क्या है ईरान का बुशहर न्यूक्लियर प्लांट जहां हमला हुआ, कितना है रेडिएशन का खतरा?

ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिसर के बहुत करीब एक प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई. यह ईरान का एकमात्र ऑपरेशनल न्यूक्लियर प्लांट है, जिसे रूस की रोसाटॉम कंपनी चलाती है. हमला प्लांट की मौसम विभाग की इमारत के पास हुआ, लेकिन मुख्य रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.

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ये है ईरान का बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट जहां से हजारों घरों और इंडस्ट्री को बिजली सप्लाई होती है. (Photo: ITG) ये है ईरान का बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट जहां से हजारों घरों और इंडस्ट्री को बिजली सप्लाई होती है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:36 PM IST

ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के आसपास एक प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या बम) गिरने से बड़ा खतरा पैदा हो गया है. इस हमले में प्लांट के परिधि क्षेत्र के पास एक व्यक्ति की मौत हो गई. प्लांट का रिएक्टर तो सुरक्षित है, लेकिन पूरा इलाका हिल गया है. ईरान का यह एकमात्र चलने वाला न्यूक्लियर पावर प्लांट है, जो देश की बिजली जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करता है. 

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हमला प्लांट के मौसम विभाग की इमारत के बहुत करीब हुआ, लेकिन रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. IAEA ने भी पुष्टि की है कि रेडिएशन का स्तर सामान्य है. इस घटना ने पूरे विश्व में चिंता बढ़ा दी है क्योंकि प्लांट रूस के सहयोग से चलता है. युद्ध के बीच परमाणु साइट पर कोई भी हमला बहुत खतरनाक माना जाता है.

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बुशहर प्लांट कहां है और क्यों है इतना महत्वपूर्ण

बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में, बुशहर प्रांत में स्थित है. यह फारस की खाड़ी के किनारे समुद्र तट से बहुत करीब है. समुद्री पानी का इस्तेमाल प्लांट को ठंडा रखने के लिए किया जाता है. यह इलाका ईरान के मुख्य तेल उत्पादन वाले क्षेत्रों में से एक है. 

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प्लांट 1,000 मेगावाट बिजली पैदा करता है, जो लाखों घरों और उद्योगों को बिजली देता है. दुनिया इसे इसलिए भी नजर रखती है क्योंकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से संदिग्ध रहा है. हालांकि यह सिविलियन प्लांट है, यानी बिजली बनाने के लिए है, लेकिन IAEA इसकी सख्त निगरानी करती है.

प्लांट का इतिहास और निर्माण कैसे हुआ

बुशहर प्लांट की कहानी 1970 के दशक से शुरू होती है. उस समय जर्मनी की कंपनी सीमेंस ने इसका निर्माण शुरू किया था. लेकिन 1979 की ईरानी क्रांति के बाद जर्मन कंपनी काम छोड़कर चली गई. फिर 1995 में ईरान ने रूस के साथ समझौता किया. रूस की कंपनी रोसाटॉम (Atomstroyexport) ने प्लांट को पूरा किया. 

पहला रिएक्टर VVER-1000 प्रकार का 1,000 मेगावाट वाला था, जो 2011 में पूरी तरह ऑपरेशनल हो गया. अभी रोसाटॉम के रूसी तकनीशियन प्लांट को चलाते और रखरखाव करते हैं. ईरान का एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान (AEOI) प्लांट का मालिक है. सैकड़ों रूसी कर्मचारी वहां काम करते हैं.

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प्लांट रूस में बने 4.5 प्रतिशत लो-एनरिच्ड यूरेनियम से चलता है. रूस ईंधन सप्लाई करता है. इस्तेमाल हो चुके ईंधन को वापस ले जाता है. रोसाटॉम अभी प्लांट के दूसरे और तीसरे यूनिट का निर्माण भी कर रहा है. हमले के बाद रोसाटॉम के सीईओ एलेक्सी लिखाचेव ने हमले की कड़ी निंदा की है.  

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हाल का हमला क्या था और इसका क्या असर पड़ा

हाल ही में प्लांट के कैंपस के बहुत करीब एक प्रोजेक्टाइल गिरा. हमला मेट्रोलॉजी सर्विस बिल्डिंग के पास हुआ. एक व्यक्ति की मौत हो गई, लेकिन रिएक्टर और मुख्य प्लांट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. ईरान और रूस ने इसे जानबूझकर हमला बताया है. IAEA ने पुष्टि की कि रेडिएशन लेवल बिल्कुल सामान्य है. 

इस हमले से न्यूक्लियर सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है. युद्ध के दौरान अमेरिका-इजरायल ने ईरान की अन्य न्यूक्लियर साइट्स (जैसे नतांज और फोर्डो) पर हमले किए थे, लेकिन बुशहर पर यह पहला ऐसा हमला है जो प्लांट के इतने करीब हुआ. 

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