Photo: Reuters) कतर के दोहा में मौजूद अल उदेद एयरफोर्स बेस पर तैनात अमेरिकी वायुसेना का फाइटर जेट. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:10 PM IST

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों पर लड़ाकू विमानों, टैंकरों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्लैनेट लैब्स और रॉयटर्स की तस्वीरों में कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब के अड्डों पर बदलाव साफ दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमले की तैयारी या जवाबी कार्रवाई से बचाव का संकेत हो सकता है.  

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अमेरिका-ईरान के बीच तनाव 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से न्यूक्लियर डील चाहते हैं, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी रोक की मांग कर रहे हैं. ईरान ने साफ मना कर दिया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर डील नहीं हुई तो अगला हमला बहुत बुरा होगा. पिछले साल अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे. अब फिर तनाव बढ़ रहा है. ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स को मिट्टी से ढक रहा है. टनल बंद कर रहा है, जो हमले की आशंका दिखाता है.

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिख रहा है?

प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों से जनवरी और फरवरी 2026 के बीच अमेरिकी अड्डों पर बड़े बदलाव दिखे...

अल उदेद एयर बेस, कतर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय. 17 जनवरी से 1 फरवरी के बीच विमानों की संख्या बढ़ी है. मोबाइल पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर्स तैनात किए गए है, जो ईरान की मिसाइलों से बचाव के लिए हैं. 

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मुवाफक साल्टी एयर बेस, जॉर्डन: 25 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दर्जनों F-15E फाइटर जेट्स, A-10 ग्राउंड अटैक विमान और MQ-9 ड्रोन आए. यह ईरान के करीब है. 

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प्रिंस सुल्तान एयर बेस, सऊदी अरब: C-5 गैलेक्सी और C-17 ट्रांसपोर्ट विमान दिखे, जो भारी सामान ले जाते हैं.

अन्य जगहों जैसे ओमान और डिएगो गार्सिया में भी विमान बढ़े हैं. कुल मिलाकर फाइटर जेट्स, टैंकर और डिफेंस सिस्टम की तैनाती बढ़ी है.

इसका मतलब क्या है?

  • ट्रंप प्रशासन साफ संदेश दे रहा है कि वह तैयार है.
  • यह हमले की तैयारी हो सकती है, क्योंकि इतनी तैनाती महंगी है.
  • या ईरान की जवाबी मिसाइलों से बचाव, क्योंकि ईरान ने पहले अल उदेद पर हमला किया था.
  • ईरान भी अपनी न्यूक्लियर साइट्स (जैसे इस्फहान) को मजबूत कर रहा है, टनल मिट्टी से भर रहा है.

आगे क्या?

बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों तरफ तैयारी जोरों पर है. अगर हमला हुआ तो क्षेत्रीय युद्ध हो सकता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि यह डिप्लोमेसी को मजबूत करने का दबाव भी हो सकता है. 

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