ईरान के साथ डील से MoU पर आ गए ट्रंप, 60 दिन की 'जुगाड़ू डील' में आखिर क्या-क्या है?

ट्रंप ने ईरान के साथ 60 दिन की अस्थायी डील (MoU) पर सहमति जताई है. होर्मुज खुला रखने, ड्रोन-मिसाइल हमले रोकने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत की शुरुआत इस 'जुगाड़ू डील' का मुख्य हिस्सा है.

Advertisement
अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 60 दिन के MoU पर तैयार हुए हैं. (Photo: ITG) अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 60 दिन के MoU पर तैयार हुए हैं. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण MoU यानी मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर सहमति जताई है. यह 60 दिन की अस्थाई डील बताई जा रही है, जिसे भारतीय शब्दों में 'जुगाड़ू डील' भी कहा जा रहा है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिरता लाने के लिए यह समझौता किया गया है. हालांकि विशेषज्ञ इसे स्थायी समाधान की बजाय अस्थायी ठहरा रहे हैं.

Advertisement

पिछले कई हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तीखा टकराव चल रहा था. ईरान ने जलमार्ग बंद करने की धमकी दी थी, जबकि अमेरिका ने बंदर अब्बास समेत कई ठिकानों पर हमले किए. 

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान बॉर्डर पर बाड़ लगाने से कैसे बदल गई सिक्योरिटी, जानिए क्यों जरूरी है बांग्लादेश बॉर्डर पर स्मार्ट फेंसिंग

पाकिस्तान की मध्यस्थता भी असफल रही. ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने अचानक ईरान के साथ बातचीत तेज की और 60 दिन के लिए एक अस्थाई MoU पर सहमति बन गई. ट्रंप ने इसे अच्छी शुरुआत बताया है, जबकि ईरान ने इसे अमेरिकी दबाव में मजबूरी का समझौता करार दिया है.

ईरान के बंदर अब्बास पर जहाजों पर निशाना लगाते ईरानी सैनिक. (Photo: Reuters)

60 दिन की डील में क्या-क्या शामिल है?

Advertisement

इस अस्थायी समझौते में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें शामिल बताई जा रही हैं...

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रखना... ईरान 60 दिनों तक होर्मुज जलमार्ग को बंद नहीं करेगा और वहां से तेल-गैस का सामान्य व्यापार जारी रहेगा. अमेरिका ने बदले में ईरान पर कुछ तत्काल प्रतिबंधों में ढील देने का वादा किया है.
  • ड्रोन और मिसाइल हमलों पर रोक... दोनों पक्ष 60 दिनों तक एक-दूसरे पर ड्रोन या मिसाइल हमले नहीं करेंगे. ईरान की IRGC और अमेरिकी सेना के बीच सीधा टकराव टाला जाएगा.
  • परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत... ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता बढ़ाने और IAEA निरीक्षकों को ज्यादा पहुंच देने पर सहमत हुआ है. अमेरिका ने पूर्ण परमाणु समझौते (JCPOA) की बहाली की दिशा में आगे बढ़ने का आश्वासन दिया है.
  • क्षेत्रीय तनाव कम करना... ईरान समर्थित समूहों (हिज्बुल्लाह, हूती आदि) को अमेरिकी ठिकानों पर हमले न करने का निर्देश देने का वादा किया गया है.
  • तेल निर्यात में बढ़ोतरी... ईरान को कुछ मात्रा में तेल निर्यात करने की छूट मिलेगी, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को तत्काल राहत मिल सकेगी.
बंदर अब्बास के पास मौजूद तट पर लहरों का मजा लेते ईरानी लोग. (Photo: Reuters)

क्यों कह रहे हैं 'जुगाड़ू डील'?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है. सिर्फ 60 दिनों का समय रखा है ताकि दोनों पक्ष आगे की स्थाई बातचीत के लिए समय ले सकें. ट्रंप प्रशासन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव में जल्दबाजी में यह समझौता कर रहा है, इसलिए इसे जुगाड़ू डील कहा जा रहा है. ईरान की अर्थव्यवस्था भारी सैंक्शन्स से जूझ रही है, जबकि अमेरिका होर्मुज में युद्ध नहीं चाहता. दोनों पक्षों की मजबूरी ने इस समझौते को जन्म दिया है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: मॉनसून को कितना नुकसान पहुंचाएगा अल-नीनो? आ गया बारिश का नया आंकड़ा

भारत पर क्या असर?

भारत के लिए यह डील महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा 80% से ज्यादा तेल खाड़ी क्षेत्र से आता है. होर्मुज बंद होने की स्थिति में तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, जो महंगाई बढ़ाती हैं. 60 दिन का यह समझौता भारत को राहत देगा. लेकिन अगर लंबे समय में स्थाई समाधान नहीं निकला तो फिर से तनाव बढ़ सकता है. भारत दोनों देशों से संतुलित संबंध रखना चाहता है, इसलिए इस डील का स्वागत कर रहा है.

अगले 60 दिनों में दोनों पक्ष पूर्ण समझौते पर बातचीत करेंगे. अमेरिका परमाणु मुद्दे पर सख्ती दिखा सकता है, जबकि ईरान क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखना चाहेगा. अगर यह डील कामयाब रही तो मध्य पूर्व में कुछ स्थिरता आ सकती है. लेकिन अगर फेल हुई तो फिर से बड़े टकराव की आशंका रहेगी. ट्रंप की यह पहल दिखाती है कि वह बड़े संघर्ष से बचना चाहते हैं, लेकिन ईरान पर दबाव भी बनाए रखना चाहते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »